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भारत को निर्यात बढ़ाने के लिए टैरिफ घटाने की जरूरत: GTRI

GTRI ने सुझाव दिया है कि भारत को अपनी टैरिफ और कस्टम्स प्रणाली का व्यापक पुनर्गठन करना चाहिए. ऐसा न करने पर देश वैश्विक निवेश और व्यापार अवसरों की दौड़ में पीछे रह सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

वैश्विक व्यापार शोध संस्था ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को अपने टैरिफ (आयात शुल्क) और कस्टम्स प्रणाली में व्यापक सुधार करने की आवश्यकता है. ताकि व्यापार लागत कम हो सके और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया जा सके. रिपोर्ट के अनुसार, भारत की मौजूदा टैरिफ संरचना अब राजस्व जुटाने का प्रभावी साधन नहीं रही है. बल्कि यह व्यापार लागत को बढ़ा रही है. जिससे भारत के वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के लक्ष्य पर असर पड़ सकता है.

टैरिफ और कस्टम्स में जटिलता से बढ़ रही लागत

GTRI ने अपनी फ्लैगशिप रिपोर्ट में कहा कि आयात शुल्क और जटिल कस्टम्स प्रक्रियाओं ने व्यापार में कई तरह की अक्षमताएं पैदा की हैं. जो कंपनियों और निर्यातकों पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं.

इतिहास में टैरिफ का उपयोग घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और राजस्व संग्रह के लिए किया जाता था. लेकिन आज इसकी जटिल संरचना उत्पादन लागत बढ़ा रही है. और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा को कमजोर कर रही है.

23 सुधारों की सिफारिश

रिपोर्ट में टैरिफ प्रणाली को सरल बनाने और कस्टम्स प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने के लिए 23 सिफारिशें दी गई हैं. इनमें शामिल हैं.

1. टैरिफ ढांचे का सरलीकरण.
2. प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना.
3. कस्टम्स प्रशासन का आधुनिकीकरण.
4. व्यापार को आसान बनाने के लिए सिस्टम को अधिक दक्ष बनाना.

GTRI का कहना है कि इन सुधारों से लेन-देन लागत घटेगी. माल की क्लीयरेंस तेज होगी. और भारत की व्यापार नीति वैश्विक मानकों के अनुरूप बनेगी.

नीतिगत स्थिरता की जरूरत

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टैरिफ दरों में बार-बार बदलाव से निवेशकों और कंपनियों में अनिश्चितता पैदा होती है. जिससे सप्लाई चेन और निवेश योजनाएं प्रभावित होती हैं. इसलिए नीति में अधिक स्थिरता और पूर्वानुमान जरूरी है.

वैश्विक व्यापार में बदलाव से बढ़ा दबाव

रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था बड़े बदलावों से गुजर रही है. अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक घटनाओं ने कंपनियों को अपने सप्लायर देशों को विविध बनाने के लिए प्रेरित किया है. इन परिस्थितियों में भारत के लिए अवसर बने हैं. लेकिन इसका लाभ उठाने के लिए उसे टैरिफ स्थिरता. लॉजिस्टिक्स दक्षता और व्यापार सुगमता जैसे क्षेत्रों में सुधार करना होगा.

उच्च आयात शुल्क से बढ़ रही उत्पादन लागत

GTRI के अनुसार. इंटरमीडिएट वस्तुओं (कच्चे माल) पर अधिक आयात शुल्क भारतीय मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ा रहे हैं. जिससे निर्यात अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में कमजोर पड़ रहा है.

वैश्विक सप्लाई चेन में एकीकरण की जरूरत

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि टैरिफ ढांचे को सरल बनाया जाए. और अनावश्यक बाधाओं को हटाया जाए. तो भारतीय उद्योग वैश्विक सप्लाई चेन में बेहतर तरीके से जुड़ सकते हैं. इससे उत्पादन और निर्यात दोनों में वृद्धि होगी.

GTRI ने सुझाव दिया है कि भारत को अपनी टैरिफ और कस्टम्स प्रणाली का व्यापक पुनर्गठन करना चाहिए. ऐसा न करने पर देश वैश्विक निवेश और व्यापार अवसरों की दौड़ में पीछे रह सकता है. संस्था ने कहा कि एक दूरदर्शी व्यापार नीति ही भारत को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बना सकती है.
 


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