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कमजोर नतीजों से JSW Energy का शेयर टूटा, डिविडेंड के बावजूद 7% तक फिसला स्टॉक

कमजोर नतीजों के बावजूद कंपनी ने निवेशकों को राहत देते हुए प्रति शेयर ₹2 का डिविडेंड घोषित किया है. यह प्रस्ताव कंपनी की आगामी 32वीं AGM में मंजूरी के लिए रखा जाएगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

मार्च तिमाही के कमजोर नतीजों का असर जेएसडब्ल्यू (JSW Energy) के शेयर पर साफ देखने को मिला है. कंपनी का शेयर सोमवार, 12 मई को शुरुआती कारोबार में 7 फीसदी से ज्यादा टूट गया, हालांकि बाद में गिरावट कुछ कम हुई. खबर लिखे जाने के दौरान शेयर 6.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 522 रुपये पर कारोबार करता दिखा. कमजोर मुनाफे और बढ़ती लागत ने निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला.

मुनाफे में गिरावट, लेकिन रेवेन्यू में मजबूती

कंपनी ने 11 मई को अपने Q4 नतीजे जारी किए थे. इस दौरान JSW Energy का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर 9 फीसदी घटकर ₹371 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹408 करोड़ था. हालांकि, ऑपरेशनल रेवेन्यू में मजबूत बढ़त देखने को मिली. कोर ऑपरेशंस से रेवेन्यू 41 फीसदी बढ़कर ₹4,498 करोड़ पहुंच गया, जो एक साल पहले ₹3,189 करोड़ था.

EPS पर भी पड़ा असर

मुनाफे में गिरावट का असर कंपनी की अर्निंग्स पर भी दिखा. EPS (Earnings Per Share) घटकर ₹2.12 रह गया, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह ₹2.34 था. यह संकेत देता है कि लागत दबाव और फाइनेंशियल खर्च बढ़ने से कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ा है.

फाइनेंस और फ्यूल कॉस्ट ने बढ़ाया दबाव

कंपनी के खर्चों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली. फाइनेंस कॉस्ट 138 फीसदी बढ़कर ₹1,608 करोड़ पहुंच गया, जबकि फ्यूल कॉस्ट 15 फीसदी बढ़कर ₹1,340 करोड़ रहा. यही बढ़ती लागत मुनाफे में गिरावट की बड़ी वजह बनी.

डिविडेंड का ऐलान, शेयरधारकों को राहत

कमजोर नतीजों के बावजूद कंपनी ने निवेशकों को राहत देते हुए प्रति शेयर ₹2 का डिविडेंड घोषित किया है. यह प्रस्ताव कंपनी की आगामी 32वीं AGM में मंजूरी के लिए रखा जाएगा. कंपनी ने 5 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है. यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के पास शेयर होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे.

लंबी अवधि में अब भी पॉजिटिव रिटर्न

हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद, पिछले एक साल में JSW Energy का शेयर करीब 8.23 फीसदी का रिटर्न दे चुका है. विशेषज्ञों का मानना है कि रेवेन्यू ग्रोथ मजबूत है, लेकिन बढ़ती लागत फिलहाल मार्जिन पर दबाव बनाए रख सकती है.

बाजार में ओवरऑल कमजोरी का असर

इस दौरान व्यापक शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली. निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में गिरावट रही, जिसका असर पावर और एनर्जी सेक्टर के शेयरों पर भी पड़ा. क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितता ने बाजार सेंटीमेंट को और कमजोर किया, जिससे निवेशकों ने जोखिम कम किया.
 


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