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MSME और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए विकेंद्रीकृत DPI मॉडल की सिफारिश: रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, आधार, जन धन खातों, मोबाइल कनेक्टिविटी और UPI पर आधारित भारत के DPI के पहले चरण ने यह दिखाया कि साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म किस तरह दशकों की प्रगति को कुछ ही वर्षों में संभव बना सकते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारत में समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के लिए तैयार की गई एक नई रिपोर्ट में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के अगले चरण के लिए विकेंद्रीकृत और राज्य-नेतृत्व वाली रणनीति अपनाने की सिफारिश की गई है. vनीति फ्रंटियर टेक हब (Niti Frontier Tech Hub) द्वारा तैयार इस रोडमैप में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) और कृषि क्षेत्र पर शुरुआती फोकस रखते हुए तेज़ और व्यापक आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है.

पहले चरण की सफलता ने बनाई मजबूत नींव

रिपोर्ट के अनुसार, आधार, जन धन खातों, मोबाइल कनेक्टिविटी और UPI पर आधारित भारत के DPI के पहले चरण ने यह दिखाया कि साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म किस तरह दशकों की प्रगति को कुछ ही वर्षों में संभव बना सकते हैं. अनुमान है कि 2022 में DPI का योगदान जीडीपी में लगभग 0.9% था, जो 2030 तक बढ़कर 4.2% तक पहुंच सकता है, यदि अगले चरण को तेजी और बेहतर समन्वय के साथ लागू किया जाए. 

DPI 2.0: राज्यों की होगी मुख्य भूमिका

रिपोर्ट की पहली प्रमुख सिफारिश यह है कि DPI 2.0 को मुख्य रूप से राज्यों द्वारा संचालित किया जाए, जबकि केंद्र सरकार और NITI Aayog सहयोगी और मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं. राज्य स्तर पर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार नीति में लचीलापन, प्रशासनिक नियंत्रण और नवाचार को बढ़ावा देकर तेज़ और प्रभावी बदलाव संभव हो सकता है.

दो-वर्षीय परिवर्तन चक्र से मिलेगा गति

दूसरी सिफारिश में दो-वर्षीय सहयोगात्मक और चरणबद्ध (iterative) चक्र अपनाने की बात कही गई है. रिपोर्ट बताती है कि DPI की समझ अभी सभी विभागों और राज्यों में समान नहीं है, इसलिए शुरुआती चरण में प्रयोग, मॉडल तैयार करना और क्षमता निर्माण पर जोर दिया जाना चाहिए. इससे “सफल उदाहरण” (exemplar pathways) तैयार होंगे, जिन्हें बाद में अन्य राज्य अपना सकेंगे.

MSME और कृषि पर विशेष ध्यान

2026–27 के पहले चक्र में MSME और कृषि क्षेत्रों में तीन प्रमुख परिवर्तन लाने की सिफारिश की गई है. ये क्षेत्र उच्च लेनदेन लागत, सीमित बाजार पहुंच, उत्पादकता की कमी और भरोसे की समस्याओं जैसी संरचनात्मक चुनौतियों से जूझ रहे हैं.

1. MSME के लिए: बाजार, ऋण, कुशल श्रम और सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच
2. कृषि के लिए: सूचना असमानता कम करना, सप्लाई चेन की पारदर्शिता बढ़ाना और किसानों, खरीदारों व सेवा प्रदाताओं के बीच भरोसेमंद डेटा साझा करना

‘चैंपियन’ राज्यों में पायलट परियोजनाएं

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि पहले वर्ष में छह “चैंपियन” राज्य या केंद्र शासित प्रदेश पायलट प्रोजेक्ट शुरू करें. दूसरे वर्ष में, सफल मॉडल के आधार पर कम से कम पांच अन्य राज्यों में विस्तार किया जाए. इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) और नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा विशेषज्ञ समूह और वैश्विक साझेदारियों के साथ एक संस्थागत ढांचा बनाने की भी सिफारिश की गई है.

वैश्विक नेतृत्व की ओर भारत

रिपोर्ट की चौथी सिफारिश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका को मजबूत करने पर केंद्रित है. इसके तहत 2027 तक एक स्वतंत्र, वैश्विक संस्था बनाने का प्रस्ताव है, जो DPI और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देगी. यह संस्था भारत को वैश्विक DPI समुदाय का नेतृत्वकर्ता बना सकती है.

संरचनात्मक बाधाओं को हटाने पर जोर

रिपोर्ट में “क्रॉस-सेक्टर स्ट्रैटेजिक अनलॉक्स” पर भी जोर दिया गया है, जिनमें शामिल हैं:

- कम लागत और भरोसेमंद डेटा सत्यापन
- खुले नेटवर्क के माध्यम से डिजिटल लेनदेन का विस्तार
- डेटा साइलो, उच्च लागत और इंटरऑपरेबिलिटी की समस्याओं का समाधान

इन सुधारों से विभिन्न उद्योगों में व्यापक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है, जैसा पहले आधार, जन धन और UPI के संयोजन से हुआ था.

यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यदि भारत DPI के अगले चरण को सही रणनीति और सहयोग के साथ लागू करता है, तो MSME और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़ा बदलाव संभव है.
विकेंद्रीकरण, प्रयोग और वैश्विक सहयोग पर आधारित यह मॉडल भारत को “विक्सित भारत 2047” के लक्ष्य के करीब ले जा सकता है.
 


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