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रूस से तेल आयात में आई बड़ी गिरावट, अप्रैल में 20% टूटा भारत का खरीद आंकड़ा: रिपोर्ट
मार्च 2026 में भारत ने रूस से लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा था, लेकिन अप्रैल में यह आंकड़ा घटकर औसतन 15.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
मध्य पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच भारत के लिए राहत माने जा रहे रूसी कच्चे तेल के आयात में अप्रैल महीने में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. मार्च में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची खरीद अब करीब 20 फीसदी घट गई है. इससे संकेत मिल रहे हैं कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता अब भारत की खरीद रणनीति को भी प्रभावित कर रही है.
मार्च के मुकाबले अप्रैल में कम हुआ आयात
मार्च 2026 में भारत ने रूस से लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा था. लेकिन अप्रैल में यह आंकड़ा घटकर औसतन 15.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. यानी एक ही महीने में खरीद में तेज गिरावट दर्ज हुई है.
मार्च में भारत ने अवसर का फायदा उठाते हुए बड़ी मात्रा में तेल खरीदा था, क्योंकि उस समय मध्य पूर्व से सप्लाई बाधित होने लगी थी.
मार्च में क्यों बढ़ी थी खरीद
मार्च के दौरान अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के कारण कई देशों को तेल आपूर्ति को लेकर चिंता थी. ऐसे समय भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से उपलब्ध फ्लोटिंग कार्गो यानी समुद्र में पहले से मौजूद तेल खेपों की खरीद तेज कर दी थी. इसके अलावा कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी राहत मिलने से भी रूसी तेल खरीदना आसान हुआ था.
अप्रैल में गिरावट की 3 बड़ी वजहें
विश्लेषकों के अनुसार अप्रैल में आयात घटने के पीछे तीन प्रमुख कारण रहे.
1. निर्यात टर्मिनल पर हमला: रूस के एक बड़े निर्यात टर्मिनल पर यूक्रेनी हमले के बाद लोडिंग प्रभावित हुई, जिससे सप्लाई धीमी पड़ी.
2. फ्लोटिंग कार्गो खत्म हुए: मार्च में जो तैयार तेल खेप उपलब्ध थीं, वे अप्रैल तक लगभग समाप्त हो गईं.
3. रिफाइनरियों में मेंटेनेंस: भारत की कुछ रिफाइनरियों में रखरखाव कार्य और शटडाउन के कारण मांग कम रही.
किस कंपनी ने खरीदा सबसे ज्यादा तेल
अप्रैल में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा. कंपनी ने कुल रूसी तेल खरीद का 42 फीसदी हिस्सा अकेले लिया.
1. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन. 6.7 लाख बैरल प्रतिदिन
2. रिलायंस इंडस्ट्रीज. 2.63 लाख बैरल प्रतिदिन
3. भारत पेट्रोलियम. 1.36 लाख बैरल प्रतिदिन
4. हिंदुस्तान पेट्रोलियम. 83 हजार बैरल प्रतिदिन
नायरा एनर्जी की खरीद में भारी गिरावट
नायरा एनर्जी की खरीद मार्च के 3.15 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर अप्रैल में सिर्फ 28 हजार बैरल प्रतिदिन रह गई. कंपनी ने 9 अप्रैल से 35 दिन के मेंटेनेंस शटडाउन की शुरुआत की थी, जिसका असर खरीद पर पड़ा.
भारत के लिए क्यों जरूरी है रूसी तेल
रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल भारत की ऊर्जा लागत नियंत्रित रखने में मदद करता है. इससे पेट्रोल-डीजल कीमतों और महंगाई पर दबाव कम होता है. अगर होर्मुज संकट लंबा खिंचता है और मध्य पूर्व से सप्लाई प्रभावित रहती है, तो भारत दोबारा रूसी तेल खरीद बढ़ा सकता है. हालांकि रूस पर प्रतिबंध, युद्ध और लॉजिस्टिक्स चुनौतियां भविष्य में जोखिम बनी रहेंगी.
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