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सरकार ने दी बड़ी खुशखबरी, चुनाव के बीच देश में नहीं बढ़ेंगे प्याज के दाम

लोकसभा चुनाव 2024 के बीच देश में प्याज की कीमतें ना बढ़ें, इसके लिए सरकार ने एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत जैसे देश में प्याज की बढ़ती कीमतें तक सरकार की जीत या हार तय करती हैं. महंगाई से लोग वैसे ही परेशान हैं. वहीं, प्याज की बढ़ती कीमतें भी लोगों को बहुत रुला रही हैं. ऐसे में चुनाव के बीच सरकार ने प्याज के एक्सपोर्ट को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. प्लाज का निर्यात अब 40 प्रतिशत तक महंगा हो गया है. इस फैसले के बाद चुनाव के दौरान प्याज की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी और ये आम आदमी के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है. 

नहीं होगी प्याज की कमी
देश में प्याज पर्याप्त मात्रा उपलब्ध रहे. साथ ही गर्मियों में बढ़ती डिमांड के कारण सप्लाई में कमी ना आए और कीमतें भी नियंत्रित रहे. इसके लिए देश से प्याज के एक्सपोर्ट पर बैन लगा हुआ है. सिर्फ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे कुछ मित्र देशों को ही निश्चित मात्रा में प्याज निर्यात करने की छूट है.

4 मई से प्याज के एक्सपोर्ट पर शुल्क
अब वित्त मंत्रालय ने एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके अनुसार देश से प्याज के एक्सपोर्ट पर 40 प्रतिशत शुल्क देना होगा. ये अधिसूचना 4 मई से लागू हो चुकी है. प्याज के निर्यात पर सरकार ने पिछले साल अगस्त में भी 40 प्रतिशत की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई थी, जो 31 दिसंबर 2023 तक के लिए मान्य थी. अब इसे बढ़ा दिया गया है. 
 
इन सामानों पर भी राहत
सरकार ने जहां एक तरफ प्याज के निर्यात पर शुल्क लगाया है. वहीं, देश में चना दाल की कमी को पूरा करने के लिए देसी चने के आयात पर शुल्क छूट देने का फैसला किया है. इंपोर्ट ड्यूटी से ये छूट 31 मार्च 2025 तक मिलेगी. वहीं, 31 अक्टूबर 2024 से पहले जारी होने वाले ‘बिल ऑफ एंट्री’ के तहत विदेशों से मंगाई जाने वाली ‘पीली मटर’ पर भी सरकार कोई शुल्क नहीं लेगी. देसी चना और पीली मटर का उपयोग देश में बेसन की आपूर्ति करने के लिए होता है.

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क्या होता है बिल ऑफ एंट्री
‘बिल ऑफ एंट्री’ एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिसे इंपोर्टर्स या सीमा शुल्क निकासी एजेंट्स के इंपोर्टेड माल के लैंड होने से पहले दाखिल किया जाता है. प्याज पर निर्यात शुल्क बढ़ाए जाने के अलावा किए गए सभी अन्य  बदलाव भी 4 मई से ही लागू माने जाएंगे.

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