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Tesla को चाहिए भारत में एंट्री, मोदी सरकार ने लगाया नो एंट्री का बोर्ड!

टेस्ला के CEO Elon Musk ने भारत की बहुत ज्यादा इम्पोर्ट ड्यूटीज और देश की इलेक्ट्रिक वाहनों की पॉलिसी की आलोचना की थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल और निर्माण को लेकर भारत बहुत ही तेजी से आगे बढ़ रहा है. बहुत सी स्वदेशी और विदेशी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियां तेजी से बढ़ती भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन मार्केट में अपनी मौजूदगी को बढ़ाने के बारे में भी विचार कर रही हैं. इसी बीच ऐसी मीडिया रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि विश्व की प्रमुख इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला (Tesla) के वरिष्ठ अधिकारियों का एक ग्रुप अगले हफ्ते भारत आ सकता है. 

क्या है मुलाकात का असली मुद्दा?
दरअसल टेस्ला के वरिष्ठ अधिकारियों का यह ग्रुप भारत में अगले हफ्ते सरकारी अधिकारियों से मिलने आ रहा है. माना जा रहा है कि टेस्ला, चीन के अलावा अन्य देशों में भी अपनी मौजूदगी को बढ़ाना चाहती है और भारत में अपनी सप्लाई चेन को विस्तृत बनाने के लिए ही कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों का यह ग्रुप भारत आ रहा है. मामले से जुड़े लोगों ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया है कि कंपनी के अधिकारी सरकारी प्रतिनिधियों के साथ-साथ PMO के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे. अधिकारियों और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच होने वाली इस मुलाकात का सबसे प्रमुख मुद्दा टेस्ला के मॉडल्स को बनाने के लिए आवश्यक सामानों को देश में ही उपलब्ध करवाने के बारे में होगा.  

भारत और टेस्ला का रिश्ता
टेस्ला के CEO Elon Musk ने भारत की बहुत ज्यादा इम्पोर्ट ड्यूटीज और देश की इलेक्ट्रिक वाहनों की पॉलिसी की आलोचना की थी और जवाब में भारत ने टेस्ला को सुझाव दिया था कि वह भारत में कार न बेचें, क्योंकि उनकी कारें चीन में बनायी जाती हैं और चीन भारत का राजनीतिक विरोधी है. इस नोक-झोंक के बाद भारत और टेस्ला के बीच होने वाली यह मुलाकात कंपनी और देश के रिश्तों के लिए काफी अच्छी मानी जा रही है. 

ऐसे बेहतर हो सकते हैं रिश्ते
टेस्ला के वरिष्ठ अधिकारियों के इस ग्रुप में C-सुइट के एग्जीक्यूटिव्स और Texas आधारित टेस्ला की सप्लाई चेन ऑस्टिन के मैनेजर्स भी शामिल होंगे. माना जा रहा है कि यह एग्जीक्यूटिव्स भारत सरकार से फिर से अनुरोध कर सकते हैं कि वह टेस्ला के वाहनों पर इम्पोर्ट टैक्सों में कमी करें. भारत से सोर्सिंग करके टेस्ला, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दिल जीत सकती है. दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहते हैं. अभी तक मोदी सरकार और टेस्ला के संबंधों में उतार चढ़ाव ही देखने को मिला है क्योंकि चीन और भारत बहुत लंबे समय से बॉर्डर को लेकर विवाद में उलझे हुए हैं. 
 

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