होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत कितनी ज्यादा खराब है, पढ़िए आर्थिक एक्सपर्ट का व्यू

भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत कितनी ज्यादा खराब है, पढ़िए आर्थिक एक्सपर्ट का व्यू

मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक जैसी संस्थाएं कॉर्पोरेट हित में भारत की इसी ताकत पर दांव खेलती रही हैं. उनका रटा-रटाया सुझाव है- सब्सिडी खत्म करो.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

अजय शुक्ला
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था दोहरी चुनौती से जूझ रही है. केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तमाम दावों के बाद भी अर्थव्यवस्था सुधार की दिशा में नहीं बढ़ पा रही है. लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था के अब सुधरने की उम्मीद की जा रही थी, मगर हर बार भारत की विकास दर को वैश्विक अर्थ संस्थाएं गिरा देती हैं. महंगाई और तेजी से गिरते रुपये से अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना मुश्किल दिखने लगा है.

रुपए में लगातार गिरावट जारी
दूसरी ओर डॉलर की तुलना में रुपए में लगातार गिरावट जारी है. डॉलर की तुलना में रुपया गिर कर 83 के स्तर को पार कर गया है. डॉलर महंगा होने से भारत का व्यापार घाटा भी लगातार बढ़ता जा रहा है. इससे घरेलू बाजार में सभी वस्तुओं के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं. मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर 2022) में देश के व्यापार घाटे में करीब 95 फीसदी का चौंकाने वाला उछाल आया है.

आयात बढ़कर 380.34 अरब डॉलर हो गया
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों में बताया गया है कि पहली छमाही के दौरान देश का कुल निर्यात 16.96 फीसदी बढ़कर 231.88 अरब डॉलर पहुंचा, तो इसी अवधि में कुल आयात में 38.55 फीसदी का भारी इजाफा हुआ. आयात बढ़कर 380.34 अरब डॉलर हो गया है, जिससे देश का व्यापार घाटा 94.70 फीसदी बढ़कर 148.46 अरब डॉलर हो गया. पिछले साल इसी अवधि में यह 76.25 अरब डॉलर था. ये आंकड़े आने वाले वक्त में लोगों को और भी महंगाई से जूझने के लिए तैयार होने के संकेत दे रहे हैं.

रटा-रटाया सुझाव है- सब्सिडी खत्म करो
मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक जैसी संस्थाएं कॉर्पोरेट हित में भारत की इसी ताकत पर दांव खेलती रही हैं. उनका रटा-रटाया सुझाव है- सब्सिडी खत्म करो. पैसा हाथ से खींच लो. जनता पर खर्च कम करो. पूंजीपतियों की मदद करो. तमाम अर्थशास्त्री इस तथ्य को लगातार नजरांदाज कर रहे हैं कि महंगाई की बड़ी वजह कॉर्पोरेट को भारी मुनाफा दिलाने की सरकारी नीतियां अधिक हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन से सप्लाई की कमी को दोष देकर सरकारें बचाव कर रही हैं, जबकि यह पूर्ण सत्य नहीं है. इसी कश्मकश में आधे से अधिक वित्त वर्ष निकल चुका है. देश की एक बड़ी आबादी को कोई राहत नहीं मिल पा रही है.

भारत यहां भी 10वें नंबर पर
दूसरी तरफ जापान को छोड़कर एशिया स्पेसिफिक मार्केट सेंटीमेंट की रिपोर्ट सामने आई है. इसमें एशिया के 12 देशों में निवेश सेंटीमेंट पर डिटेल्ड रिपोर्ट है. इसमें टॉप पर चीन, हांगकांग, साउथ कोरिया, थाईलैंड, सिंगापुर हैं, जो निवेशकों की सबसे अधिक पसंद हैं, क्योंकि कारोबारी माहौल यहां बेहतर है. भारत यहां भी 10वें नंबर पर है, जो सिर्फ मलेशिया और फिलीपीन्स से ऊपर है. हमारे देश को अगर निवेश चाहिए जो बेहतर माहौल बनाने की जरूरत है मगर फिलहाल ग्लोबल इन्वेस्टर्स की नजर में भारत "अन्स्टेबल सोशल कंडीशन" वाला देश है, जो निवेशकों का मोह भंग करता है.

नहीं मिलने वाली है महंगाई से निजात
वित्त मंत्रालय की ताजा मासिक रिपोर्ट से यह तथ्य स्पष्ट हो गया है कि आने वाले वक्त में भी लोगों को महंगाई और दूसरे वित्तीय संकटों से निजात नहीं मिलने वाली. हालांकि मंत्रालय दावा करता है कि दुनिया के आर्थिक हालातों में भारत की अर्थव्यवस्था पिछली छमाहीं में दूसरों से बेहतर रही है. पीएमआई समग्र सूचकांक में इस दौरान विश्व स्तर के 51.0 की तुलना में भारत की आर्थिक गतिविधि स्तर 56.7 के स्तर पर रही जो बेहतर है.

विदेशी निवेशक भारत के प्रति आकर्षित नहीं हो रहे
आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि थोक मुद्रास्फीति मई 2022 में 16.6 फीसदी से घटकर सितंबर 2022 में 10.7 फीसदी हो गई है. दावा है कि ऐसा कॉमोडिटी की कीमतों में नरमी और सरकारी उपायों के कारण संभव हो सका. दूसरी तरफ खुदरा मुद्रास्फीति  खाद्य कीमतों में वृद्धि के कारण ऊपर बनी हुई है. नई फसल आने पर खाद्य मुद्रास्फीति के कम होने की उम्मीद की जा रही है. विदेशी निवेशक भारत के प्रति आकर्षित नहीं हो रहे हैं, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था घरेलू निवेशकों पर भी अधिक निर्भर हो गई है. धनतेरस पर देश में करीब 40 टन सोना बिका है, जो पिछले साल से 10 टन ज्यादा. 8 लाख गाड़ियों की बुकिंग हुई है. इसमें सबसे खास बात यह है कि हमारी आबादी के 20 फीसदी लोग ही ये खरीदी कर पा रहे हैं. मध्यम वर्ग कर्ज के सहारे अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है.

50 फीसदी से अधिक लोगों का भुखमरी स्तर से भी निम्न जीवन यापन
वैश्विक मंच पर हमारी सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि भारत में 50 फीसदी से अधिक लोग भुखमरी स्तर से भी निम्न जीवन यापन कर रहे हैं. वित्त मंत्री के वक्तव्य से सिद्ध होता है कि स्थिति गंभीर है. बचाव में तर्क दिए जा रहे हैं कि दुनिया में कीमतें बढ़ रही हैं, इसमें सरकार का क्या दोष? अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट सरकार के दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि केन्या में कीमतें 18.6 फीसदी बढ़ी हैं, थाइलैंड में 19.1 फीसदी, ईरान में 17 फीसदी, पाकिस्तान में 45.1 फीसदी, परंतु भारत में कीमतों में 90 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.

भुखमरी वाली आबादी भी विशालतम
हमारे देश में दो भारत हैं, एक भारत, जिसको ताजा ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2022 के आंकड़े प्रस्तुत करते हैं, जिसमें 121 देशों में भारत 107वें स्थान पर पहुंच गया है. इस सूची में भारत दक्षिण एशियाई देशों में सिर्फ अफगानिस्तान से बेहतर गया है. यानी भारत में भुखमरी वाली आबादी भी विशालतम है. वहीं एक दूसरा भारत है, जहां के चंद पूंजीपति और व्यापारी दिन दूने रात चौगुणे कमाई कर रहे हैं. इन चंद पूंजीपतियों का देश के 50 फीसदी संपत्तियों पर कब्जा है. आईएमएफ का अनुमान है कि भारत 2027-28 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.

दो भारत- एक अमीरों का और एक गरीबों का
ऐसी स्थिति में दो भारत एक अमीरों का और एक गरीबों का, पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जो महंगाई और गरीबी को खत्म नहीं होने देंगे, क्योंकि सरकार 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के फेर में शोषक वर्ग को संरक्षण देकर शोषित वर्ग की बड़ी जमात तैयार करने में लगी है. बेरोजगारों की ऐसी फौज तैयार हो चुकी है जो समाजिक ताने बाने को तोड़ने की राजनीति का हिस्सा बन गई है, जो घरेलू कारोबार के लिए संकट बनती जा रही है. इन हालात में फिलहाल किसी राहत की उम्मीद नजर नहीं आती है.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

16 hours ago

3C फ्रेमवर्क से बंगाल की आर्थिक पुनर्बहाली को मिलेगी नई दिशा

बंगाल की चुनौती संसाधनों की कमी नहीं है. वास्तविक समस्या यह है कि राज्य अपनी मौजूदा संपत्तियों को एक प्रभावी आर्थिक रणनीति में बदलने में विफल रहा है.

22 hours ago

भारत-जापान साझेदारी और मानव-केंद्रित एआई का भविष्य

प्रोफेसर सी. राज कुमार लिखते हैं, 'भारत और जापान एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां वे AI के लिए चौथा और मौलिक मार्ग विकसित कर सकते हैं.

5 days ago

ईरान को ‘अनफ्रीज’ करना: असली चुनौती अब शुरू होगी

सिद्धार्थ अरोड़ा लिखते हैं, 'अमेरिका-ईरान शांति समझौता अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और रिपोर्टों के अनुसार 60 दिनों की अवधि में लगभग 24 अरब डॉलर जारी किए जा सकते हैं. ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यह पैसा जब ईरान पहुंचेगा, तब उसका क्या होगा?'

6 days ago

2026 की तीसरी तिमाही का ज्योतिष: एआई, संघर्ष और वैश्विक परिवर्तन

ज्योतिषाचार्य विक्रम चन्दीरमानी लिखते हैं कि 2026 के पहले छह महीनों के दौरान इनमें से कई विषय पहले ही उभरने लगे हैं. प्रौद्योगिकी कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर चिंताएँ लगातार अधिक स्पष्ट होती जा रही हैं. यह चिंता केवल AI से जुड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की कुछ सबसे मूल्यवान निजी कंपनियों, जैसे स्पेसएक्स, के उच्च मूल्यांकन को लेकर भी देखी जा रही है.

1 week ago


बड़ी खबरें

₹860 करोड़ का कोहिनूर सौदा, राज ठाकरे की चुप्पी

एक राजनेता एक रियल एस्टेट सौदे में प्रवेश करता है. एक सरकारी संस्था से जुड़ी वित्तीय कंपनी ₹225 करोड़ का निवेश करती है. फिर वही संस्था ₹135 करोड़ के नुकसान के साथ उस सौदे से बाहर निकलती है.

15 hours ago

मिडिल ईस्ट प्रैक्टिस के लिए प्राइमस पार्टनर्स ने मोहन दोईफोडे को बनाया MD

पूर्व डेलॉइट कंसल्टिंग लीडर GCC क्षेत्र में कंपनी के विस्तार और क्लाइंट संबंधों को देंगे नई दिशा

15 hours ago

GDP से आगे: क्यों भारत की प्रगति का पैमाना सिर्फ आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि खुशहाली और जीवन गुणवत्ता भी होना चाहिए

पूर्व उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव और लेखक आलोक रंजन का मानना है कि भारत की विकास यात्रा को केवल आर्थिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उनके अनुसार, खुशहाली, जीवन की गुणवत्ता, शिक्षा, स्वास्थ्य और समावेशी विकास को भी प्रगति का महत्वपूर्ण पैमाना बनाया जाना चाहिए.

20 hours ago

Truhome Finance को 3,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए सेबी की मंजूरी

कंपनी के कुल एयूएम में 57.37 प्रतिशत हिस्सा हाउसिंग लोन का है, जबकि 39.22 प्रतिशत हिस्सा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी का है. अन्य ऋण उत्पादों की हिस्सेदारी 3.41 प्रतिशत है.

16 hours ago

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

16 hours ago