होम / सक्सेस स्टोरी / Sunday Special: Mahindra & Mohammed से कैसे हुआ Mahindra & Mahindra? जानिए पीछे की कहानी

Sunday Special: Mahindra & Mohammed से कैसे हुआ Mahindra & Mahindra? जानिए पीछे की कहानी

इतने बड़े बड़े प्रतिष्ठित पदों पर काम करने के बाद दोनों भाइयों ने अपना काम शुरू करने का इरादा किया. दोनों भाइयों ने तय किया कि वो स्टील निर्माण का काम करेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

आज महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप किसी पहचान की मोहताज नहीं है. 7 दशक पहले एक स्टील ट्रेडिंग कंपनी कैसे एक ऑटोमोबाइल ग्लोबल ब्रांड बनी, ये कहानी जितनी प्रभावशाली है, उतनी ही प्रेरणादायक भी. आज की Success Story में हम महिंद्रा एंड महिंद्रा की कामयाबी की कहानी को जानेंगे.

कहानी की शुरुआत

पंजाब के लुधियाना शहर में 1892 में जगदीश चंद्र महिंद्रा का जन्म हुआ था, जिन्हें JC के नाम से भी जाना जाता है. जगदीश चंद्र 9 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे. बेहद कम उम्र में ही पिता के देहांत के बाद जदगीश चंद्र के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई. इरादों से बेहद मजबूत JC ने हार मानने की बजाय इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया. JC शिक्षा का महत्व जानते थे, इसलिए उन्होंने अपने सभी 8 भाइयों और बहनों को अच्छी शिक्षा दिलाई. उन्होंने अपने छोटे भाई कैलाश चंद्र को उच्च शिक्षा के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी भेजा था. जगदीश चंद्र ने खुद विक्टोरिया जुबली टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट, मुंबई से अपनी डिग्री हासिल की थी, जो आज की तारीख में भी एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और टेक्निकल इंस्टीट्यूट है.

जेसी ने अपने करियर की शुरुआत टाटा स्टील से की थी, जहां वो 1929-1940 तक सीनियर सेल्स मैनेजर के पद पर थे, लेकिन जब दूसरा विश्व युद्ध छिड़ा तब भारत सरकार ने उन्हें भारत का पहला स्टील कंट्रोलर ऑफ इंडिया नियुक्त कर दिया. दूसरी ओर छोटे भाई अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं कुछ साल तक नौकरी की. बाद में 1942 में अमेरिका में भारत के इंडियन परचेजिंग मिशन का अध्यक्ष बनाया गया. 1945 में जब कैलाश चंद्र वापस भारत लौटे तो उन्हें भारत सरकार ने इंडियन कोल फील्ड कमेटी का चेयरमैन बना दिया. साथ ही ऑटोमोबाइल एंड ट्रैक्टर पैनल की बागडोर भी थमा दी गई.

Mahindra & Mohammed की पड़ी नींव

इतने बड़े-बड़े प्रतिष्ठित पदों पर काम करने के बाद दोनों भाइयों ने अब अपना काम शुरू करने का इरादा किया. दोनों भाइयों ने तय किया कि वो स्टील निर्माण का काम करेंगे, क्योंकि उन्हें पूरा भरोसा था कि जब देश अंग्रेजों से आजाद होगा तो देश की तरक्की के लिए स्टील की मांग बहुत ज्यादा होगी. इन दोनों भाइयों ने अपने एक दोस्त मलिक गुलाम मुहम्मद के साथ मिलकर 1945 में एक स्टील कंपनी की शुरुआत कर दी. इस कंपनी का नाम रखा गया Mahindra & Mohammed. कंपनी की ब्रांडिंग M&M के नाम से हो गई. तीनों ने अपनी स्टील कंपनी को देश की सबसे कामयाब स्टील कंपनी बनाने का सपना देखा था, लेकिन ये सपना 1947 में आजादी के लिए हुए बंटवारे की भेंट चढ़ गया. 

जब देश का बंटवारा हुआ तो मलिक गुलाम मुहम्मद भारत छोड़कर हमेशा के लिए पाकिस्तान चले गये. गुलाम मुहम्मद को पाकिस्तान का पहला वित्त मंत्री बनाया गया, फिर उन्हें गवर्नर जनरल भी नियुक्त किया गया. गुलाम मुहम्मद के जाने से कैलाश चंद्र और जगदीश चंद्र को बड़ा झटका लगा, क्योंकि गुलाम मुहम्मद की Mahindra & Mohammed में एक बड़ी हिस्सेदारी थी. पाकिस्तान चले जाने की वजह से गुलाम मुहम्मद अब बिजनेस में कोई योगदान नहीं कर सकते थे, इसलिए उन्होंने कंपनी में अपनी सारी हिस्सेदारी बेच दी. Mahindra & Mohammed जिसे देश की सबसे कामयाब स्टील कंपनी बनाने के लिए शुरू किया गया था, अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही थी. 

Mahindra & Mohammed कैसे Mahindra & Mahindra बनी

लेकिन दोनों भाइयों JC और KC ने हिम्मत नहीं हारी. वो कंपनी को उस बुरे दौर से भी उबार लाये. लेकिन उनके सामने अब दूसरी समस्या थी. गुलाम मुहम्मद के पाकिस्तान चले जाने के बाद अब कंपनी का एक पार्टनर कम हो गया था और कंपनी में उसकी कोई हिस्सेदारी नहीं थी तो कंपनी के नाम में भी बदलाव की जरूरत महसूस हुई. मगर ये आसान नहीं था, क्योंकि कंपनी की सारी स्टेशनरी और सामानों पर M&M छपा हुआ था. कंपनी की हालत ऐसी नहीं थी कि उसे बदलकर नये सिरे से तैयार किया जाये. इसलिए दोनों भाइयों ने एक रास्ता निकाला. उन्होंने Mahindra & Mohammed की जगह कंपनी का नाम Mahindra & Mahindra कर दिया. जिससे उसका छोटा नाम M&M जस का तस बना रहे. 

स्टील का बिजनेस ठीक ठाक चल रहा था, लेकिन दोनों भाई चाहते थे कि वो भारत में कुछ ऐसा करें जिसे अबतक किसी ने सोचा न हो. कैलाश चंद्र महिंद्रा जब अमेरिका में थे तो उन्होंने वहां पर Willys Jeep को देखा था. उन्होंने तय किया कि वो इसे भारत में बनाएंगे. दोनों ने इसके लिए कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया और 1947 में ही मुंबई में इसकी मैन्यूफैक्चरिंग शुरू कर दी. कुछ समय बाद ही ये जीप पूरे देश में मशहूर हो गई. सरकारी विभागों से लेकर रसूख वाले लोग जीप को रखना शान समझते थे. ऑटोमोबाइल सेक्टर में ये महिंद्रा की पहली बड़ी कामयाबी थी. इसके बाद महिंद्रा एंड महिंद्रा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

NPST को मिला Technology Company of the Year का अवॉर्ड, Frost & Sullivan से प्राप्त हुआ सम्मान

टॉप बैंकिंग और UPI पेमेंट्स टेक्नोलॉजी प्रदाता को Company of the Year के रूप में सम्मानित किया गया.

15-January-2025

मुश्किलों भरे आसमान में ऐसे ही मजबूत नहीं हुई IndiGo, दिलचस्प है सफलता की कहानी

इंडिगो की शुरुआत ऐसे समय हुई थी जब इस सेक्टर में प्रवेश एयर टर्बुलेंस में फंसे विमान जितना ही जोखिमभरा था.

24-May-2024

पिता बस कंडक्टर, बेटे ने बनाया गेमिंग इंडस्ट्री में नाम; आज हैं करोड़ों के मालिक

इंस्टाग्राम पर 17 लाख फॉलोवर्स है. जबकि यूट्यूब पर उन्हें 57 लाख लोग फॉलो करते हैं और हाल ही में पीएम मोदी से मुलाकात के लिए भारत के टॉप 7 गेमर्स को आमंत्रित किया गया था.

12-April-2024

किसान के बेटे ने खड़ी कर दी करोड़ों की कंपनी, बिजनेस से नहीं था नाता, जानें सक्सेस स्टोरी

खास बात है कि इस कारोबारी को कुछ भी विरासत में नहीं मिला. साधारण से किसान परिवार जन्मे इस कारोबारी की सफलता और संघर्ष की कहानी लाखों युवाओं को प्रेरणा देने वाली है.

06-April-2024

भारत के अरबपतियों में शामिल हुआ नया नाम, क्या आपको पता है कौन हैं Lalit Khaitan?

कंपनी के शेयरों में 50% की वृद्धि देखने को मिली है जिससे ललित खेतान का नाम भी भारतीय अरबपतियों में शामिल हो गया है.

14-December-2023


बड़ी खबरें

बैंकिंग सिस्टम को RBI का बड़ा सहारा, VRR के जरिए डाले 81,590 करोड़ रुपये

वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी RBI का एक मौद्रिक उपकरण है, जिसका इस्तेमाल बैंकिंग सिस्टम में अल्पकालिक लिक्विडिटी उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है.

8 hours ago

विप्रो का ₹15,000 करोड़ का मेगा बायबैक. 5 जून होगी रिकॉर्ड डेट

विप्रो ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 60 करोड़ तक इक्विटी शेयरों को वापस खरीदने के प्रस्ताव को कंपनी के बोर्ड और शेयरधारकों दोनों की मंजूरी मिल चुकी है.

4 hours ago

पेट्रोल-डीजल को लेकर घबराने की जरूरत नहीं, देश में भरपूर स्टॉक, इंडियन ऑयल ने दी सफाई

कंपनी ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को पैनिक बाइंग यानी घबराहट में ज्यादा ईंधन खरीदने से बचना चाहिए.

6 hours ago

तेल की महंगाई से भारत की रफ्तार पर ब्रेक, FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.2% रहने का अनुमान: ICRA

Icra ने FY27 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जबकि पहले यह अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल था.

7 hours ago

ओडिशा सरकार का बड़ा कदम, 1 जून से सरकारी विभागों में सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों की होगी खरीद

राज्य सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी हुई है.

8 hours ago