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सोशल मीडिया टिप्पणी पर अब नहीं होगी गिरफ्तारी या केस, सुप्रीम कोर्ट का साफ निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस यूयू ललित की अगुवाई वाली बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि जिनके खिलाफ भी आईटी एक्ट की धारा 66A के तहत केस चल रहा है उसे तुरंत निरस्त किया जाये.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: देश में किसी के खिलाफ भी आईटी एक्ट की धारा 66A के तहत मुकदमा दर्ज नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस धारा के तहत किसी भी व्यक्ति के खिलाफ न तो किस दर्ज होगा, न गिरफ्तारी की जा सकेगी. सुप्रीम कोर्ट ने सात साल पहले ही इस धारा को असंवैधानिक घोषित कर दिया था लेकिन इसके बावजूद इसके तहत लोगों पर केस दर्ज किए जाते रहे.

आईटी एक्ट की धारा 66A असंवैधानिक 
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस यूयू ललित की अगुवाई वाली बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि जिनके खिलाफ भी आईटी एक्ट की धारा 66A के तहत केस चल रहा है उसे तुरंत निरस्त किया जाये. इस मुद्दे को उठाने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने राज्यों के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशकों से कहा कि वे अपने अधिकारियों को निर्देश दें कि वे धारा 66 A के उल्लंघन के संबंध में कोई शिकायत दर्ज न करें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2015 में श्रेया सिंघल मामले में अदालत की ओर से धारा 66A को असंवैधानिक करार दिया गया था, यानी इसे 2015 में निरस्त किया जा चुका है. अगर इस मामले में केस दर्ज होता है और आपराधिक कार्यवाही की जाती है तो वह असंवैधानिक होगा. 

आईटी एक्ट की धारा 66A को रद्द किए जाने के बावजूद इस धारा में राज्यों में केस दर्ज किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जाहिर की थी. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस यूयू ललित की अगुवाई वाली बेंच ने निर्देश दिया था कि केंद्र सरकार राज्यों से चर्चा करके इसके लिये जल्द से जल्द कदम उठाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है इस बात पर ध्यान दिया जाए कि सभी लंबित मामलों से इस प्रावधान को हटा दिया गया हो. 

क्या है श्रेया सिंघल मामला
दरअसल शिवसेना चीफ रहे बाल ठाकरे की मौत के बाद जब उनकी शवयात्रा निकाली गई तो मुंबई में लोगों को जिंदगी पर कैसे असर पड़ा, इसे लेकर फेसबुक पर कई लोगों ने टिप्पणियां की थीं. कमेंट करने वालों की गिरफ्तारियां की गईं, इसके बाद इस मामले में लॉ की छात्रा श्रेया सिंघल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी और आईटी एक्ट की धारा 66A को असंवैधानिक बताते हुए खत्म करने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने पक्ष में फैसला सुनाते हुए साल 2015 में ऐतिहासिक आदेश सुनाया. जिसमें इस धारा को निरस्त कर दिया. 

क्या थी धारा 66A 
इस धारा के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक या ट्विटर पर किसी विषय पर टिप्पणी करने पर कोई सरकार या व्यक्ति इसे आपत्तिजनक बताकर टिप्पणी करने वाले व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज करा सकता था. बीते कुछ सालों में सरकारों ने इसका जमकर इस्तेमाल किया है. सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट करने पर प्रशासन और पुलिस ने लोगों पर धड़ाधड़ मुकदमे दर्ज किये. अगर पुलिस-प्रशासन चाहे तो हर सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तारी कर सकती थी, इसका इस्तेमाल लोगों की आवाज दबाने के लिये किया जा रहा था. ये धारा सूचना-प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत आती थी. धारा 66A के तहत आपत्तिजनक पोस्ट डालने पर 3 साल की सजा का प्रावधान था.

VIDEO: दूध, मांस, बेबी पाउडर के लिए FSSAI का नया आदेश

 


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