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मोदी की लहर के खिलाफ खेलकर दांव, कैसे लोगों ने जलाये अपने हाथ?

इस साल ऐसा तीसरी बार हुआ है जब FPI ने भारत के सूचकांक के फ्यूचर्स वाले सेक्शन में भारी शॉर्ट पोजीशन बनाई थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

Palak Shah

भारतीय शेयर बाजार के बियर इस उम्मीद पर सवार थे कि "मोदी लहर" (जनता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता) कम हो रही है और उनके अनुसार ऐसा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (INC) के राहुल गांधी द्वारा एक साल की भारत जोड़ो यात्रा की वजह से हुआ है. लेकिन डेटा से पता चलता है कि चार राज्यों के चुनावों से पहले भारतीय बाजारों बियरों द्वारा खेला गया दांव, FPIs (फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स) के लिए एक और हार में बदल गया क्योंकि उन्हें फिर से अपने शॉर्ट्स को कवर करने के लिए दौड़ लगानी पड़ी है.

नहीं हुई अनुमानित गिरावट
इस साल ऐसा तीसरी बार हुआ है जब FPI ने भारत के सूचकांक के फ्यूचर्स वाले सेक्शन में भारी शॉर्ट पोजीशन बनाई थी. पहले दो मौके जनवरी में पैदा हुए थे, पहला जब अडानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी और दूसरा जब हिंडनबर्ग रिपोर्ट की तर्ज पर अडानी समूह के खिलाफ अगस्त में संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग परियोजना (OCCRP) द्वारा नकारात्मक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी.  हालांकि हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद बाजार में कुछ हद तक गिरावट आई थी लेकिन अगस्त में निफ्टी, सेंसेक्स और बैंक निफ्टी जैसे बेंचमार्क सूचकांकों में भारी शॉर्ट बिल्ट-अप के आधार पर अनुमानित गिरावट देखने को नहीं मिली थी.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला
2 नवंबर को राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में चुनावों से पहले सूचकांकों के फ्यूचर्स सेक्शन में FPI द्वारा मंदी के दावों की संख्या 1.75 लाख कॉन्ट्रैक्ट पर पहुंच गई थी. मार्च में 196,000 शॉर्ट के बाद इस साल FPI द्वारा बनाया गया यह दूसरा सबसे बड़ा शॉर्ट-अप था. जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अडानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग आरोपों की जांच की निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया था. फिर अपने छोटे दांव को कवर करने के लिए FPI को मजबूर होना पड़ा, क्योंकि अडानी समूह ऑस्ट्रेलियाई अरबपति राजीव जैन के जीक्यूजी पार्टनर्स से धन जुटाने में कामयाब रहा था और इसकी वजह से डाउनग्रेड रिपोर्ट बंद हो गई थी. 

एक बार फिर चली मोदी की लहर
इस बार FPI द्वारा शॉर्ट कवरिंग मुख्य रूप से नवंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू हुई थी. सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई के दौरान जहां मार्केट रेगुलेटर SEBI ने अडानी समूह के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया, वहीं भारत के मुख्य न्यायाधीश ने हिंडनबर्ग की विश्वसनीयता पर संदेह उठाया. लेकिन FPI की कमी को देखते हुए उन्हें एक अंधी दौड़ में धकेल दिया गया और यह 3 दिसंबर के चुनाव नतीजों के बाद सामने आया, जहां पीएम मोदी की बीजेपी ने चार में से तीन राज्यों में आरामदायक बहुमत हासिल किया. परिणामों ने सबसे बड़े राजनीतिक पंडितों को भी आश्चर्यचकित कर दिया, क्योंकि इन चुनावों से यह पुष्टि हो गई कि पीएम मोदी और उनकी सत्तारूढ़ पार्टी 2024 के राष्ट्रीय चुनावों में भारी बहुमत के साथ अपना तीसरा कार्यकाल जीतने के लिए तैयार है. 

लगातार बढ़ रहे भारत के सूचकांक
आंकड़ों से पता चलता है कि 7 दिसंबर को FPI ने भारत में सूचकांकों के फ्यूचर्स सेक्शन में लगभग 23,000 कॉन्ट्रैक्टों की स्थिति बनाकर रखी है. नवंबर की शुरुआत से, जैसे-जैसे FPI की शॉर्ट पोजीशन बढ़ती रही, वैसे-वैसे भारत के प्रमुख बेंचमार्क इक्विटी सूचकांक, सेंसेक्स, निफ्टी और बैंक निफ्टी, घरेलू खरीदारी के दम पर वृद्धि करते रहे. अडानी ग्रुप पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निफ्टी इंडेक्स में 1000 अंकों से ज्यादा या करीब 5% की तेजी आई है. स्ट्राइक मनी एनालिटिक्स और इंडियाचार्ट्स के संस्थापक  रोहित श्रीवास्तव कहते हैं कि “ राज्यों में हुए चुनावों के परिणाम घोषित होने के बाद FPI द्वारा लगाए गए मंदी के दांवों का एक शॉर्ट कवरिंग सामने आया था. इससे पहले, भले ही एफपीआई ने मार्च 2023 के बाद रिकॉर्ड पर दूसरा सबसे बड़ा मंदी का दांव लगाया था, लेकिन वे अपने शॉर्ट्स को कवर करने के इच्छुक नहीं थे.” लेकिन साथ ही रोहित यह भी मानते हैं कि FPI की स्थिति में किसी भी अतिरिक्त या महत्वपूर्ण वृद्धि का मतलब यह हो सकता है कि बाजार सुधार के लिए तैयार है. स्ट्राइक मनी एनालिटिक्स के डेटा से यह भी पता चलता है कि भारत के स्मॉल और मिड-कैप सूचकांक पिछले एक महीने के दौरान लगातार 23 दिनों तक बढ़े हैं. 

अडानी और मोदी इस तरह हैं करीबी?
क्योंकि अडानी समूह के संस्थापक गौतम अडानी, पीएम मोदी के ही राज्य यानी गुजरात से आते हैं, इसलिए दोनों को एक दूसरे का करीबी माना जाता है. इसके पीछे एक अन्य मुख्य कारण, देश भर में बड़े बुनियादी स्ट्रक्चर प्रोजेक्टों में अडानी की रुचि और उन्हें प्राप्त करने में होने वाली आसानी भी है. अमेरिका स्थित शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों ने समूह की आठ सूचीबद्ध कंपनियों की अभूतपूर्व वृद्धि को रोक दिया था और गौतम अडानी दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति के पद से फिर से लुढ़क गए. हालांकि हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद गौतम अडानी, एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी से काफी नीचे आ गए थे.

अडानी ग्रुप के शेयरों में आया उछाल
सुप्रीम कोर्ट की पिछली सुनवाई और तीन राज्यों में बीजेपी की चुनावी जीत के बाद से अडानी ग्रुप के शेयरों में 15 से 25% तक की वृद्धि हुई है. राज्य के चुनावों में BJP की जीत के बाद, अमेरिकी सरकार की एक इकाई ने भी अडानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर संदेह जताया. विशेषज्ञों का मानना है कि सत्तारूढ़ दल के साथ एकजुटता दिखाने का यह यह बाइडन सरकार का तरीका था, क्योंकि अमेरिकी सरकार ने हाल ही में इस मुद्दे पर पर्दा डाल दिया था. इसके बावजूद, विशेषज्ञ बाजार में सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि सूचकांक और अधिकांश स्टॉक की कीमतें अपने चरम मूल्यांकन पर हैं.
 

यह भी पढ़ें: ऑल्‍टमैन विवाद में सामने आया नया ट्विस्‍ट, अब मस्‍क की हुई एंट्री

 


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