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कम हुए बैंक फ्रॉड के मामले, लेकिन ₹48 हजार करोड़ डूबे, सरकारी बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित: RBI
RBI के आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग सिस्टम में छोटे और डिजिटल फ्रॉड पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है. लेकिन बड़े कर्ज से जुड़े घोटाले अब भी सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
देश के बैंकिंग सेक्टर में धोखाधड़ी के मामलों की संख्या भले ही तेजी से घटी हो, लेकिन इन फ्रॉड से जुड़ी रकम लगातार बढ़ती जा रही है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों में कुल ₹48,021 करोड़ की धोखाधड़ी दर्ज की गई, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब छोटे डिजिटल फ्रॉड की जगह बड़े कर्ज और एडवांस से जुड़े घोटाले बैंकिंग सिस्टम पर भारी पड़ रहे हैं.
तीन साल में बदली तस्वीर
RBI के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में धोखाधड़ी के 10,114 मामले सामने आए, जबकि एक साल पहले यह संख्या 23,722 थी. यानी मामलों की संख्या में करीब 57 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं वित्त वर्ष 2023-24 के मुकाबले यह गिरावट लगभग 72 फीसदी रही.
हालांकि दूसरी तरफ फ्रॉड से जुड़ी रकम तेजी से बढ़ी है. 2024-25 में जहां यह रकम ₹32,803 करोड़ थी, वहीं 2025-26 में बढ़कर ₹48,021 करोड़ पहुंच गई. तीन साल पहले यह आंकड़ा केवल ₹11,013 करोड़ था. यानी तीन वर्षों में धोखाधड़ी की रकम चार गुना से ज्यादा बढ़ गई.
सरकारी बैंकों पर सबसे बड़ा असर
रिपोर्ट के अनुसार सरकारी बैंकों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा. वित्त वर्ष 2025-26 में पब्लिक सेक्टर बैंकों में फ्रॉड से जुड़ी रकम ₹35,709 करोड़ रही, जो पिछले साल की तुलना में 51 फीसदी ज्यादा है. कुल धोखाधड़ी राशि में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 74.5 फीसदी तक पहुंच गई. हालांकि इन बैंकों में मामलों की संख्या घटकर 5,418 रह गई, जो एक साल पहले 6,916 थी.
निजी बैंकों में भी बढ़ी फ्रॉड राशि
निजी बैंकों में भी फ्रॉड से जुड़ी रकम में बढ़ोतरी दर्ज की गई. यहां धोखाधड़ी की राशि बढ़कर ₹11,399 करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल यह ₹8,927 करोड़ थी. कुल मामलों में निजी बैंकों की हिस्सेदारी 39.1 फीसदी रही.
बड़े लोन फ्रॉड बने सबसे बड़ी चुनौती
RBI रिपोर्ट के मुताबिक अब सबसे बड़ा खतरा कर्ज और एडवांस से जुड़े फ्रॉड बन चुके हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में ऐसे मामलों की रकम बढ़कर ₹40,774 करोड़ पहुंच गई, जो कुल फ्रॉड राशि का करीब 85 फीसदी है.
इन मामलों की संख्या भी बढ़कर 8,640 हो गई, जबकि पिछले साल यह 7,924 थी. इससे साफ है कि बैंकिंग सिस्टम में बड़े कॉरपोरेट लोन और एडवांस से जुड़े जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं.
डिजिटल पेमेंट फ्रॉड में बड़ी राहत
एक सकारात्मक संकेत यह रहा कि कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़े फ्रॉड मामलों में भारी गिरावट आई है. ऐसे मामलों की संख्या घटकर केवल 293 रह गई, जबकि पिछले साल यह 13,332 थी. इन मामलों में शामिल रकम भी ₹517 करोड़ से घटकर सिर्फ ₹29 करोड़ रह गई.
वित्त वर्ष 2023-24 में डिजिटल फ्रॉड कुल मामलों का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा थे, लेकिन अब इनकी हिस्सेदारी घटकर केवल 2.9 फीसदी रह गई है.
अन्य कैटेगरी में भी बदलाव
जमा यानी डिपॉजिट से जुड़े फ्रॉड मामलों की रकम घटकर ₹377 करोड़ रह गई. वहीं “अन्य” कैटेगरी में धोखाधड़ी की राशि तेजी से बढ़कर ₹6,063 करोड़ पहुंच गई, जो पिछले साल केवल ₹971 करोड़ थी.
RBI रिपोर्ट से क्या संकेत मिलते हैं?
RBI के आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग सिस्टम में छोटे और डिजिटल फ्रॉड पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है. लेकिन बड़े कर्ज से जुड़े घोटाले अब भी सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं. खासतौर पर सरकारी बैंकों पर इसका सबसे ज्यादा असर दिखाई दे रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बैंकों को बड़े कॉरपोरेट लोन की निगरानी, जोखिम मूल्यांकन और रिकवरी सिस्टम को और मजबूत करना होगा, ताकि हजारों करोड़ रुपये के ऐसे फ्रॉड पर लगाम लगाई जा सके.
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