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आने वाले सालों में मार्केट से बाहर हो जाएंगी कई एंट्री लेवल गाड़ियां : FADA Preseident

आज US में 1000 लोगों पर 980 लोगों पर गाड़ियां हैं और भारत में प्रति हजार लोगों पर 28 कार है. मैं लग्जरीनेस की बात नहीं कर रहा हूं बल्कि भारत में कार एक आवश्यकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

अगले साल से कई कार कंपनियां अपनी गाड़ियों की कीमत बढ़ाने का ऐलान कर चुकी है. माना जा रहा है कि नई तकनीकों के आने के बाद गाड़ियों की कीमत में इजाफा होने जा रहा है लेकिन सवाल ये है कि आखिर अगले साल से कौन- कौन सी नई तकनीक आने जा रही हैं जिसके कारण ऐसा हो रहा है सवाल ये भी है कि आखिर गाड़ियों के दामों मे कितना इजाफा होने जा रहा है. इन सभी मसलों को लेकर Business World Hindi के  Principle Correspondent ललित नारायण कांडपाल ने FADA (फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन) के प्रेसीडेंट मनीष राज सिंघानिया से बात की. पेश है उनके साथ हुई बातचीत,  जिसमें वो बता रहे हैं कि आने वाले समय में कई एंट्री लेवल गाड़ियां  खत्‍म हो जाएंगी. 

सवाल- सर कई सारी नई तकनीकों के आने के बाद माना जा रहा है कि गाड़ियों के दामों में इजाफा हो सकता है इसे लेकर आपका क्या मानना है ?
जवाब- देखिए इसमें दो चीजें बहुत ही महत्वपूर्ण आने वाली हैं. इसमें एक तो BS 6.2 आ रहा है और साथ ही ऑनबोर्ड डायग्नोस्टिक नॉर्म्‍स आने जा रहे हैं और साथ ही साथ केंद्र सरकार एक बात पर और भी जोर दे रही है कि गाड़ियों में छ: एयरबैग होने चाहिए. अगर ये सारे नियम आते हैं तो निश्चित तौर पर गाड़ियों के दाम और बढ़ेंगें. अगर  नए गैजेट्स नई टेक्नोलॉजी आएंगी तो इससे कस्टमर की सेफ्टी जरूर बढ़ती है, लेकिन इसके साथ-साथ ग्राहक को इसकी कीमत भी अदा करनी पड़ेगी. इससे गाड़ियां बहुत महंगी हो जाएंगी और कुछ गाड़ियां ऐसी भी रहेंगी जो आगे बंद भी हो जाए.  लग ऐसा रहा है कि कोई 16- 17 मॉडल आने वाले समय में बंद भी हो जाएंगे, क्योंकि ये उन नॉर्म्स के साथ नहीं आ पाएंगी और जो इन नॉर्म्स के साथ नहीं आ पाएंगी वो बंद हो जाएंगी.

सवाल- सर मुझे ये बताइए कि आखिर आपने जिस ऑनबोर्ड टेक्नोलॉजी का जिक्र किया है यह किस तरह की टेक्नोलॉजी है और इससे एक आम आदमी को क्या फायदा होगा?
जवाब- ऑनबोर्ड डायग्नोस्टिक नॉर्म्‍स का मतलब होता है कि रियल टाइम में आपको दिखेगा कि अभी गाड़ी किस लेवल का प्रदूषण कर रही है वह आपको रियल टाइम पर दिख जाएगा. BS 6.2 वर्जन में गाड़ियों में एडिशनल सेंसर लगे होंगे. इससे क्या होगा कि जो नाइट्रोजन डाइऑक्साइड है और पार्टिकुलेट मैटर जितने भी रहते हैं आज भी BS 6 गाड़ियां जो प्रदूषण कर रही हैं उसमें पार्टिकल्स की जो एक अपर लिमिट है, उसको ये गाड़ियां और फरदर कम कर देंगी और आज की जो BS 6 सिक्स गाड़ियां हैं यह उससे भी कम प्रदूषण करेंगी.

सवाल- सर आपने कहा कि इन तकनीकों के आने के बाद कई तरह की एंट्री लेवल गाड़ियां बंद हो जाएंगी तो थोड़ा उसके बारे में बताइए आखिर यह कौन-कौन सी गाड़ियां हैं जो इस तकनीक को अडॉप्ट नहीं कर पाएंगी?
जवाब- इसमें अलग-अलग कैटेगरी की गाड़ियां हैं. जब गाड़ियां BS 4 से BS 6 में आई तो कुछ मॉडल उस वक्त बंद हो गए. जब हम बीएस 6 से 6.2 में जा रहे हैं या ओबीडी नॉर्म्स के साथ जा रहे हैं उस वक्त भी कुछ मॉडल बंद हो जाएंगे और अगर सिक्स एयरबैग का कंप्‍लाइंस आता है तो उस समय भी कुछ ऐसे मॉडल बंद हो जाएंगे. सिर्फ एयर बैग ही लगने चाहिए बल्कि गाड़ी में इतनी ताकत रहनी चाहिए. गाड़ी में जो स्टील रहता है वह एक अच्छी क्वालिटी का स्टील रहना चाहिए कि जब एयर बैग खुलें तो उससे पहले स्टील की जो बॉडी रहती है, पहले वह प्रोटेक्‍ट करे उसके बाद एयरबैग आपको प्रोटेक्ट करेगा. अगर बॉडी ही पूरी कॉलएप्स हो जाएगी तो फिर एयरबैग कैसे प्रोटेक्ट करेगा.कई ऐसी गाड़ियां हैं जो क्रैश टेस्ट को क्वालीफाई नहीं कर पाती हैं और उनकी रेटिंग काफी कम है. ऐसी गाड़ियों में अगर आप एयर बैग लगाते भी हैं तो उनका कोई फायदा नहीं है. 

सवाल- सर जो लोग सस्ती गाड़ियां देख रहे हैं उनके लिए क्या विकल्प रहेगा?
जवाब- मुझे लगता है कि entry-level तो आने वाले समय में यह खत्म ही हो जाएगा. आज हम लोग जो 4-6 लाख की गाड़ी ढूंढ़ते हैं कुछ सालों में अगर आप देखेंगे तो सब गाड़ियों की स्टार्टिंग ही छ: से सात लाख हो जाएगी. लेकिन अगर फाइनेंस रेट कम होते हैं. आज जो कंपनियां 5 साल की किस्त दे रही हैं आगे चलकर वह 7 साल या 10 साल की किस्त देना शुरू कर दें तो एंट्री लेवल सेगमेंट का रिवाइवल हो सकता है. जिस आदमी को आज 5 साल के लिए लोन मिल रहा है अगर उसी में ये तकनीक आएंगी तो महंगी हो जाएंगी. अगर वह 8 साल के लिए हो जाती है और आने वाले समय में ब्याज दरें कम होती हैं और लोन अवधि बढ़ जाती है तभी गाड़िया उसकी किस्‍त में आ पाएंगी.

एक परिवार में एक गाड़ी को एक परिवार के 5 लोग इस्तेमाल करते हैं अलग-अलग उद्देश्य के लिए बहुत ही निहायती जरूरत की चीज है. हमारे वहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट बहुत ज्यादा अच्‍छा नहीं है. इन सब चीजों को देखते हुए सरकार को भी कुछ ऐसे प्रयास करते रहने चाहिए जिससे गाड़ी अफॉर्डेबल बनी रहे. गाड़ियों पर लगने वाला जीएसटी जो आज 28% है उसे अगर सरकार 18% कर दे तो गाड़ियां मिडिल क्‍लास  की रेंज में आ जाएंगी. आज आपको 500000 की कार पर 28 परसेंट जीएसटी लग रहा है अगर गाड़ी की कीमत ₹800000 हुई तो और आपको 18 परसेंट जीएसटी लगे तो सरकार के पास जीएसटी ऊपर ही आएगा या थोड़ा ही वेरी होगा. यह जरूरी है कि गाड़ी आज एक जरूरत है हमारी मोबिलिटी के लिए एक बहुत ही आवश्यक साधन है.


सवाल- कार के दामों में कितना इजाफा हो सकता है?
जवाब- मैं अभी इस स्थिति में नहीं हूं कि आपको यह बता सकूं कि कितने प्रतिशत दाम बढ़ सकते हैं. यह कई चीजों पर निर्भर करेगा. पेट्रोल, गाड़ियों में इसका अलग असर रहेगा, डीजल गाड़ियों में इसका अलग असर रहेगा और यह कंपनी टू कंपनी भी डिपेंड करेगा, जिनके पास टेक्नोलॉजी अवलेबल है वह आसानी से bs6 से भी 6.2 में चले जाएंगे.

जिन्‍हें टेक्नोलॉजी खरीदनी पड़ेगी उनकी गाड़ियां महंगी हो सकती हैं. इसकी अभी स्थिति साफ नहीं है की गाड़ियों के दाम कितने बढ़ेंगे. लेकिन यह निश्चित है कि प्राइस बढ़ेंगे. मैं तो ये कहना चाहूंगा कि गाड़ी खरीदने के लिए दिसंबर से बेहतर महीना कोई नहीं है. मुझे लगता है कि गाड़ियों के दाम 5 से 10% तक दाम बढ़ सकते हैं.


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