होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / 100 साल की उम्र में भी प्रकृति की सबसे भरोसेमंद आवाज बने हुए हैं सर डेविड एटनबरो

100 साल की उम्र में भी प्रकृति की सबसे भरोसेमंद आवाज बने हुए हैं सर डेविड एटनबरो

लेखक भुवन लाल लिखते हैं, सर डेविड एटनबरो के 100वें जन्मवर्ष पर नई डॉक्यूमेंट्री 'Life on Earth: Attenborough's Greatest Adventure' उनके पूरे करियर का उत्सव मनाती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

सूर्योदय से ठीक पहले की सुनहरी घड़ी में, जहां घना जंगल हरे-भरे घास के मैदानों से मिलता है और छोटे-छोटे झीलें बिखरे हुए आईनों की तरह चमकती हैं, मध्य भारत का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व मानो सांस रोक लेता है. यह प्रकृति की सबसे शानदार रचनाओं में से एक रॉयल बंगाल टाइगर का शिकार क्षेत्र है.

यहीं पर, अद्वितीय गर्मजोशी और गंभीरता से भरी आवाज के साथ, टेलीविजन श्रृंखला *Dynasties* का अंतिम अध्याय सामने आया. यह कहानी थी सुपरस्टार बाघिन राज बहरा और उसके चार नवजात शावकों की. ब्रॉडकास्टर डेविड एटनबरो ने अपनी हल्की, शांत और सुकून देने वाली आवाज में दुनिया को एक मां और उसके बच्चों के जंगल में जीवित रहने की कहानी सुनाई.

कुछ आवाजें किसी एक दौर की होती हैं. और कुछ आवाजें पूरी दुनिया की हो जाती हैं. सर डेविड एटनबरो दूसरी श्रेणी में आते हैं. 8 मई 2026 को यह आवाज 100 साल की हो गई, एक ऐसा मील का पत्थर जो उतना ही असाधारण है जितना कोई जीव जिसे उन्होंने फिल्माया हो, और उतना ही स्थायी जितनी कोई संरक्षण लड़ाई जिसका उन्होंने समर्थन किया हो.

1926 में मिडलसेक्स के आइल्सवर्थ में जन्मे एटनबरो बचपन से ही प्रकृति के प्रति आकर्षित थे. वह तीन भाइयों में मंझले थे और तीनों ने अपने-अपने क्षेत्रों में अलग पहचान बनाई, लेकिन डेविड ने दुनिया को पृथ्वी पर जीवन देखने का नजरिया बदल दिया.

उनके बड़े भाई रिचर्ड एटनबरो ऑस्कर विजेता अभिनेता बने, जो गांधी (Gandhi) और जुरासिक पार्क (Jurassic Park) जैसी फिल्मों के लिए प्रसिद्ध हुए, जबकि छोटे भाई मोटर उद्योग में गए. लेकिन डेविड, जिन्होंने ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) के साथ काम किया, टेलीविजन इतिहास के सबसे प्रिय प्रस्तोता और संभवतः दुनिया की सबसे भरोसेमंद आवाज बन गए.

एक बड़ा मोड़

एटनबरो की प्रसिद्ध श्रृंखला *Life on Earth* (1979) एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई. 13 एपिसोड वाली इस श्रृंखला ने विकासवाद की पूरी कहानी दिखाई और दुनियाभर में लगभग 50 करोड़ दर्शकों तक पहुंची. इसने वन्यजीव डॉक्यूमेंट्री शैली के लिए नया मानक स्थापित किया.

इसका सबसे यादगार दृश्य किसी तकनीकी उपलब्धि से नहीं, बल्कि रवांडा की पहाड़ी पर शांत बैठे एक व्यक्ति से जुड़ा था, जिसके चारों ओर जंगली पर्वतीय गोरिल्ला थे.

जब छोटे गोरिल्ला उन पर चढ़ने लगे और उनकी पीठ पर बैठ गए, तब एटनबरो लगभग स्थिर रहे और धीमी, कोमल ध्वनियों में उनसे संवाद करते रहे. यह वन्यजीव टेलीविजन के इतिहास के सबसे अद्भुत क्षणों में से एक माना जाता है.

इसके बाद आने वाली श्रृंखलाएं प्राकृतिक ज्ञान के एक विशाल स्मारक की तरह बनती चली गईं  'The Living Planet' (1984), 'The Trials of Life' (1990), 'The Blue Planet' (2001), 'Planet Earth' (2006), 'Frozen Planet' (2011), 'Planet Earth II' (2016), 'Blue Planet II' (2017), 'Our Planet' (2019), और 'Seven Worlds, One Planet' (2019). इन सभी ने सिनेमैटोग्राफी, तकनीक और भावनात्मक कहानी कहने की सीमाओं को आगे बढ़ाया.

The Blue Planet ने अपने अद्भुत समुद्री दृश्यों के लिए दो एमी और एक बाफ्टा पुरस्कार जीता और समुद्री संरक्षण के प्रति वैश्विक रुचि को फिर से जगाया.

भारत से खास जुड़ाव

भारत भी एटनबरो के लंबे वन्यजीवन संबंधों में खास स्थान रखता है. उनकी टीम कई श्रृंखलाओं के दौरान मध्य प्रदेश के साल जंगलों से लेकर असम के बाढ़ क्षेत्रों तक पहुंची, ताकि ऐसे वन्यजीवों को फिल्माया जा सके जो दुनिया में कहीं और नहीं पाए जाते.

'The Living Planet' और बाद में 'Planet Earth' ने दर्शकों को बंगाल टाइगर, राजस्थान की सूखी नदी घाटियों को पार करते भारतीय हाथियों और काजीरंगा के दलदली क्षेत्रों में घूमते भारतीय एक-सींग वाले गैंडे से रूबरू कराया.

पश्चिमी घाट, जो दुनिया के आठ जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में शामिल है, वहां की उनकी शूटिंग ने एशिया की सबसे संकटग्रस्त वन प्रणालियों की ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया.

भारतीय दर्शकों के लिए, जिन्होंने स्क्रीन पर अपने ही जंगलों और जीवों को देखा, उनका काम देश की प्राकृतिक धरोहर के प्रति नए गर्व का कारण बना और संरक्षण कार्यक्रमों को मजबूत सार्वजनिक समर्थन मिला.

“मानवता ने पृथ्वी पर कब्जा कर लिया है”

2019 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh ने एक वर्चुअल समारोह में एटनबरो को इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार प्रदान किया.

समारोह को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने एटनबरो को “जीवित किंवदंती” बताया और कहा, “अगर मैं ऐसा कहूं, तो वह प्रकृति की मानवीय आवाज रहे हैं.”

पुरस्कार स्वीकार करते हुए एटनबरो ने कहा, “मानवता ने पृथ्वी पर कब्जा कर लिया है. प्राकृतिक दुनिया के लिए इसके परिणाम विनाशकारी रहे हैं. इन तथ्यों पर विचार करें. हमने दुनिया के आधे उष्णकटिबंधीय जंगल काट दिए हैं. आधी प्रवाल भित्तियां अब मर चुकी हैं. हमने प्राकृतिक दुनिया पर कब्जा कर लिया है और हम उसे नष्ट कर रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए “हमें राष्ट्रवाद से अंतरराष्ट्रीय सोच की ओर बढ़ना होगा. प्रसारण इसमें मदद कर सकता है.”

उन्होंने आगे कहा, “आज का टेलीविजन आपको दुनिया के हर हिस्से में ले जा सकता है, चाहे वह कितना भी दूर क्यों न हो, और दिखा सकता है कि वह हिस्सा कैसे काम करता है. यह प्राकृतिक दुनिया से उस संबंध को फिर से जीवित कर सकता है जो कभी हमारा जन्मसिद्ध अधिकार था.”

सम्मान और विरासत

इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार के अलावा एटनबरो को रॉयल जियोग्राफिकल सोसाइटी, यूनेस्को का कलिंगा पुरस्कार, माइकल फैराडे पुरस्कार, डेसकार्टेस पुरस्कार, रॉयल सोसाइटी की फेलोशिप और कई एमी व बाफ्टा पुरस्कार मिल चुके हैं.

वह अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट ऑस्कर और नोबेल शांति पुरस्कार के संभावित उम्मीदवार भी माने जाते हैं. उनके 100वें जन्मवर्ष पर नई डॉक्यूमेंट्री 'Life on Earth: Attenborough's Greatest Adventure' उनके पूरे करियर का उत्सव मनाती है.

उनकी हालिया डॉक्यूमेंट्री 'Ocean with David Attenborough', जो उनके 100वें जन्मदिन से पहले रिलीज हुई, विनाशकारी मछली पकड़ने की तकनीकों, प्रवाल भित्तियों के सफेद होने और जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभावों पर केंद्रित है. इसे अब तक बनी सबसे प्रभावशाली पर्यावरणीय फिल्मों में से एक माना जा रहा है.

100 साल की उम्र में भी सर डेविड एटनबरो दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले और सबसे भरोसेमंद व्यक्तियों में शामिल हैं. संघर्ष, प्रदूषण और पर्यावरणीय संकटों से भरी इस सदी में वह हमें एक दुर्लभ चीज देते हैं, उम्मीद की वजह और एक ऐसी आवाज जिसे सुनना जरूरी है.

उनकी शांत, जिज्ञासु, सटीक और प्रकृति के प्रति गहरे सम्मान से भरी नैरेशन शैली उतनी ही प्रतिष्ठित बन चुकी है जितनी वे तस्वीरें जिनके साथ वह सुनाई देती है. दुनिया की कई पीढ़ियां उनकी आवाज सुनते हुए बड़ी हुई हैं और पहली बार महसूस किया है कि प्राकृतिक दुनिया कुछ अद्भुत है, जिसकी रक्षा की जानी चाहिए.

100 साल की उम्र में, वह शायद प्राकृतिक दुनिया के सबसे प्रभावशाली और सबसे स्पष्ट गवाह हैं.

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं और जरूरी नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों को दर्शाते हों.)

अतिथि लेखक: भुवन लाल
(भुवन लाल सुभाष बोस, हरदयाल और वल्लभभाई पटेल के जीवनीकार हैं. वह 'Namaste Cannes' और 'India on the World Stage' पुस्तक के लेखक भी हैं. उनसे [writerlall@gmail.com] पर संपर्क किया जा सकता है.)

 

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

टैगोर से टाटा तक: पश्चिम बंगाल अवसरों की भूमि

उद्योग पेशेवर डॉ. अजय शर्मा लिखते हैं, 1960 के दशक में भारत के जीडीपी में बंगाल की हिस्सेदारी 10% से अधिक थी, जो 2023-24 तक घटकर लगभग 5.6% रह गई है.

3 days ago

बंगाल के जनादेश का सम्मान जरूरी: भरोसा लौटे, गौरव पुनर्जीवित हो, सम्मान स्थापित हो

प्रबल बसु रॉय लिखते हैं, शासन का अगला चरण, चाहे स्थानीय स्तर पर इसका नेतृत्व कोई भी करे, भाषण या इरादों के आधार पर नहीं आंका जाएगा, इसे परिणामों के आधार पर परखा जाएगा.

3 days ago

अहंकार का अंत: कमल मुस्कुरा रहा है

पश्चिम बंगाल का औद्योगिक केंद्र से आर्थिक ठहराव तक का सफर दशकों की नीतियों और राजनीतिक बदलावों के जरिए समझा जा सकता है, साथ ही इसके पुनरुत्थान की संभावनाओं पर भी बहस जारी है.

3 days ago

प्रसार भारती में प्रसून होने का महत्व

टाटा मोटर्स के सीएमओ शुभ्रांशु सिंह लिखते हैं, विज्ञापन ने प्रसून जोशी को सटीकता और जटिलता को कुछ यादगार शब्दों में समेटने की क्षमता दी.

4 days ago

गोदरेज इंडस्ट्रीज की नई ब्रांड पहचान: सिर्फ डिजाइन नहीं, बड़े बदलाव का संकेत

इस लेख में लेखक गणपति विश्वनाथन ने गोदरेज इंडस्ट्रीज की रीब्रांडिंग और उसके मौजूदा संकेतों का विश्लेषण किया है.

6 days ago


बड़ी खबरें

लोन लेने वालों को झटका: HDFC बैंक ने बढ़ाई ब्याज दरें, EMI पर पड़ेगा असर

HDFC बैंक ने तीन साल की मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.05% की बढ़ोतरी की है. इसके बाद यह दर 8.55% से बढ़कर 8.60% हो गई है.

2 hours ago

भारत में AI सप्लाई चेन का दौर शुरू, क्या इसके लिए तैयार है देश का कार्यबल?

लेखिका मृणालिनी शाह के अनुसार,भारत इस दशक के भीतर लगभग निश्चित रूप से अत्यधिक स्वचालित, AI संचालित सप्लाई चेन चलाएगा. असली चुनौती यह है कि क्या कार्यबल, विशेष रूप से मिड-मैनेजमेंट स्तर इसके लिए तैयार होगा. निर्णय लेने की प्रक्रिया अब भी मशीनों पर हावी है.

1 hour ago

100 साल की उम्र में भी प्रकृति की सबसे भरोसेमंद आवाज बने हुए हैं सर डेविड एटनबरो

लेखक भुवन लाल लिखते हैं, सर डेविड एटनबरो के 100वें जन्मवर्ष पर नई डॉक्यूमेंट्री 'Life on Earth: Attenborough's Greatest Adventure' उनके पूरे करियर का उत्सव मनाती है.

1 hour ago

Britannia Q4 Results: मुनाफा 679 करोड़, निवेशकों के लिए 90.50 रुपये का बड़ा डिविडेंड

मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बाद कंपनी ने अपने निवेशकों के लिए 90.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड भी घोषित किया है.

2 hours ago

भारत को निर्यात बढ़ाने के लिए टैरिफ घटाने की जरूरत: GTRI

GTRI ने सुझाव दिया है कि भारत को अपनी टैरिफ और कस्टम्स प्रणाली का व्यापक पुनर्गठन करना चाहिए. ऐसा न करने पर देश वैश्विक निवेश और व्यापार अवसरों की दौड़ में पीछे रह सकता है.

3 hours ago