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सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ा दांव, 2035 तक 150 अरब डॉलर की वैल्यू चेन खड़ी करेगा भारत

रिपोर्ट के मुताबिक, अगले एक दशक में 135-180 अरब डॉलर के निवेश और मजबूत सरकारी समर्थन के दम पर देश न केवल अपनी चिप जरूरतों को पूरा कर सकता है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भी अहम भूमिका निभा सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 52 minutes ago

आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन, टेलीकॉम नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा उपकरणों से लेकर लगभग हर आधुनिक तकनीक की नींव सेमीकंडक्टर चिप्स पर टिकी है. ऐसे में भारत ने इस रणनीतिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में बड़ा लक्ष्य तय किया है. नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट ‘भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य’ देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में मजबूत स्थान दिलाने की व्यापक रणनीति पेश करती है. रिपोर्ट में वर्ष 2035 तक 120-150 अरब डॉलर की घरेलू सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है.

2035 तक बनेगा मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम

रिपोर्ट के अनुसार, भारत को केवल चिप उपभोक्ता या असेंबली हब बनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. इसके बजाय देश को डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और सप्लाई चेन के सभी महत्वपूर्ण चरणों में अपनी उपस्थिति मजबूत करनी होगी.

नीति आयोग का मानना है कि यदि भारत समय रहते आवश्यक निवेश और नीतिगत समर्थन सुनिश्चित करता है, तो वह वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है. इससे देश की तकनीकी क्षमता और आर्थिक प्रतिस्पर्धा दोनों को मजबूती मिलेगी.

200 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है घरेलू मांग

भारत में सेमीकंडक्टर की मांग तेजी से बढ़ रही है. रिपोर्ट का अनुमान है कि वर्ष 2035 तक देश में चिप्स की मांग 200 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है. वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 90-95 प्रतिशत सेमीकंडक्टर आयात करता है. इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है और वैश्विक सप्लाई चेन में किसी भी व्यवधान का सीधा असर भारतीय उद्योगों पर पड़ सकता है. इसलिए घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

180 अरब डॉलर तक निवेश की जरूरत

देश में विश्वस्तरीय सेमीकंडक्टर उद्योग विकसित करने के लिए भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होगी. रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दस वर्षों में 135 से 180 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत पड़ सकती है. इस निवेश का उपयोग चिप डिजाइन, वेफर फैब्रिकेशन, एडवांस पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास तथा आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण में किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत को वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थिति दिला सकता है.

सरकार की भूमिका होगी निर्णायक

नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार को कुल निवेश का कम से कम एक-तिहाई हिस्सा वहन करना चाहिए.

रिपोर्ट के अनुसार, यदि सरकार शुरुआती चरण में बुनियादी ढांचे और उत्पादन सुविधाओं के विकास में निवेश करती है, तो परियोजनाओं का जोखिम कम होगा और निजी कंपनियां दीर्घकालिक निवेश के लिए अधिक उत्साहित होंगी. इससे भारत में वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों को आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी.

तकनीकी संप्रभुता के लिए जरूरी है चिप निर्माण

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी के अनुसार, विकसित राष्ट्र बनने के लिए भारत को महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भर होना होगा. इसे तकनीकी संप्रभुता (Technology Sovereignty) का आधार माना जाता है.

आज AI, 5G नेटवर्क, रक्षा प्रणाली, ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य सेवाएं और डिजिटल अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा सेमीकंडक्टर पर निर्भर है. ऐसे में घरेलू चिप निर्माण क्षमता केवल आर्थिक अवसर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से भी जुड़ा विषय बन गया है.

वैश्विक बाजार में तेजी से बढ़ रही मांग

रिपोर्ट के अनुसार, 2014 से 2024 के बीच वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार की औसत वार्षिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही है. आने वाले वर्षों में इसके 8.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है. AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों और स्मार्ट डिवाइसेज की बढ़ती मांग से सेमीकंडक्टर उद्योग को नई गति मिल रही है. ऐसे में भारत के पास वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का बड़ा अवसर मौजूद है.

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?

यदि भारत 2035 तक अपने सेमीकंडक्टर लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रहता है, तो इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी बल्कि लाखों रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे. साथ ही देश वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
 


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