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तेल की महंगाई से भारत की रफ्तार पर ब्रेक, FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.2% रहने का अनुमान: ICRA

Icra ने FY27 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जबकि पहले यह अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 hours ago

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है. रेटिंग एजेंसी Icra Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.5% से घटाकर 6.2% कर दिया है. एजेंसी का कहना है कि महंगे ऊर्जा आयात, कमजोर निवेश माहौल और वैश्विक अनिश्चितताओं ने आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को प्रभावित किया है. हालांकि, निर्यात और वाहन उत्पादन जैसे कुछ सेक्टर अभी भी मजबूती दिखा रहे हैं.

बिजनेस एक्टिविटी में मामूली सुधार, लेकिन व्यापक तेजी नहीं

Icra के बिजनेस एक्टिविटी मॉनिटर, जो 16 हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स पर आधारित एक संयुक्त सूचकांक है, उसकी सालाना वृद्धि अप्रैल 2026 में 8.3% रही. मार्च 2026 में यह 8.0% थी. हालांकि एजेंसी ने कहा कि यह सुधार सीमित रहा और नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के दौरान दर्ज 9-11% की मजबूत वृद्धि से अभी भी नीचे है. एजेंसी के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे वित्तीय परिस्थितियां सख्त हुई हैं और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है.

कच्चे तेल का अनुमान बढ़ाया

Icra ने FY27 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जबकि पहले यह अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल था. एजेंसी का मानना है कि वित्त वर्ष की पहली छमाही में तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं और दूसरी छमाही में घटकर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक ऊंची ऊर्जा कीमतें बनी रहने से निवेश मांग कमजोर पड़ सकती है, कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है और उपभोक्ताओं का भरोसा भी घट सकता है.

कमजोर मानसून और एल नीनो का खतरा

Icra ने FY27 की दूसरी छमाही के लिए संभावित एल नीनो और कमजोर मानसून को भी बड़ा जोखिम बताया है. एजेंसी के अनुसार, यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

16 में से 9 संकेतकों में गिरावट

अप्रैल 2026 में बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स में हल्की बढ़त के बावजूद 16 में से 9 संकेतकों का प्रदर्शन मार्च की तुलना में कमजोर रहा. घरेलू हवाई यात्री यातायात अप्रैल में 1.6% घट गया, जबकि मार्च में इसमें 0.9% की गिरावट थी. एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें बढ़ने से हवाई किराए महंगे हुए और यात्रा मांग प्रभावित हुई.

डीजल खपत की वृद्धि दर मार्च के 8.0% से घटकर अप्रैल में सिर्फ 0.3% रह गई. पेट्रोल खपत की वृद्धि भी 7.6% से घटकर 6.4% हो गई. खनन उत्पादन अप्रैल में 6.9% घटा, जो मार्च में 3.1% की गिरावट से भी ज्यादा खराब रहा. फिनिश्ड स्टील की खपत वृद्धि भी 14.1% से घटकर 8.1% रह गई. GST ई-वे बिल जनरेशन की वृद्धि दर 11.8% रही, जो पिछले छह महीनों का सबसे धीमा स्तर है.

कुछ सेक्टरों ने दिखाई मजबूती

कमजोर संकेतकों के बीच कुछ सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन भी किया. गैर-तेल वस्तु निर्यात अप्रैल में 9.0% की दर से बढ़ा, जबकि मार्च में इसमें 9.2% की गिरावट दर्ज की गई थी. इसमें कमोडिटी कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी का योगदान रहा.

पैसेंजर व्हीकल उत्पादन अप्रैल में सालाना आधार पर 12.8% बढ़ा, जबकि मार्च में यह वृद्धि 9.0% थी. टू-व्हीलर उत्पादन भी मजबूत बना रहा. वाहन रजिस्ट्रेशन अप्रैल में 12.8% बढ़े. रिपोर्ट के मुताबिक GST दरों में तर्कसंगत बदलाव से ग्राहकों की खरीद क्षमता में सुधार हुआ.

सीमेंट उत्पादन वृद्धि 4.7% से बढ़कर 9.4% हो गई, जबकि बिजली उत्पादन 0.8% से बढ़कर 4.1% पहुंच गया. गर्मी और हीटवेव की वजह से बिजली मांग में इजाफा देखने को मिला.

कोर सेक्टर की रफ्तार अब भी धीमी

भारत के आठ प्रमुख कोर सेक्टरों की वृद्धि दर अप्रैल में मामूली बढ़कर 1.7% रही, जो मार्च में 1.2% थी. हालांकि Icra ने कहा कि अनुकूल बेस होने के बावजूद प्रदर्शन कमजोर बना हुआ है.

स्टील, सीमेंट और बिजली उत्पादन को छोड़कर बाकी पांच कोर उद्योगों में उत्पादन घटा है. एजेंसी का मानना है कि इसका असर औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों पर भी दिखाई दे सकता है.

ग्रामीण रोजगार की स्थिति बिगड़ी

अप्रैल में श्रम बाजार के संकेतक भी कमजोर हुए. भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.2% हो गई, जो पिछले छह महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. मार्च में यह 5.1% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में वर्कर-पॉपुलेशन रेशियो 55.5% से घटकर 54.9% हो गया, जबकि ग्रामीण बेरोजगारी दर सात महीने के उच्च स्तर 4.6% पर पहुंच गई. हालांकि शहरी क्षेत्रों में स्थिति कुछ बेहतर रही और शहरी बेरोजगारी दर 6.8% से घटकर 6.6% हो गई.

मई के शुरुआती संकेत बेहतर

Icra के मुताबिक मई 2026 के शुरुआती आंकड़े कुछ राहत देने वाले हैं. 1 से 21 मई के बीच रोजाना औसत वाहन रजिस्ट्रेशन करीब 23% बढ़कर 76,600 यूनिट तक पहुंच गया, जबकि अप्रैल में यह वृद्धि 13% थी.

इसी अवधि में बिजली मांग वृद्धि भी 4.4% से बढ़कर 8.1% हो गई. हालांकि एजेंसी ने चेतावनी दी कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी के कारण बॉन्ड यील्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड स्प्रेड और रुपये पर दबाव अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं.
 


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