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क्या मोदी की नजरों से उतर गए फडणवीस, महाराष्ट्र में चाचा-भतीजा फिर आएंगे साथ?
महाराष्ट्र में अक्टूबर में विधानसभा चुनाव होना है. इस बार भाजपा को पहले से ज्यादा मुश्किलों का सामना करना होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति बहुत तेजी से बदल रही है. माना जा रहा है कि भाजपा अजित पवार को किनारे करके अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में उतर सकती है. खबर यह भी है कि इस बार पार्टी बगैर सीएम फेस घोषित किए ही चुनाव लड़ेगी. हाल ही में राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ महाराष्ट्र बीजेपी नेताओं की एक बैठक हुई थी, जिसमें राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव पर भी चर्चा हुई. बताया जा रहा है कि पार्टी ने बिना CM उम्मीदवार घोषित किए चुनाव में उतरने का फैसला किया है. पहले, देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री के दावेदार के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन लोकसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के चलते आलाकमान उनसे नाखुश है.
आसान नहीं BJP की राह
भाजपा मौजूदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर दोबारा दांव लगाने के भी मूड में नहीं है. दरअसल, यह माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में भाजपा को एकनाथ शिंदे और अजित पवार के साथ का खामियाजा भुगतना पड़ा है. शिंदे ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना में तोड़फोड़ की थी और अजित अपने चाचा शरद पवार की पार्टी तोड़कर आए थे. इस वजह से इन दोनों को लेकर जनता में आक्रोश था, जिसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा. अजित पवार की NCP महज एक सीट जीत पाई है. वहीं, एकनाथ शिंदे की पार्टी को 7 सीटों पर संतोष करना पड़ा है. जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 9 सीटों पर जीत मिली है. हालांकि, भाजपा के लिए अजित और शिंदे से दूरी बनाना आसान नहीं होगा.
शिंदे को चाहिए 100 सीटें
वहीं, एकनाथ शिंदे गुट अभी से भाजपा की टेंशन बढ़ाने में जुट गया है. पार्टी के एक सीनियर लीडर का कहना है कि राज्य की 288 सीटों में से हमें कम से कम 100 सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए. महाराष्ट्र विधानसभा की मौजूदा तस्वीर की बात करें, तो BJP के पास अभी 103 विधायक हैं, शिंदे की शिवसेना के पास 40 और अजित पवार की एनसीपी के भी 40 विधायक हैं. 288 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 145 सीटों की ज़रूरत होती है. ऐसे में इसकी संभावना बेहद कम है कि भाजपा अपना दायरा सीमित करके एकनाथ शिंदे की पार्टी को 100 सीटों पर लड़ने दे. इस सूरत में दोनों दलों के बीच टकराव से इंकार नहीं किया जा सकता.
अजित के बचाव में पवार
यह भी संभव है कि चाचा-भतीजे की जोड़ी विधानसभा चुनाव में फिर से एकसाथ लड़े. जिस तरह से शरद पवार गुट ने अजित पवार का बचाव किया है, उससे यही संकेत मिलता है कि दोनों के बीच सुलह हो सकती है. शरद पवार के पोते रोहित पवार का कहना है कि भाजपा की हार के लिए अजित पवार जिम्मेदार नहीं हैं. उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है. भाजपा राज्य में त्रिकोणीय लड़ाई बनाने की कोशिश कर रही है. क्योंकि भाजपा नेताओं का मानना है कि ऐसी लड़ाई होगी तो फायदा होगा. बता दें कि कुछ भाजपा नेता लोकसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के लिए अजित पवार को दोषी मान रहे हैं. इसी के संदर्भ में रोहित ने अजित पवार का बचाव किया है.
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