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क्या है Digital Arrest जिसको लेकर PM Modi ने जताई चिंता, कैसे इससे बचा जा सकता है?
ऑनलाइन फ्रॉड के खतरे के बीच आजकल डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं जिसमें लोग मिनटों में अपनी जीवन की जमा-पूंजी गंवा दे रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए आए दिन लोगों को करोड़ों रुपये की चपत लगाई जा रही है, जिसके चलते साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स लगातार लोगों को सावधान रहने की सलाह देते हैं. इन डिजिटल फ्रॉड करने वाले अपराधियों ने नया तरीका डिजिटल अरेस्ट का निकाला है, जिसमें ये अधिकारी बनकर भोले-भाले लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर लेते हैं और फिर उन्हें अलग-अलग तरह के डर दिखाकर उनसे लाखों करोड़ रुपये वसूल लेते हैं. इसको लेकर अब पीएम मोदी ने भी अब चिंता जताई है, और लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है.
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई. पीएम ने इससे बचने के लिए ‘रुको, सोचो और एक्शन लो’ का मंत्र साझा किया. इसके अलावा पीएम ने लोगों से इस संबंध में अधिक से अधिक जागरूक बनने और जागरूकता फैलाने का आह्वान भी किया. पीएम मोदी ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े एक फरेबी और पीड़ित के बीच बातचीत का वीडियो भी साझा किया. पीएम ने कहा कि कोई एजेंसी न तो धमकी देती है और न ही वीडियो कॉल पर पूछताछ करती है. न ही पैसों की मांग करती है. पीएम ने दर्शकों को विस्तार से बताया कि इस प्रकार के फरेब करने वाले गिरोह कैसे काम करते हैं और कैसे खतरनाक खेल के अंजाम तक पहुंचाते हैं.
क्या है Digital Arrest?
डिजिटल अरेस्ट एक ऑनलाइन घोटाला है, सरकारी एजेंसियां आधिकारिक संवाद के लिए वाट्सएप या स्काइप जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करतीं। यदि कोई इस तरीके से आपसे संपर्क करता है तो उसकी हकीकत जानने के लिए संबंधित एजेंसी से सीधे संपर्क करें.
डिजिटल अरेस्ट में फोन कॉल, ईमेल और मैसेज के जरिये धमकी दी जाती है. पीड़ित को गैरकानूनी गतिविधियों की जांच चलने, पहचान से जुड़े दस्तावेज चोरी होने या फिर मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाया जाता है. साइबर धोखेबाज गिरफ्तार करने या कानूनी नतीजे भुगतने की धमकी देकर पीड़ित को सोचने का मौका नहीं देते हैं. धोखेबाज केस से नाम हटाने या जांच में सहयोग करने की बात करते हैं और रिफंडेबल रकम जमा करने के नाम पर किसी विशेष खाते या यूपीआई आईडी में बड़ी रकम हस्तांतरित करवा लेते हैं.
Digital Arrest के 46 प्रतिशत तक बढ़े मामले
जनवरी से अप्रैल तक के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आईसी) ने पाया कि डिजिटल अरेस्ट के अपराध के तहत दर्ज साइबर धोखाधड़ी के 46% मामले सामने आए हैं. इसमें 1,776 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, इनमें से ज्यादातर मामले म्यांमार, लाओस और कंबोडिया से ही फ्रॉड वाले थे. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल 1 जनवरी से 30 अप्रैल के बीच 7.4 लाख शिकायतें दर्ज की गईं, जबकि 2023 में कुल 15.56 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं. 2022 में कुल 9.66 लाख शिकायतें दर्ज की गईं.
Digital Arrest से कैसे बचे, क्या करें, क्या न करें?
• साइबर अपराधी संपर्क करें तो जल्दबाजी न करे, न ही डरें.
• कुछ भी करने से पहले शांति से थोड़ा सोचें.
• कोई भी निजी या व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी अनजान नंबर से आये फोन या वीडियो कॉल पर साझा न करें.
• दबाव में पैसा हस्तांतरित न करें, असली कानूनी प्रवर्तन एजेंसियां कभी तुरंत पैसा भेजने का दबाव नहीं डालती.
• कोई फोन पर या इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म से सीधे पैसा मांगे तो यह सीधे तौर पर घोटाला हो सकता है.
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