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नीतीश का मोबाइल ज्ञान आपको कर देगा हैरान, बोले - दुनिया खत्म हो जाएगी
मोबाइल से दूर रहते हैं बिहार के CM नीतीश कुमार, वजह जान आप पकड़ लेंगे सिर
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का मानना है कि मोबाइल से धरती खत्म हो सकती है. लोकसभा चुनाव के बांका में प्रचार के लिए पहुंचे नीतीश ने कहा कि मोबाइल देखना छोड़ देना चाहिए, क्योंकि इसके कारण सौ साल में धरती खत्म हो जाएगी. दरअसल, प्रचार कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार की नजर मोबाइल चला रहे राज्यसभा सांसद संजय झा पर गई, इसके बाद उन्होंने मोबाइल को लेकर बोलना शुरू कर दिया. CM ने कहा झा की ओर इशारा करते हुए कहा कि देखिए ये भी हमेशा अपना मोबाइल देखते रहते हैं, पहले नहीं देखते थे, अब खूब देखते हैं.
इसलिए छोड़ दिया देखना
नीतीश कुमार ने मोबाइल से दूरी बनाने की वजह भी बताई. उन्होंने कहा कि मैं तो यह बात पहले भी बता चुका हूं, लेकिन इस बात को समझिए कि मोबाइल के कारण 100 साल में धरती खत्म हो जाएगी. पहले तो हम भी खूब देखते थे, 2019 में हमको पता चला कि सौ साल के अंदर धरती खत्म हो जाएगी, तब से हमने इसे देखना बंद कर दिया है. हालांकि, बाद में उन्होंने हंसते कहा कि मैं मजाक कर रहा हूं, लेकिन क्या कीजिएगा. जब पॉपुलर है तो आजकल देखिएगा ही.
अभी नहीं होगा...बाद में होगा
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पहले तो हम भी खूब देखते थे, लेकिन हमको लगा कि ये तो खराब चीज है, तो छोड़ दिए. हम सबको बोलते रहते हैं, लेकिन हमारी बात लोग सुनते नहीं है. खैर ठीक है, अभी उम्र ही ऐसी है. अभी उसके चलते कुछ नहीं होना है, लेकिन बाद में होगा. इसमें कोई दोराय नहीं है कि आजकल मोबाइल का इस्तेमाल काफी ज्यादा बढ़ गया है. लोगों का स्क्रीन टाइम पिछले कुछ वक्त से तेजी से बढ़ रहा है. इसकी वजह से कई तरह के दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं. हालांकि, मोबाइल से धरती खत्म होने का नीतीश कुमार का लॉजिक कुछ अलग ही है.
इस तरह बीमार बन रहे लोग
वहीं, मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से बीमारियों की बात करें, तो एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्मार्टफोन पर पोस्ट को देखते और स्क्रॉल करते वक्त सिर और गर्दन को झुकाकर रखना सेहत के लिए नुकसानदायक है. ऐसा करने से गर्दन पर काफी प्रेशर पड़ता है. इससे गर्दन की मांसपेशियों में सूजन और जलन होने लगती है. इस अवस्था को टेक्स्ट नेक कहते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) हद से ज्यादा ऑनलाइन गेम खेलने को भी एक मानसिक बीमारी के रूप में स्वीकार कर चुका है. गेम खेलने वाले करीब 10 प्रतिशत लोग गेमिंग डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं. मोबाइल की लत लोगों में इस कदर बढ़ गई है कि एक सर्वे के मुताबिक 53 प्रतिशत लोग मोबाइल फोन इस्तेमाल न करने पर बेचैन होने लगते हैं. इसके चलते उन्हें पैनिक अटैक भी आ सकता है.
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