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महंगाई से मामूली राहत! जुलाई में थोक महंगाई 9.78% पर, फ्यूल से राहत लेकिन फूड ने बढ़ाई टेंशन
जुलाई में थोक महंगाई दर जून के रिकॉर्ड 9.87% से घटकर 9.78% रह गई. फ्यूल और बिजली की महंगाई में बड़ी कमी से राहत मिली, लेकिन प्राइमरी आर्टिकल्स, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी बनी रही.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
महंगाई के मोर्चे पर जुलाई में हल्की राहत देखने को मिली है. भारत की थोक महंगाई दर यानी WPI जून के 9.87% से घटकर जुलाई में 9.78% रह गई. हालांकि यह गिरावट मामूली है, लेकिन फ्यूल और बिजली की महंगाई में आई तेज कमी ने थोक मूल्य सूचकांक पर कुछ राहत का असर डाला है. शुक्रवार को वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में थोक महंगाई नई WPI सीरीज के तहत अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी. नई सीरीज में 2022-23 को आधार वर्ष माना गया है.
फ्यूल और बिजली की महंगाई में बड़ी कमी
जुलाई में फ्यूल और बिजली बास्केट की महंगाई दर घटकर 20.05% रह गई, जो जून में 27.41% थी. इससे पहले मई में यह दर 30.33% के स्तर पर थी. हाल के महीनों में थोक महंगाई बढ़ने की एक बड़ी वजह फ्यूल और बिजली की कीमतों में तेजी रही थी. हालांकि, दूसरी ओर प्राइमरी आर्टिकल्स और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई बढ़ी है. जुलाई में प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर जून के 7% से बढ़कर 8.52% हो गई. वहीं, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स में महंगाई 7.48% से बढ़कर 8.29% पर पहुंच गई.
खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाया दबाव
WPI फूड इंडेक्स में जुलाई के दौरान महंगाई दर 6.65% दर्ज की गई, जो जून में 6.14% थी. मई में यह दर 4.49% रही थी. यानी थोक स्तर पर खाद्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है. प्राइमरी आर्टिकल्स की बास्केट में खाद्य वस्तुओं की महंगाई 5.44% रही. वहीं, मिनरल्स की महंगाई 13.28% और खाद्य वस्तुओं के अलावा अन्य वस्तुओं की महंगाई 17.66% दर्ज की गई. मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स में खाद्य उत्पादों की महंगाई 8.89%, बेसिक मेटल्स की 12.56% और केमिकल्स व केमिकल प्रोडक्ट्स की महंगाई 13.12% रही.
खुदरा महंगाई भी बढ़ी
थोक महंगाई का यह आंकड़ा ऐसे समय आया है, जब जुलाई में खुदरा महंगाई दर जून के 4.38% से बढ़कर 4.45% हो गई. खासतौर पर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों ने कंज्यूमर महंगाई पर दबाव बनाए रखा. सरकार के मुताबिक, जुलाई में थोक महंगाई पर मिनरल ऑयल, खाद्य वस्तुएं, बेसिक मेटल्स, नॉन-फूड आर्टिकल्स, मैन्युफैक्चर्ड फूड प्रोडक्ट्स और केमिकल्स व केमिकल प्रोडक्ट्स की कीमतों का प्रमुख असर रहा.
नई WPI सीरीज में क्या बदला?
जुलाई का आंकड़ा 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार की गई संशोधित WPI सीरीज के तहत तीसरी मासिक रीडिंग है. सरकार ने जून में नई सीरीज लागू की थी, जिसने 2011-12 के पुराने आधार वर्ष की जगह ली.
नई सीरीज में WPI बास्केट का दायरा 697 से बढ़ाकर 957 वस्तुओं तक कर दिया गया है. इसमें बिजली समूह में सौर और पवन ऊर्जा जैसे नए ऊर्जा स्रोतों के साथ परमाणु बिजली को भी शामिल किया गया है. नई सीरीज के तहत फ्यूल और बिजली का वेटेज 14.1%, प्राइमरी आर्टिकल्स का 22.8% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का 63.1% रखा गया है. सरकार ने मई के लिए अंतिम WPI इंडेक्स को भी 109.9 के शुरुआती अनुमान से संशोधित कर 110.1 कर दिया है. इसके साथ ही मई की थोक महंगाई दर को पहले के 9.68% से बढ़ाकर 9.88% कर दिया गया है.
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