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ऋण वृद्धि जमा से आगे निकली, मार्च के बाद मौसमी सुस्ती के बावजूद क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी
बैंकों की कुल जमा राशि 15 अप्रैल 2026 तक ₹256.5 लाख करोड़ रही, जो साल-दर-साल 12.2% की वृद्धि दर्शाती है. लेकिन तिमाही आधार पर जमा में ₹5.8 लाख करोड़ यानी 2.2% की गिरावट दर्ज की गई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत में बैंकिंग सेक्टर की स्थिति मजबूत बनी हुई है, भले ही मार्च के बाद मौसमी सामान्यीकरण के चलते तिमाही आधार पर आंकड़ों में गिरावट देखी गई हो. एक रिपोर्ट के अनुसार, साल-दर-साल आधार पर बैंक क्रेडिट ग्रोथ अभी भी जमा वृद्धि से आगे चल रही है.
क्रेडिट ग्रोथ में सालाना मजबूती बरकरार
केयरएज (CareEdge Ratings) की रिपोर्ट के अनुसार, 15 अप्रैल 2026 तक कुल बैंक ऋण ₹209.2 लाख करोड़ तक पहुंच गया. यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 15.0% की वृद्धि दर्शाता है, जबकि पिछले वर्ष यह वृद्धि 10.3% थी. हालांकि तिमाही आधार पर देखें तो बैंक क्रेडिट में ₹4.40 लाख करोड़ यानी 2.1% की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट मार्च के अंत में लोन ग्रोथ के तेज उछाल के बाद सामान्यीकरण का परिणाम है.
जमा में भी दिखा मौसमी असर
बैंकों की कुल जमा राशि 15 अप्रैल 2026 तक ₹256.5 लाख करोड़ रही, जो साल-दर-साल 12.2% की वृद्धि दर्शाती है. लेकिन तिमाही आधार पर जमा में ₹5.8 लाख करोड़ यानी 2.2% की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट आम तौर पर मार्च के अंत में कॉरपोरेट और सरकारी फंड मूवमेंट के बाद देखी जाती है.
लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो बढ़ा
क्रेडिट ग्रोथ जमा से तेज रहने के कारण लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो बढ़कर 81.6% हो गया, जो पिछले फोर्टनाइट में 81.4% था. हालांकि यह मार्च के मध्य के 83% के उच्च स्तर से नीचे है, लेकिन सालाना आधार पर अभी भी ऊंचा बना हुआ है.
रिटेल और MSME लोन से मिला सपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रेडिट ग्रोथ को मुख्य रूप से रिटेल लोन से सपोर्ट मिला है, खासकर गोल्ड और वाहन ऋणों से. इसके अलावा MSME सेक्टर में फाइनेंसिंग, NBFC को बैंक एक्सपोजर और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में भी स्थिर वृद्धि देखने को मिली है.
जमा संरचना में बदलाव
टाइम डिपॉजिट, जो कुल जमा का 87.4% हिस्सा है, 10.9% बढ़कर ₹224.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया. वहीं, डिमांड डिपॉजिट में तेज उछाल देखा गया और यह 22.1% बढ़कर एक साल पहले के 7.3% की तुलना में काफी मजबूत रहा.
बाजार में लिक्विडिटी स्थिति स्थिर
मनी मार्केट में वेटेड एवरेज कॉल रेट 5.08% पर रहा, जो रेपो रेट से नीचे है. इससे संकेत मिलता है कि सिस्टम में लिक्विडिटी की स्थिति फिलहाल आरामदायक बनी हुई है.
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च के बाद बैंक बैलेंस शीट में मौसमी नरमी दिख रही है, लेकिन मूल रूप से क्रेडिट ग्रोथ अभी भी जमा से तेज बनी हुई है. इससे संकेत मिलता है कि नए वित्तीय वर्ष में भी बैंकिंग सिस्टम में लोन डिमांड मजबूत बनी रह सकती है.
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