होम / बिजनेस / AI से बदलेगा मौसम पूर्वानुमान का भविष्य, IMD ने लॉन्च किया स्मार्ट मॉनसून मॉडल
AI से बदलेगा मौसम पूर्वानुमान का भविष्य, IMD ने लॉन्च किया स्मार्ट मॉनसून मॉडल
IMD के अनुसार नया AI मॉडल हर बुधवार को मॉनसून की प्रगति और सक्रियता का अनुमान जारी करेगा. यह मॉडल मौजूदा संख्यात्मक मौसम मॉडल और AI तकनीक को जोड़कर तैयार किया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
देश में बदलते मौसम और जलवायु संकट के बीच अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI मौसम पूर्वानुमान को और सटीक बनाने में अहम भूमिका निभाने जा रहा है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश का पहला AI आधारित मॉनसून अग्रिम पूर्वानुमान मॉडल लॉन्च किया है. इस नई तकनीक के जरिए अब ब्लॉक स्तर तक चार सप्ताह पहले मॉनसून की गतिविधियों का अनुमान लगाया जा सकेगा. इससे खास तौर पर किसानों को फसल योजना बनाने और मौसम जोखिम कम करने में मदद मिलेगी.
हर बुधवार जारी होगा मॉनसून अपडेट
IMD के अनुसार नया AI मॉडल हर बुधवार को मॉनसून की प्रगति और सक्रियता का अनुमान जारी करेगा. यह मॉडल मौजूदा संख्यात्मक मौसम मॉडल और AI तकनीक को जोड़कर तैयार किया गया है. मौसम विभाग का कहना है कि पूर्वानुमान में लगभग चार दिनों तक का विचलन संभव रहेगा, लेकिन इसके बावजूद यह पारंपरिक मॉडलों की तुलना में अधिक उपयोगी और प्रभावी साबित हो सकता है.
उत्तर प्रदेश के लिए शुरू हुआ हाई-रिजॉल्यूशन रेनफॉल मॉडल
मौसम विभाग ने इसके साथ ही राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) द्वारा विकसित एक पायलट प्रोजेक्ट भी लॉन्च किया है. यह परियोजना AI आधारित उन्नत प्रणाली के जरिए उत्तर प्रदेश में एक किलोमीटर ग्रिड तक अत्यधिक सटीक वर्षा पूर्वानुमान देने में सक्षम होगी. इससे छोटी से छोटी भौगोलिक इकाई तक बारिश के पैटर्न को समझना आसान होगा.
जलवायु परिवर्तन के दौर में अहम पहल
विशेषज्ञों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का अनुमान लगाना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. ऐसे में AI आधारित यह पहल मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को आधुनिक और अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है. खासकर सूखा, बाढ़ और अनियमित बारिश जैसी स्थितियों से निपटने में यह तकनीक मददगार हो सकती है.
कृषि मंत्रालय के साथ मिलकर तैयार हुआ सिस्टम
IMD ने स्पष्ट किया कि इन दोनों AI मॉडल को कृषि मंत्रालय के मार्गदर्शन में विकसित किया गया है. किसानों तक जानकारी पहुंचाने के लिए इन्हें कृषि मंत्रालय के API और एग्रीस्टैक प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा. इसका उद्देश्य देशभर में प्रभाव आधारित और अति-स्थानीय मौसम सेवाएं उपलब्ध कराना है.
15 राज्यों के 3196 ब्लॉकों तक पहुंचेगी सुविधा
पृथ्वी विज्ञान मंत्री Jitendra Singh ने बताया कि यह ब्लॉक स्तर पूर्वानुमान प्रणाली फिलहाल 15 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 3196 ब्लॉकों तक पहुंचेगी. इनमें अधिकांश क्षेत्र वर्षा आधारित कृषि वाले हैं, जहां समय पर मौसम जानकारी किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.
सामान्य से कमजोर रह सकता है 2026 का मॉनसून
इन मॉडलों की शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया गया है. हालांकि IMD ने साफ किया है कि नए AI मॉडल और इस अनुमान के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है.
टैग्स