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बड़े-बड़े वादे करना इस अरबपति को पड़ा भारी, ढह गया दौलत का पहाड़

अरबपति के शिक्षण संस्थान ने फेल होने पर 100% फीस वापस करने का वादा किया था. परीक्षा में अधिकांश उम्मीदवार फेल हो गए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

बड़े-बड़े वादे कभी इतने भारी पड़ जाते हैं कि व्यक्ति अर्श से सीधा फर्श पर आ गिरता है. चीन के एक अरबपति के साथ भी यही हुआ. दरअसल, ये अरबपति एक शिक्षण संस्थान चलाता है. उसने सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा में सफल होने की गारंटी दी थी. साथ ही यह वादा भी किया था कि परीक्षा में पास नहीं होने पर विद्यार्थियों को 100% फीस वापसी की जाएगी. परीक्षा हुई और अधिकांश उम्मीदवार फेल हो गए. इसके बाद शिक्षण संस्थान के बाहर अपनी पूरी फीस वापस लेने वालों की लाइन लग गई. अब वादा निभाने में अरबपति कारोबारी के पसीने छूट रहे हैं.  

20 अरब डॉलर गंवाएं
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के शिक्षण तकनीकी फर्म ‘ऑफसीएन एजुकेशन टेक्नोलॉजी’ के संस्थापक मां-बेटे लू झोंगफांग और ली जोंगजिन 21 अरब डॉलर के मालिक थे, लेकिन बड़े-बड़े वादे करने के चक्कर में कंगाल हो चुके हैं. अपना बिजनेस मॉडल बिखरने की वजह से दोनों 20 अरब डॉलर गंवा चुके हैं. यह केस चीन ही नहीं बल्कि सभी शिक्षण संस्थानों और कारोबारियों के लिए एक सबक की तरह है कि अति आत्मविश्वास में जरूरत से ज्यादा बड़े वादे करना नुकसानदायक साबित हो सकता है. 

कोरोना ने बिगाड़ा खेल 
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन में नवंबर 2019 में 10 लाख उम्मीदवारों ने 24 हजार पदों के लिए परीक्षा दी थी. तीन साल बाद 37 हजार पदों के लिए परीक्षा देने वालों की संख्या बढ़कर 26 लाख हो गई. ली जोंगजिन के संस्थान ने बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी करवाई, लेकिन कोरोना उनके लिए एक बुरे सपने की तरह आया. परीक्षा में पास होने वाले बच्चों की संख्या कम और फेल होने वालों की संख्या एकदम से बढ़ गई. अब चूंकि 100% फीस वापसी का वादा किया था, संस्थान को वादा निभाना पड़ा.   

शेयर बाजार में भी झटका
2019 में औसत फीस वापसी दर 44% थी, जो 2022 तक बढ़कर 70% हो गई. इस बीच कंपनी के शेयरों में 87 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई. इससे कंपनी की हालत और बिगड़ गई. लू झोंगफांग और ली जोंगजिन अब तक 20 अरब डॉलर गंवा चुके हैं. बता दें कि चीन में पुलिस अधिकारी, या आयकर अधिकारी जैसे पदों पर भर्ती प्रक्रिया बेहद कठिन है. इसके लिए डिग्री के साथ राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा से गुजरना पड़ता है, जिसकी सफलता दर 1.5 प्रतिशत से भी कम है,


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