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‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ का रास्ता साफ, कैबिनेट से मिली मंजूरी, जल्द हो सकता है संसद में पेश
इस फैसले के बाद एक व्यापक बिल लाया जाएगा जिससे पूरे देश में लोकसभा, विधानसभा, शहरी निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने का रास्ता साफ होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है. सूत्रों के मुताबिक इस बिल को मौजूदा शीतकालीन सत्र के दौरान ही संसद में पेश किया जा सकता है. इस बिल को लेकर सभी राजनीतिक दलों के सुझाव लिए जाएंगे. बाद में इसे संसद से पास कराया जाएगा. इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमिटी ने एक देश एक चुनाव से जुड़ी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी.
लोकसभा और विधानसभा के चुनाव होंगे एक साथ
‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के तहत लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएंगे. रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमिटी की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि पहले कदम में लोकसभा और राज्यसभा चुनाव को एक साथ कराना चाहिए. कमेटी ने सिफारिश की है कि लोकसभा और राज्यसभा के चुनाव एक साथ संपन्न होने के 100 दिन के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव हो जाने चाहिए.
क्या है ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ का कॉन्सेप्ट?
दरअसल पीएम मोदी लंबे समय से ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ की वकालत करते आए हैं. उन्होंने कहा था कि चुनाव सिर्फ तीन या चार महीने के लिए होने चाहिए, पूरे 5 साल राजनीति नहीं होनी चाहिए. साथ ही चुनावों में खर्च कम हो और प्रशासनिक मशीनरी पर बोझ न बढ़े. ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ का मतलब है कि भारत में लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं.
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ से चुनावी खर्च में कमी आएगी, सार्वजनिक कल्याण योजनाओं में रुकावट कम होगी और देश में विकास कार्य तेजी से हो सकेंगे. इस पहल को लेकर सरकार अब विपक्ष और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा करेगी.
• ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ से जनता को बार-बार के चुनाव से मुक्ति मिलेगी.
• हर बार चुनाव कराने पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, जो कि कम हो सकते हैं.
• यह कॉन्सेप्ट देश में राजनीतिक स्थिरता लाने में अहम रोल निभा सकता है.
• इलेक्शन की वजह से बार बार नीतियों में बदलाव की चुनौती कम होगी.
• सरकारें बार-बार चुनावी मोड में जाने की बजाय विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी.
• प्रशासन को भी इसका फायदा मिलेगा, गवर्नेंस पर जोर बढ़ेगा.
• पॉलिसी पैरालिसिस जैसी स्थिति से छुटकारा मिलेगा, अधिकारियों का समय और एनर्जी बचेगी.
• सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा और आर्थिक विकास में तेजी आएगी.
पहले भी एक साथ हो चुके हैं चुनाव
‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ भारत के लिए कोई नया कॉन्सेप्ट नहीं है. देश में आजादी के बाद से 1967 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही कराए थे. 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए थे, लेकिन राज्यों के पुनर्गठन और अन्य कारणों से चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे.
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