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FCI के इस फैसले के बाद गेहूं के दामों में हुई कमी, 9 प्रतिशत तक गिरे दाम 

सरकार के इस कदम के बाद माना जा रहा है कि आने वाले 10 दिनों में आटे के दामों में कमी हो सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

गेहूं के दामों में हुए इजाफे के बाद बीते लंबे समय से लोगों को आटे के बढ़े दामों का सामना करना पड़ रहा है. आटे के दामों में हुआ ये इजाफा बीते लंबे समय से देखने को मिल रहा है. लेकिन अब माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आटे के दामों में कमी देखने को मिलेगी. दरअसल FCI की ओर से एक ऐसा कदम उठाया गया है, जिसके बाद गेहूं के दामों में एक दिन में 9 प्रतिशत तक की कमी हो गई.

 
आखिर FCI ने क्‍या उठाया कदम 
दरअसल FCI ने जैसे ही गेहूं बेचने के लिए टेंडर जारी किया तो उसके बाद दिल्ली में गेहूं की कीमतों में एक दिन में 6-9% की गिरावट आ गई. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने कहा कि गेहूं के आटे (आटे) की कीमतों में 10 दिनों में गिरावट आने की उम्मीद है. केंद्र सरकार और व्यापारियों को उम्मीद है कि टेंडर प्रक्रिया खत्म होने के बाद चारों मिलों में गेहूं पहुंचने से कीमतों में और गिरावट आएगी. इस बीच, एक अन्‍य अधिकारी ने कहा है कि आने वाले समय में भारत को 2023 में 10 लाख टन अरहर आयात करने की आवश्यकता होगी.


गेहूं के दामों में इजाफे से आटा हो गया था महंगा 
पिछले कुछ समय से बाजार में आटे के दामों में इजाफा देखने को मिल रहा है. हालांकि सरकार के पास गेहूं की कमी नहीं है लेकिन बावजूद उसके सभी तरह के आटे के दामों में इजाफा देखने को मिल रहा था. आटे के दामों में हुए इस इजाफे के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. इस महंगाई का सामना हर तरह के आटे में देखने को मिल रहा था. 

गेहूं के दामों में हुआ इजाफा 
अब आपको बताते हैं कि आखिर गेहूं के दामों में इजाफा हुआ क्‍यों था. दरअसल सरकार की ओर से इशारा दिया गया था कि आटे के दामों में कमी के लिए ओपेन मार्केट में 2 से 3 मिलियन टन गेहूं आटा मिल मालिकों से लेकर आटे का इस्‍तेमाल करने वाले दूसरे उद्योगों को दिया जाएगा. इनमें बिस्कुट बनाने वाली कंपनियों से लेकर दूसरे उद्योग शामिल थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 23 जनवरी 2023 को देश के कुछ राज्‍यों में गेहूं के दाम रिकॉर्ड 29,375 रुपये प्रति टन तक जा पहुंचे थे. अकेले जनवरी में गेहूं के दामों में 6 प्रतिशत तक का इजाफा देखने को मिल रहा था. दराअसल ये इजाफा सरकार की ओर से गेहूं जारी न किए जाने के कारण हो रहा था. लेकिन अब सरकार ने गेहूं जारी करने का फैसला जैसे ही लिया तो बाजार में इसके दामों में कमी आनी शुरू हो गई है.
 


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