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चीन ने रोकी Meta की $2 अरब AI डील, Manus अधिग्रहण पर ब्रेक
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका चीन की एडवांस चिप्स और AI तकनीक तक पहुंच को सीमित करने के लिए निर्यात प्रतिबंध कड़े कर रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तकनीकी तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. चीन ने अमेरिकी टेक कंपनी मेटा (Meta Platforms) की लगभग 2 अरब डॉलर की AI स्टार्टअप खरीद डील को रोकने का आदेश दिया है. यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को और गहरा करता है.
चीन ने रोकी AI डील
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन ने मेटा और चीनी AI स्टार्टअप मानुस (Manus) के बीच होने वाली डील को रद्द करने का निर्देश दिया है. यह अब तक के सबसे हाई-प्रोफाइल हस्तक्षेपों में से एक माना जा रहा है, खासकर क्रॉस-बॉर्डर AI डील्स के मामले में.
टेक्नोलॉजी और AI टैलेंट पर सख्त रुख
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका चीन की एडवांस चिप्स और AI तकनीक तक पहुंच को सीमित करने के लिए निर्यात प्रतिबंध कड़े कर रहा है. इसके जवाब में चीन भी अपने देश की उभरती AI तकनीक और टैलेंट को अमेरिकी कंपनियों के हाथों जाने से रोकने की कोशिश कर रहा है.
Meta की बड़ी AI रणनीति को झटका
मेटा जोकि फेसबुक की मूल कंपनी है, ने दिसंबर में Manus को 2 अरब डॉलर से अधिक में खरीदने पर सहमति जताई थी. कंपनी का लक्ष्य AI “एजेंट्स” विकसित करना था, जो बिना ज्यादा मानव हस्तक्षेप के जटिल काम कर सकें और पारंपरिक चैटबॉट्स से कहीं अधिक सक्षम हों.
रेगुलेटरी जांच और यात्रा प्रतिबंध
मार्च में इस डील पर जांच और तेज हो गई थी, जब मानुस के सीईओ शियाओ हॉंग (Xiao Hong) और मुख्य वैज्ञानिक जी यीचाओ (Ji Yichao) को चीन छोड़ने से रोक दिया गया था. अधिकारियों द्वारा डील की समीक्षा के चलते यह कदम उठाया गया था.
Manus और चीन की AI दौड़
मानुस ने पिछले साल तब सुर्खियां बटोरी थीं जब उसने खुद को दुनिया का पहला जनरल AI एजेंट बताया था. इसके बाद इसे चीन के उभरते डीपसीक (DeepSeek) जैसे AI प्रोजेक्ट्स का संभावित प्रतिद्वंदी माना जाने लगा था.
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए Manus ने हाल ही में अपना मुख्यालय सिंगापुर स्थानांतरित कर दिया है. यह कदम उन चीनी टेक कंपनियों की बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है जो अमेरिका-चीन तनाव से बचने के लिए ऑफशोर बेस बना रही हैं.
इस फैसले ने अमेरिका और चीन के बीच पहले से जारी टेक और AI प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है. साथ ही यह संकेत भी देता है कि भविष्य में AI और हाई-टेक डील्स पर भू-राजनीतिक प्रभाव और बढ़ सकता है.
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