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रुपये की वैश्विक चाल पर RBI की कड़ी नजर: विदेशी सौदों की होगी मॉनिटरिंग, 2027 से लागू होंगे नए नियम

रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी केवल भारतीय बैंकों तक सीमित नहीं रहेगी. विदेशी शाखाओं और सहयोगी संस्थाओं को भी सीधे डेटा देने की अनुमति दी गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारत की मुद्रा को वैश्विक बाजारों में अधिक स्थिर और पारदर्शी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. अब सिर्फ देश के भीतर ही नहीं, बल्कि विदेशों में होने वाले रुपये से जुड़े सौदों पर भी नजर रखी जाएगी. जुलाई 2027 से लागू होने वाले नए नियम फॉरेक्स मार्केट की तस्वीर बदल सकते हैं.

ऑफशोर डील्स पर भी होगी निगरानी

अब तक RBI की निगरानी मुख्य रूप से घरेलू बाजार तक सीमित थी, लेकिन नए नियमों के तहत विदेशों में होने वाले रुपये-आधारित डेरिवेटिव सौदे भी दायरे में आ जाएंगे. खासतौर पर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) जैसे सेगमेंट, जहां बड़े स्तर पर ट्रेडिंग होती है, अब रेगुलेटरी निगाह में रहेंगे. इससे रुपये की वास्तविक कीमत तय करने में मदद मिलेगी और विदेशी बाजारों के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा.

बैंकों को देनी होगी हर बड़ी डील की जानकारी

RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपने ग्रुप या विदेशी शाखाओं द्वारा किए गए हर महत्वपूर्ण डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की जानकारी साझा करें. इसमें कॉन्ट्रैक्ट की नॉशनल वैल्यू, मैच्योरिटी अवधि, काउंटरपार्टी की जानकारी और करेंसी स्ट्रक्चर जैसी अहम जानकारियां शामिल होंगी. इस विस्तृत रिपोर्टिंग से यह स्पष्ट हो सकेगा कि रुपये से जुड़ा जोखिम कहां पैदा हो रहा है और कैसे फैल रहा है.

छोटे सौदों को राहत

नए नियमों में कुछ राहत भी दी गई है. 1 मिलियन डॉलर से कम के सौदों को रिपोर्टिंग से बाहर रखा गया है और बैक-टू-बैक ट्रांजैक्शंस को भी छूट दी गई है. यह कदम बैंकों पर अतिरिक्त बोझ को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है.

विदेशी संस्थाओं की भी होगी भागीदारी

रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी केवल भारतीय बैंकों तक सीमित नहीं रहेगी. विदेशी शाखाओं और सहयोगी संस्थाओं को भी सीधे डेटा देने की अनुमति दी गई है. इससे ऑफशोर बाजार की गतिविधियों को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा और पूरी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी.

चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे नियम

RBI ने इन नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई है. जुलाई 2027 तक कुल FX डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन का 70% डेटा रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा, जनवरी 2028 तक यह 80% तक बढ़ेगा और जुलाई 2028 तक इसे 100% कर दिया जाएगा. इस धीरे-धीरे लागू होने वाली प्रक्रिया से सिस्टम को नए ढांचे में ढलने का पर्याप्त समय मिलेगा.

विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक रुपये की कीमत का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों में तय होता रहा है, जिससे घरेलू नीतियों का प्रभाव सीमित रह जाता था. नए नियम इस अंतर को कम करेंगे और ऑनशोर व ऑफशोर बाजारों के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद करेंगे. कुल मिलाकर यह कदम रुपये की स्थिरता, पारदर्शिता और वैश्विक विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है.
 


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