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रोजगार को लेकर बढ़ी चिंता, फिर भी दुनिया का सबसे भरोसेमंद कंज्यूमर मार्केट बना भारत: रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में भारत ने लगातार सबसे ऊंचा कंज्यूमर कॉन्फिडेंस स्कोर दर्ज किया. भारत का नेशनल इंडेक्स स्कोर मई में 0.4 अंक बढ़कर 66.6 पर पहुंच गया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 hours ago
वैश्विक अनिश्चितताओं और रोजगार को लेकर बढ़ती चिंताओं के बावजूद भारत दुनिया का सबसे भरोसेमंद कंज्यूमर मार्केट बना हुआ है. एलएसईजी-इप्सोस प्राइमरी कंज्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स (PCSI) की ताजा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में भारत ने लगातार सबसे ऊंचा कंज्यूमर कॉन्फिडेंस स्कोर दर्ज किया. भारत का नेशनल इंडेक्स स्कोर मई में 0.4 अंक बढ़कर 66.6 पर पहुंच गया. सर्वे में शामिल 30 देशों में भारत सबसे आगे रहा और 60 अंक के स्तर को पार करने वाला इकलौता देश बना.
मलेशिया और इंडोनेशिया भी पीछे
रिपोर्ट के अनुसार मलेशिया और इंडोनेशिया का स्कोर 56.7 रहा, जबकि स्वीडन 55.4 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा. ब्राजील का स्कोर 52.3 और मेक्सिको का 51 रहा. वहीं फ्रांस, जापान और तुर्किये सबसे कमजोर बाजारों में शामिल रहे. इन देशों का स्कोर क्रमशः 39.3, 37.8 और 35.6 दर्ज किया गया.
वित्तीय स्थिति और निवेश भरोसे ने बढ़ाया कॉन्फिडेंस
PCSI सर्वे चार प्रमुख संकेतकों पर आधारित होता है. इनमें व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, आर्थिक उम्मीदें, रोजगार और निवेश से जुड़ा भरोसा शामिल है. भारत में कंज्यूमर सेंटिमेंट को सबसे ज्यादा मजबूती व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति और निवेश भरोसे से मिली. करंट पर्सनल फाइनेंशियल कंडीशंस सब-इंडेक्स में 1.2 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि निवेश सब-इंडेक्स 1.7 अंक बढ़ा. आर्थिक उम्मीदों वाला इंडेक्स लगभग स्थिर रहा और इसमें सिर्फ 0.1 अंक की बढ़त हुई. हालांकि रोजगार से जुड़ा सब-इंडेक्स 1.5 अंक गिर गया, जिससे नौकरी को लेकर बढ़ती चिंता साफ दिखाई दी.
AI और कॉस्ट कटिंग से बढ़ी नौकरी की चिंता
इप्सोस इंडिया के CEO सुरेश रामलिंगम ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित बदलाव और कंपनियों की कॉस्ट कटिंग के कारण भारतीयों में नौकरी को लेकर तनाव बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बाद कंपनियां खर्च घटाने पर जोर दे रही हैं, जिसका असर रोजगार के माहौल पर पड़ रहा है.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके बावजूद लोग अपनी वित्तीय स्थिति, निवेश और भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर अब भी सकारात्मक बने हुए हैं.
सरकार के कदमों से बना भरोसा
रामलिंगम के मुताबिक सरकार ने बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव, पश्चिम एशिया संघर्ष और रुपये की कमजोरी जैसे बाहरी दबावों से लोगों को बचाने के लिए सावधानीपूर्ण कदम उठाए हैं. इसी वजह से उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत बना हुआ है.
हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि सर्वे के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी आने वाले महीनों में घरेलू बजट और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है.
21 हजार से ज्यादा लोगों पर हुआ सर्वे
यह सर्वे 24 अप्रैल से 8 मई 2026 के बीच इप्सोस के ग्लोबल एडवाइजर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए किया गया. इसमें दुनिया भर के 75 वर्ष से कम उम्र के 21 हजार से ज्यादा वयस्क शामिल हुए. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अप्रैल 2026 से भारत में सर्वे का तरीका बदला गया है. अब पूरी तरह ऑनलाइन इंटरव्यू किए जा रहे हैं, जबकि पहले इसमें आमने-सामने इंटरव्यू भी शामिल थे.
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