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BW Retail: रिटेल सेक्‍टर में हमेशा सेंटर में रहता है कंज्‍यूमर,ये है सबसे बड़ी चुनौती 

रिटेल वर्ल्‍ड में हमेशा से ही कस्‍टमर सेंटर में रहा है और आगे भी रहेगा. अगर दुकान में आने वाले कस्‍टमर को एक स्‍माइल दी जाए तो उसका असर अलग पड़ता है

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Retail World Summit में रिटेल की दुनिया से जुड़े हुए कई लोग मौजूद रहे. दिल्‍ली में आयोजित हुए बिजनेस वर्ल्‍ड के इस समिट में कई अहम मुद्दों पर एक्‍सपर्ट ने अपनी बात रखी. उन्‍होंने बताया कि कैसे नए जमाने में कंज्‍यूमर तक पहुंचने के तरीकों में बदलाव आया है जबकि कुछ लोगों ने बताया कि कुछ पारंपरिक तरीके आज भी कायम हैं जो रामबाण बने हुए हैं. इस कार्यक्रम में बिजनेस वर्ल्‍ड समूह के चेयरमैन, एडिटर-इन-चीफ और एक्‍सचेंज4मीडिया समूह के डॉ. अनुराग बत्रा भी मौजूद रहे.  

कंज्‍यूमर हमेशा से ही रिटेल के सेंटर में रहा है
Avit Digital के Managing Director, राजेश दीवानी ने कहा कि जहां तक रिटेल की बात है तो कंज्‍यूमर हमेशा ही उसके कोर में रहा है और वो हमेशा कोर में रहेगा. इसकी कोई संभावना नहीं है कि कंज्‍यूमर कोर में ना रहे.  अभी हो क्‍या रहा है हम कंज्‍यूमर के कोर में पहुंचना चाह रहे हैं. ये पहले नहीं होता था ये अभी हो रहा है. उसके लिए जो रास्‍ता अपना रहे हैं वो भी पहले के मुकाबले काफी तेज है. अगर आप कंज्‍यूमर के कोर में नहीं पहुंचेंगे तो वो आपसे दूर चला जाएगा. इसको हम दो हिस्‍सों में बांट सकते हैं. पहला वो है जिसमें हम कंज्‍यूमर के कोर सेट में पहुंचने का प्रयास करते हैं और दूसरा वो है जिसमें हम उसके हार्ट में पहुंचने की कोशिश करते हैं. जब हम कोर सेट में पहुंचने की कोशिश करते हैं तो हमारे लिए ये बहुत खुशी की बात है कि हमारे 63 प्रतिशत ग्राहक वो हैं जो हमारे रिपीट कस्‍टमर हैं. दूसरा ये है कि अपने कुछ खास प्रोग्राम के जरिए टारगेट ग्राहक तक पहुंचने की कोशिश करते हैं. 

कस्‍टमर के दिल तक पहुंचना सबसे अहम 
Mohanlal Sons के CEO, मयंक मोहन ने कहा कि अगर कस्‍टमर तक पहुंचना है तो उसके दिल तक पहुंचना सीखना चाहिए. जब कस्‍टमर आता है तो उसका स्‍वागत एक स्‍माइल के साथ करना चाहिए. कस्‍टमर सर्विस एक बेहद अहम रोल निभाती है. अब वो भले ही उसके आने पर स्‍माइल करना हो या उससे आने पर चाय या काफी को लेकर पूछना हो. हमारे बिजनेस में कंज्‍यूमर के कोर में पहुंचने का तरीका जो मुझे समझ में आता है वो है पर्सनलाइजेशन. हम अपनी शॉप पर टेलरिंग को भी ऑफर करते हैं. जब कोई कस्‍टमर हमारी शॉप पर आता है और उसे लगता है कि ये कपड़ा या ड्रेस उसकी साइज का है उसकी आउटफिट का है, तो और कोई दूसरा इसे नहीं पहन सकता है तो इसे पर्सनलाइजेशन से समझा जा सकता है.

अपने कस्‍टमर को वापस लाना सबसे बड़ी चुनौती  
Beanly Coffee के Co-Founder, Rahul Jain ने कहा कि 
मुझे लगता है कि अपने कस्‍टमर तक पहुंचना एक सबसे अहम काम है. जैसा कि सर ने कहा कि कस्‍टरम की लॉयल्‍टी पहचानना एक अहम बात है. कई कस्‍टमर जो हमारे वहां पहले आते हैं, लोग वो जो कुछ नया खोजते हैं, अगर वो हमारा प्रोडक्‍ट ट्राई करते हैं तो उसी तरह से वो किसी और का भी प्रोडक्‍ट ट्राई करते होंगें. उस कस्‍टमर को अपने वहां वापस लाना और ये अपने आप में एक बड़ा चैलेंज है. या तो अपने इंस्‍टाग्राम अकाउंट के जरिए उसे इंगेज रखने की बात हो या कस्‍टमर तक किसी दूसरे तरीके से पहुंचने की बात हो उसे हम अग्रेसिवली करते हैं. हमारे लिए हमारे कस्‍टमर का फीडबैक भी सबसे अहम होता है. 

कंज्‍यूमर से जुड़े 4 प्‍वाइंट सबसे अहम हैं
Barista Coffee के CEO, Rajat Agrawal ने कहा कि हम एक कैफे कैटेगिरी से संबंध रखते हैं. कैफे को हम चार पिलर में देखते हैं. कंज्‍यूमर, अडॉपटेबिलिटी, फ्रीक्‍वेंसी एंड इंगेजमेंट में रखते हैं. इनमें कंज्‍यूमर के साथ इंगेज रहना, कंज्‍यूमर की जरूरत को देखना जिससे उसकी फ्रीक्‍वेंसी बनी रहे. कज्‍यूमर हमेशा से ही कोर में रहता है. जैसा कि अनुराग जी ने कहा कि प्रीमियमाइजेशन काफी तेजी से हो रहा है. अगर देखें तो आज मीडिल क्‍लास भी इंगेज करने की कोशिश कर रहा है. आज जिस तरह की भी जानकारी मौजूद है उसमें कंज्‍यूमर बहुत अच्‍छी तरह से शिक्षित है. आपको प्रोडक्‍ट प्रीफरेंसेज से लेकर, प्रोडक्‍ट प्रोफाइल, को लेकर भी काम कने की जरूरत पड़ती है. आज हम देश में 100 से ज्‍यादा शहरों में काम कर रहे हैं. 

सबसे बड़ा चैलेंज ह्यूमन रिसोर्स का है 
Lacoste India के MD & CEO Rajesh Jain ने कहा कि मुझे लगता है कि ज्‍यादातर रिटेलर जिस चीज का चैलेंज सबसे ज्‍यादा फेस करते हैं उसमें सबसे बड़ा चैलेंज ह्यूमन रिसोर्स का है. CEO ने क्‍या किया और बोर्ड में क्‍या हुआ ये सब स्‍टोर के लेवल पर नहीं जा पाता है. सबसे बड़ी समझने वाली बात ये है कि दु‍कान पर कस्‍टमर के साथ केवल वो शॉप वाला ही जानता है. क्‍या हम उन्‍हें प्रशिक्षण देने में सक्षम हैं, अगर आप कस्‍टमर के कोर में जाना चाहते हैं तो आप फीडबैक जरूर दीजिए. आप अपने ह्यूमन रिसोर्स का आंकलन कैसे करते हैं आप उसकी सेल पर ध्‍यान देते हैं या आप उसकी क्‍वॉलिटी सेल पर ध्‍यान देते हैं. ये सबसे अहम है.क्‍वॉलिटी को मेंटेन करना अपने आप में सबसे बड़ा चैलेंज है. 

इस इंडस्‍ट्री में आज भी बहुत कम है पेनीट्रेशन लेवल 
संजय भूटानी मैनेजिंग डॉयरेक्‍टर वॉचलाम इंडिया ने कहा कि  
कॉनटेक्‍ट लेंस के क्षेत्र में आज भी कारोबार नहीं बदला है. अभी में किसी से मिला तो उन्‍होंने बताया कि हम कस्‍टमर को ट्रायल के लिए इन्‍हें देते हैं. पेनीट्रेशन लेवल आज भी इस इंडस्‍ट्री में काफी कम बना हुआ है. ये सिर्फ इंडिया में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कम बना हुआ है. जब आप मार्केट लीडर हैं तो ऐसे में आपकी जिम्‍मेदारियां और भी बढ़ जाती हैं. सवाल ये है कि आप ज्‍यादा कस्‍टमर को इस कैटेगिरी में कैसे लाते हैं. अभी देश में 7 प्रतिशत लोग कॉटेक्‍ट लेंसेज का इस्‍तेमाल कर रहे हैं. हमारे वहां कोई भी कंज्‍यूमर हो सकता है. अगर आपकी नजर कम है तो आप हमारे पोटेंशियल कंज्‍यूमर हो सकते हैं. 

ये भी पढ़ें: पिछले कुछ सालों में कितना बदल गया है रिटेल वर्ल्ड? BW इवेंट में मिला जवाब


 
 


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