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भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, 99% बातचीत पूरी; जल्द हो सकता है अंतरिम समझौता: अमेरिकी राजदूत

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर से अधिक हो गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 hours ago

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच गया है. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि दोनों देशों के बीच 99 प्रतिशत मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और केवल कुछ अंतिम बिंदुओं पर बातचीत जारी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों में इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी.

अंतिम दौर में पहुंची व्यापार वार्ता

दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता लगभग तैयार है. उन्होंने बताया कि समझौते के केवल अंतिम एक प्रतिशत हिस्से पर सहमति बननी बाकी है.

गोर के अनुसार, हाल ही में भारत ने लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए एक उच्चस्तरीय टीम वाशिंगटन डीसी भेजी थी. वहीं अगले सप्ताह अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी आगे की बातचीत के लिए भारत आएगा. उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों पक्ष जल्द ही समझौते को अंतिम रूप देने में सफल होंगे.

दो दशकों में 11 गुना बढ़ा द्विपक्षीय व्यापार

अमेरिकी राजदूत ने भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि पिछले 20 वर्षों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर से अधिक हो गया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका आज भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है, जबकि भारत भी अमेरिका के प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स में तेजी से उभर रहा है. यह बढ़ता व्यापार दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी की गहराई को दर्शाता है.

फरवरी में तय हुआ था समझौते का ढांचा

भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमति बनने को लेकर एक संयुक्त बयान जारी किया था. इसके बाद से दोनों देशों के अधिकारी विभिन्न तकनीकी और व्यापारिक मुद्दों पर लगातार बातचीत कर रहे हैं. अब बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और दोनों पक्ष जल्द समझौते पर हस्ताक्षर करने की दिशा में काम कर रहे हैं.

AI, टेक्नोलॉजी और निवेश में बढ़ेंगे अवसर

सर्जियो गोर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उन्नत प्रौद्योगिकी, निवेश, फार्मास्यूटिकल्स, अनुसंधान और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं. उनके मुताबिक, दोनों देशों के पास तकनीकी क्षमता, प्रतिभा और बाजार का ऐसा संयोजन है जो वैश्विक स्तर पर नई आर्थिक और तकनीकी संभावनाओं को जन्म दे सकता है.

हाई-टेक और क्रिटिकल मिनरल्स में साझेदारी पर जोर

गोर ने कहा कि उभरती तकनीकों और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के क्षेत्र में भारत और अमेरिका की साझेदारी वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है और यह बदलाव वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर रहा है.

उनका मानना है कि इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए भारत और अमेरिका से बेहतर साझेदार कोई नहीं हो सकता.

21वीं सदी की निर्णायक रणनीतिक साझेदारी की ओर

अमेरिकी राजदूत ने कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में बदलना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका की संयुक्त ताकतें तकनीकी नवाचार, आर्थिक विकास और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अहम भूमिका निभा सकती हैं. साथ ही यह साझेदारी दोनों देशों के नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने वाली साबित हो सकती है.

व्यापार समझौते से क्या होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिम व्यापार समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और कई क्षेत्रों में बाजार पहुंच आसान होगी. इससे भारतीय निर्यातकों और अमेरिकी कंपनियों दोनों को लाभ मिल सकता है. यदि समझौता तय समय पर संपन्न हो जाता है, तो यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है.
 


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