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जनवरी–मार्च तिमाही में शहरी बेरोजगारी में मामूली राहत, ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी चिंता
देश में कुल श्रम बल भागीदारी दर भी थोड़ी कमजोर हुई है और यह घटकर 55.5 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछली तिमाही में 55.8 प्रतिशत थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी–मार्च 2026 तिमाही में भारत के शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि ग्रामीण इलाकों में स्थिति थोड़ी बिगड़ी है. शहरों में रोजगार बाजार में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन ग्रामीण स्तर पर बेरोजगारी में बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है. यह आंकड़े देश की लेबर मार्केट की मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं.
शहरों में बेरोजगारी घटी, ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ोतरी
15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लिए शहरी बेरोजगारी दर जनवरी–मार्च 2026 में घटकर 6.6 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले अक्टूबर–दिसंबर 2025 में 6.7 प्रतिशत थी. इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.3 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही में 4.0 प्रतिशत थी.
श्रम भागीदारी दर में भी हल्की गिरावट
देश में कुल श्रम बल भागीदारी दर भी थोड़ी कमजोर हुई है और यह घटकर 55.5 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछली तिमाही में 55.8 प्रतिशत थी. शहरी भागीदारी दर 50.2 प्रतिशत रही, जो पहले 50.4 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण भागीदारी 58.2 प्रतिशत रही, जो पहले 58.4 प्रतिशत थी.
महिला श्रम भागीदारी लगभग स्थिर
महिलाओं की श्रम भागीदारी में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया. कुल महिला श्रम भागीदारी दर 34.7 प्रतिशत रही, जो पहले 34.9 प्रतिशत थी. ग्रामीण क्षेत्रों में यह 39.2 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह लगभग स्थिर रहकर 25.4 प्रतिशत पर पहुंची.
वर्कर पॉपुलेशन रेशियो में मामूली गिरावट
रोजगार की स्थिति को दर्शाने वाला वर्कर पॉपुलेशन रेशियो घटकर 52.8 प्रतिशत रह गया, जो पहले 53.1 प्रतिशत था. शहरी क्षेत्रों में यह लगभग स्थिर 46.9 प्रतिशत पर रहा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह घटकर 55.7 प्रतिशत पर आ गया, जो पहले 56.1 प्रतिशत था.
ग्रामीण रोजगार की गुणवत्ता में सुधार के संकेत
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है. नियमित वेतन और मजदूरी वाले रोजगार की हिस्सेदारी बढ़कर 15.5 प्रतिशत हो गई, जो पहले 14.8 प्रतिशत थी. वहीं स्वरोजगार की हिस्सेदारी घटकर 62.5 प्रतिशत रह गई, जो पहले 63.2 प्रतिशत थी.
कृषि से अन्य क्षेत्रों की ओर बढ़ता रोजगार
ग्रामीण रोजगार में संरचनात्मक बदलाव भी देखने को मिला है. कृषि क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी घटकर 55.8 प्रतिशत रह गई, जो पहले 58.5 प्रतिशत थी. इसके विपरीत सेकेंडरी सेक्टर में यह बढ़कर 22.6 प्रतिशत हो गई, जबकि टर्शियरी सेक्टर की हिस्सेदारी भी बढ़कर 21.7 प्रतिशत पर पहुंच गई.
देश में 57 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार
सर्वे के अनुसार जनवरी–मार्च 2026 तिमाही में देशभर में औसतन 57.4 करोड़ लोग रोजगार में थे, जिनमें 40.2 करोड़ पुरुष और 17.2 करोड़ महिलाएं शामिल हैं. कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि शहरी रोजगार बाजार में हल्का सुधार हुआ है, लेकिन ग्रामीण बेरोजगारी में बढ़ोतरी और श्रम भागीदारी में गिरावट चिंता का संकेत है. रोजगार संरचना में बदलाव जरूर दिख रहा है, लेकिन संतुलित और स्थिर वृद्धि अभी भी एक चुनौती बनी हुई है.
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