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Electoral Bonds: सुप्रीम कोर्ट में फिर लगी SBI की क्लास, 'अधूरी' जानकारी से अदालत नाखुश

इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी स्टेट बैंक ऑफ को लताड़ लगा चुका है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bonds) मामले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को फिर से अदालत की फटकार मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने यूनिक नंबर की जानकारी न देने के लिए SBI की खिंचाई करते हुए कहा कि बैंक जानकारी के खुलासे को लेकर सेलेक्टिव नहीं हो सकता. कोर्ट ने आगे कहा कि एसबीआई को हर हाल में पूरी जानकारी प्रदान करनी होगी. पिछली सुनवाई में अदालत ने SBI को इलेक्टोरल बॉन्ड के यूनिक नंबर उजागर करने के लिए 18 मार्च का समय दिया था. 

ऐसा रवैया है आपका
चुनावी चंदे के खुलासे से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने कहा कि एसबीआई से अपेक्षा की गई थी कि वह इलेक्टोरल बॉन्ड के संबंध में हर संभावित विवरण देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है. पीठ ने आगे कहा - आपका रवैया कुछ ऐसा है कि जब तक हम आपको जानकारी देने के लिए न कहें, आप नहीं देंगे. इस मामले में एसबीआई को चयनात्मक नहीं होना चाहिए. बैंक को निष्पक्ष और अदालत के प्रति स्पष्टवादी होना चाहिए. 

देना होगा हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को बॉन्ड का नंबर मुहैया कराने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि बैंक को गुरुवार शाम 5 बजे तक हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसमें इस बात का जिक्र करना होगा कि उसके पास इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी कोई जानकारी अब बची नहीं है. मामले की सुनवाई के दौरान, CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने एसबीआई से कहा कि कोई भी जनकारी छिपाई नहीं जा सकती. इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी हर एक जानकारी सार्वजनिक करनी ही होगी. कोर्ट ने बैंक को 21 मार्च को हलफनामा दाखिला करने का निर्देश दिया है.

इस तरफ फंसा एसबीआई 
अदालत ने कहा कि हमारे आदेश स्पष्ट थे, SBI को बॉन्ड से जुड़ी हर जानकारी मुहैया करानी थी. बॉन्ड को खरीदने और भुनाने के संबंध में पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए थे, चुनावी बॉन्ड नंबरों या अल्फा न्यूमेरिक नंबरों का विवरण शामिल है. बता दें कि प्रशांत भूषण और कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान यूनिक नंबर की तरफ दिलाते हुए कहा था कि एसबीआई ने यूनिक नंबर मुहैया नहीं कराया है, इस कारण बहुत सी बातों का पता नहीं चल पाएगा. इसके बाद अदालत ने बैंक से पूरी जानकारी देने को कहा, लेकिन SBI अब तक आदेश पर अमल नहीं कर पाया है.  

क्या होता है ये नंबर?
सुप्रीम कोर्ट ने SBI को जिस यूनिक नंबर का खुलासा करने का निर्देश दिया है, वो हर इलेक्टोरल बॉन्ड पर अंकित होता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसबीआई जो इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करता है, उस पर अलग-अलग नंबर दर्ज होते हैं. इन नंबरों को केवल अल्ट्रावायलेट किरण यानी यूवी लाइट्स में ही देखा जा सकता है. ये नंबर अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों और नंबरों से मिलकर बने (अल्फान्यूमेरिक) होते हैं. इस नंबर से पता चलता है कि कोई खास बॉन्ड किसने और किसके लिए खरीदा था. दूसरे शब्दों में कहें तो अगर इसका खुलासा हो जाता है, तो यह पता चल जाएगा कि किस कंपनी, संस्था या व्यक्ति ने किस राजनीतिक पार्टी को कितना चंदा दिया है. 


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