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स्पाइसजेट पर GST विभाग का शिकंजा, रद्द हो सकता है पंजीकरण; 124 करोड़ रुपये की टैक्स मांग
जीएसटी विभाग ने CGST/SGST अधिनियम, 2017 की धारा 62 के तहत कंपनी का प्रोविजनल असेसमेंट किया है. इस आकलन के आधार पर विभिन्न अवधियों के लिए कुल 124 करोड़ 65 लाख 87 हजार 156 रुपये की कर मांग निर्धारित की गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 24 minutes ago
निजी विमानन कंपनी स्पाइसजेट की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. जीएसटी रिटर्न समय पर दाखिल नहीं करने के आरोप में गुरुग्राम जीएसटी विभाग ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. यदि कंपनी जल्द ही लंबित रिटर्न दाखिल नहीं करती और वैधानिक दायित्वों का पालन नहीं करती, तो उसका जीएसटी पंजीकरण रद्द किया जा सकता है. विभाग ने कंपनी पर 124.65 करोड़ रुपये से अधिक की कर मांग भी निर्धारित की है.
GST विभाग ने शुरू की कार्रवाई
गुरुग्राम उत्तर राज्य क्षेत्राधिकार के अंतर्गत वस्तु एवं सेवा कर (GST) विभाग ने स्पाइसजेट के खिलाफ अनुपालन संबंधी कार्रवाई शुरू कर दी है. विभाग का आरोप है कि कंपनी लगातार जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में अनियमितता बरत रही थी और कई मामलों में रिटर्न तय समयसीमा के बाद जमा किए गए.
इसी के आधार पर विभाग ने कंपनी को जीएसटी पंजीकरण रद्द करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है. अधिकारियों का कहना है कि कर कानूनों के तहत निर्धारित दायित्वों का पालन नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
124 करोड़ रुपये से ज्यादा की टैक्स मांग
जीएसटी विभाग ने CGST/SGST अधिनियम, 2017 की धारा 62 के तहत कंपनी का प्रोविजनल असेसमेंट किया है. इस आकलन के आधार पर विभिन्न अवधियों के लिए कुल 124 करोड़ 65 लाख 87 हजार 156 रुपये की कर मांग निर्धारित की गई है.
विभाग के अनुसार, नवंबर महीने के लिए 44.44 करोड़ रुपये और दिसंबर के लिए 43.79 करोड़ रुपये की मांग तय की गई है. वहीं जनवरी के लिए 12.19 करोड़ रुपये, फरवरी के लिए 12.10 करोड़ रुपये और मार्च के लिए 12.12 करोड़ रुपये की कर देनदारी निर्धारित की गई है. इन सभी राशियों को मिलाकर कुल बकाया 124.65 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है.
25 मई को जारी हुआ था नोटिस
विभाग ने स्पाइसजेट को 25 मई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. नोटिस में कंपनी से पूछा गया था कि उसके खिलाफ जीएसटी पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई क्यों न की जाए. हालांकि विभाग का कहना है कि नोटिस जारी होने के बाद भी कंपनी की ओर से लंबित रिटर्न दाखिल नहीं किए गए हैं. इससे मामला और गंभीर हो गया है तथा नियामकीय कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है.
GST पंजीकरण रद्द होने पर क्या होगा असर?
जीएसटी पंजीकरण किसी भी कंपनी के लिए कारोबार संचालन का अहम हिस्सा होता है. इसके जरिए कंपनी टैक्स भुगतान, इनपुट टैक्स क्रेडिट और विभिन्न व्यावसायिक लेनदेन से जुड़े कानूनी दायित्वों को पूरा करती है.
यदि किसी कंपनी का जीएसटी पंजीकरण रद्द हो जाता है, तो उसके कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. विमानन क्षेत्र जैसी पूंजी-गहन इंडस्ट्री में ऐसी कार्रवाई कंपनी की वित्तीय स्थिति और कारोबारी गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है.
अब कंपनी के सामने क्या विकल्प?
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, स्पाइसजेट के पास अभी भी लंबित रिटर्न दाखिल कर स्थिति को सुधारने का अवसर है. यदि कंपनी जल्द ही आवश्यक अनुपालन पूरा करती है और कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करती है, तो आगे की सख्त कार्रवाई से बचा जा सकता है. फिलहाल निवेशकों और बाजार की नजर इस बात पर है कि कंपनी नोटिस का क्या जवाब देती है और लंबित कर मामलों को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है.
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