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शांति समझौते की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में रैली, कच्चा तेल लुढ़का; आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
शांति की उम्मीदों का सबसे बड़ा असर एशियाई बाजारों में देखने को मिला. अमेरिकी बाजारों में S&P 500 फ्यूचर्स 0.9 प्रतिशत और नैस्डैक फ्यूचर्स 1.5 प्रतिशत तक मजबूत हुए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
पश्चिम एशिया में जारी तनाव खत्म होने की उम्मीद ने वैश्विक बाजारों का माहौल बदल दिया है. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों से कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की गई. तेल में नरमी से महंगाई और ब्याज दरों पर दबाव घटने की उम्मीद बढ़ी है. इसी बीच विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में भी सकारात्मक शुरुआत के संकेत हैं, जहां वेदांता, एथर एनर्जी, JSW Energy, ONGC, HPCL और Dr Reddy's समेत कई शेयर कंपनी-विशेष खबरों के चलते निवेशकों के फोकस में रहेंगे.
आज इन शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर
सोमवार 15 जून के कारोबारी सत्र में कई प्रमुख शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे, क्योंकि इन कंपनियों से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणाएं सामने आई हैं. वेदांता की डीमर्जर के बाद बनी चार नई कंपनियों की शेयर बाजार में लिस्टिंग, एथर एनर्जी और KIMS की फंड जुटाने की योजनाएं, JSW Energy की नई जलविद्युत परियोजना की शुरुआत, NLC India को खनन ब्लॉक मिलने और Power Grid को नया ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट हासिल होने जैसी खबरें बाजार का ध्यान आकर्षित करेंगी. वहीं Aurobindo Pharma को US FDA से नियामकीय चुनौती, ONGC की सहयोगी कंपनी OPaL के फंड जुटाने की मंजूरी, HPCL द्वारा 19.25 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट तय करना, Meesho का 202 करोड़ रुपये का अधिग्रहण सौदा, SEPC को SAIL से बड़ा ऑर्डर, Ipca Laboratories का वैश्विक लाइसेंसिंग समझौता और Dr Reddy's द्वारा अमेरिका में नई कैंसर दवा लॉन्च करने की घोषणा भी इन शेयरों में गतिविधि बढ़ा सकती है. इन सभी घटनाक्रमों के चलते बाजार खुलते ही संबंधित स्टॉक्स में निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है.
युद्धविराम की दिशा में बड़ा कदम
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान युद्ध रोकने तथा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने पर सहमत हो गए हैं. यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है. समझौते की संभावना से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की धारणा मजबूत हुई है.
एशियाई बाजारों में जबरदस्त तेजी
शांति की उम्मीदों का सबसे बड़ा असर एशियाई बाजारों में देखने को मिला. जापान का निक्केई इंडेक्स कारोबार के दौरान 4 प्रतिशत से अधिक उछल गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कॉस्पी इंडेक्स 4.3 प्रतिशत तक चढ़ गया. जापान जैसे तेल आयातक देशों को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है.
अमेरिका और यूरोप के बाजारों में भी सकारात्मक संकेत
यूरोपीय बाजारों के फ्यूचर्स में भी मजबूती देखी गई. EURO STOXX 50 और DAX फ्यूचर्स में 0.2 प्रतिशत तथा FTSE फ्यूचर्स में 0.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई. वहीं अमेरिकी बाजारों में S&P 500 फ्यूचर्स 0.9 प्रतिशत और नैस्डैक फ्यूचर्स 1.5 प्रतिशत तक मजबूत हुए.
ब्याज दरों को लेकर बढ़ीं उम्मीदें
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में गिरावट से वैश्विक महंगाई पर दबाव कम होगा, जिससे केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में नरमी बरतने का अवसर मिल सकता है. इस सप्ताह अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और रूस के केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति बैठकों का आयोजन करने वाले हैं.
बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी आगामी बैठक में ब्याज दरों को 3.50 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बरकरार रख सकता है. नए चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में यह फेड की पहली बैठक होगी.
कच्चे तेल में भारी गिरावट
पश्चिम एशिया में शांति की संभावना और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है. वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4.29 प्रतिशत टूटकर 83.64 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड 4.92 प्रतिशत गिरकर 80.70 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है.
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया की करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होती है. 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से एक अरब बैरल से अधिक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी. ऐसे में इस समुद्री मार्ग के फिर से खुलने की संभावना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है. अमेरिका-ईरान समझौते की दिशा में बढ़ते कदमों ने फिलहाल वैश्विक बाजारों की चिंता कम कर दी है. तेल की कीमतों में गिरावट, महंगाई में संभावित नरमी और ब्याज दरों को लेकर सकारात्मक उम्मीदों के बीच आने वाले दिनों में शेयर बाजारों का रुख मजबूत बना रह सकता है. भारतीय बाजार में भी ऊर्जा, एविएशन, पेंट, केमिकल और उपभोक्ता क्षेत्र की कंपनियों को सस्ते कच्चे तेल का लाभ मिल सकता है, जबकि ऊपर बताए गए स्टॉक-विशिष्ट ट्रिगर्स कई शेयरों में अतिरिक्त तेजी का कारण बन सकते हैं.
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