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आखिर ऐसा क्या हुआ कि 6 Airbags पर नितिन गडकरी को लेना पड़ गया यू-टर्न?

पिछले साल नितिन गडकरी ने साफ कहा था कि सरकार सभी कारों के लिए छह एयरबैग अनिवार्य करने जा रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

सड़कों पर दौड़तीं कारों को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए छह एयरबैग (6 Airbags) अनिवार्य करने की बात चल रही थी. पिछले साल केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि कार निर्माता कंपनियों को सेफ्टी को लेकर गंभीर होना पड़ेगा. सरकार हर कार में छह एयरबैग अनिवार्य करने जा रही है. हालांकि, अब उन्होंने इस मामले में यू-टर्न ले लिया है. कल तक इस मुद्दे पर सख्ती दिखा रहे गडकरी अब नरम पड़ गए हैं. उनका कहना है कि यह पूरी तरह से कंपनियों पर है कि वो 6-एयरबैग लगाती हैं या नहीं. 

अक्टूबर में होना था लागू
नितिन गडकरी के इस रुख के बाद यह सवाल लाजमी हो जाता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि कल तक सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी नजर आ रहे छह एयरबैग अब वैकल्पिक हो गए हैं? पिछले साल टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के बाद कारों को ज्यादा सुरक्षित बनाने की मुहिम शुरू हुई थी. उसी दौरान गडकरी ने सभी कारों में छह एयरबैग अनिवार्य करने की बात कही थी. हालांकि, कंपनियों के विरोध के चलते डेडलाइन आगे बढ़ा दी गई. इस साल अक्टूबर में छह एयरबैग का नियम अमल में आना था, लेकिन अब वो ठंडे बस्ते में चला गया है. 

रोड सेफ्टी स्टैंडर्ड में इजाफा 
जानकार मानते हैं कि गडकरी ने इस मुद्दे पर यू-टर्न लेने की कई वजह हैं. सबसे पहली तो यही है कि Bharat NCAP यानी न्यू कार एसेसमेंट प्रोग्राम के 1 अक्टूबर से लागू होने के बाद कारों के रोड सेफ्टी स्टैंडर्ड में इजाफा की उम्मीद है. इस प्रोग्राम में कार के क्रैश सहित विभिन्न टेस्टों के आधार पर उसकी स्टार रेटिंग तय की जाएगी. इसमें एडल्ट और चाइल्ड के हिसाब से 0 से लेकर 5 तक स्टार रेटिंग मिलेगी. ऐसे में जिस कंपनी को अपनी कार के लिए बेहतर सेफ्टी रेटिंग चाहिए, उसको अपनी गाड़ी में सेफ्टी फीचर भी ज्यादा देने पड़ेंगे और छह एयरबैग भी इसमें शामिल है. शायद इसलिए सरकार ने छह एयरबैग को अनिवार्य नहीं बनाया. 

कंपनियों ने किया था विरोध
इसके अलावा, कंपनियों का विरोध और चुनावी मौसम भी एक बड़ी वजह हो सकती है. ऑटो कंपनियां लगातार इसका विरोध करती आ रही हैं. मारुति से लेकर लगभग सभी कार कंपनियां कह चुकी हैं कि हर कार में छह एयरबैग देना संभव नहीं है, क्योंकि इससे कार की कॉस्ट बढ़ जायेगी. कारों के महंगा होने से उनकी बिक्री पर भी असर पड़ेगा. कंपनियों का कहना था कि छोटी कारों में भी 6-एयरबैग लगाने के लिए उसके स्ट्रक्चर में चेंज करना पड़ेगा. जिससे इन्वेस्टमेंट काफी बढ़ जाएगा और कार की कॉस्ट भी बढ़ जाएगी.

सरकार को होगी ये आशंका 
सरकार को इस बात की भी आशंका रही होगी कि कंपनियों पर जबरन छह एयरबैग का फैसला थोपने का कहीं उसे चुनाव में नुकसान न उठाना पड़ जाए. कार निर्माताओं ने जिस तरह का रुख इस घोषणा के तुरंत बाद अख्तियार किया था, उससे साफ था कि वो किसी भी सूरत में छह एयरबैग के लिए तैयार नहीं हैं. मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आरसी भार्गव ने पिछले साल जून में कहा था कि सरकार की छह एयरबैग की नीति का असर छोटी कारों पर पड़ेगा. ऐसे में कंपनी उन्हें बंद करने में कोई संकोच नहीं करेगी. कुल मिलाकर कारण चाहे जो भी रहा, लेकिन मारुति जैसी कंपनियां इससे बेहद खुश होंगी कि रोड सेफ्टी को लेकर गडकरी को अपने कदम वापस खींचने पड़े हैं. 
 


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