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2047 तक भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बना सकते हैं ये 4 सेक्टर, नीति आयोग ने बताई बड़ी चुनौतियां
केमिकल्स, टेक्सटाइल, टेलीकॉम और नेटवर्क इक्विपमेंट तथा सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग को नीति आयोग ने भारत के औद्योगिक विस्तार, रोजगार और निर्यात के लिए अहम सेक्टर बताया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 55 minutes ago
भारत के सामने 2047 तक दुनिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरने का बड़ा लक्ष्य है. इस दिशा में केमिकल्स, टेक्सटाइल, टेलीकॉम और नेटवर्क इक्विपमेंट तथा सोलर फोटोवोल्टिक यानी सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग जैसे चार सेक्टर अहम भूमिका निभा सकते हैं. नीति आयोग ने गुरुवार को जारी अपनी नई रिपोर्ट में कहा कि भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने, घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने और हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की ओर तेजी से बढ़ने की जरूरत होगी.
नीति आयोग की रिपोर्ट 'Key Sectors to Position India as a Global Manufacturing Hub' में इन चार सेक्टरों को औद्योगिक विस्तार, रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाने की बड़ी क्षमता वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है.
भारत के पास कई बड़े फायदे
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए कई अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं. इनमें बड़ा घरेलू बाजार, युवा कार्यबल, लगातार बेहतर होता इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार किया जा रहा नीतिगत माहौल शामिल है.
वैश्विक स्तर पर कंपनियों द्वारा अपनी सप्लाई चेन को एक ही देश पर निर्भर रखने के बजाय अलग-अलग देशों में फैलाने की कोशिश भी भारत के लिए बड़ा अवसर बन सकती है. इससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई नेटवर्क में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलेगा.
आयात निर्भरता और स्किल की कमी बड़ी चुनौती
हालांकि, नीति आयोग ने साफ कहा कि सिर्फ इन फायदों के आधार पर भारत दुनिया की अग्रणी मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता. महत्वपूर्ण कच्चे माल और इनपुट के लिए आयात पर निर्भरता, बिखरी हुई सप्लाई चेन, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की कमियां, घरेलू स्तर पर सीमित वैल्यू एडिशन, तकनीकी बाधाएं और कुशल श्रमिकों की कमी जैसी चुनौतियां भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रभावित कर रही हैं.
इन चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों, वित्तीय संस्थाओं और इनोवेशन इकोसिस्टम को मिलकर काम करना होगा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को केवल असेंबली आधारित उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय ग्लोबल वैल्यू चेन में गहरी भागीदारी बढ़ानी होगी.
केमिकल सेक्टर में बढ़ानी होगी घरेलू क्षमता
नीति आयोग ने केमिकल सेक्टर में घरेलू स्तर पर फीडस्टॉक की उपलब्धता बढ़ाने, इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करने और डाउनस्ट्रीम वैल्यू एडिशन को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है. इसी तरह अन्य प्रमुख सेक्टरों में भी घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम कम करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे.
एक नीति नहीं, लंबे समय की रणनीति जरूरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्थाओं के अनुभव से पता चलता है कि औद्योगिक विकास किसी एक नीति या कदम से संभव नहीं है. इसके लिए नीतियों में निरंतरता, औद्योगिक क्लस्टर, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, लक्षित प्रोत्साहन, तकनीक और कौशल विकास में लगातार निवेश जरूरी होगा.
भारतीय कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच मजबूत जुड़ाव को भी महत्वपूर्ण बताया गया है. ग्लोबल वैल्यू चेन में ज्यादा भागीदारी से भारतीय कंपनियों को नई तकनीक तक पहुंच, निर्यात बढ़ाने और घरेलू स्तर पर ज्यादा वैल्यू एडिशन का अवसर मिल सकता है.
'विकसित भारत @2047' में मैन्युफैक्चरिंग की अहम भूमिका
रिपोर्ट जारी करते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य के तहत देश के आर्थिक और औद्योगिक बदलाव में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की केंद्रीय भूमिका होगी.
उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग निवेश, इनोवेशन और निर्यात को बढ़ावा देने के साथ गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा कर सकता है, उत्पादकता बढ़ा सकता है और अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच संबंधों को मजबूत कर सकता है.
लाहिड़ी के मुताबिक, भारत की युवा आबादी भी देश के लिए बड़ी ताकत है. करीब 28 साल की औसत आयु वाले कार्यबल के जरिए भारत अपनी जनसांख्यिकीय क्षमता का बेहतर इस्तेमाल कर सकता है. नीति आयोग का मानना है कि सही नीतियों, बेहतर कौशल, मजबूत सप्लाई चेन और तकनीकी क्षमता के साथ मैन्युफैक्चरिंग भारत को 2047 तक वैश्विक आर्थिक ताकत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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