होम / बिजनेस / RBI का सरकार को रिकॉर्ड तोहफा, 2.87 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष ट्रांसफर
RBI का सरकार को रिकॉर्ड तोहफा, 2.87 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष ट्रांसफर
यह फैसला RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में मुंबई में हुई केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ते राजकोषीय दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष (Surplus Transfer) देने का फैसला किया है. यह पिछले साल दिए गए 2.69 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड लाभांश से भी करीब 7% अधिक है. माना जा रहा है कि आरबीआई से मिलने वाली यह बड़ी रकम सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित करने और खर्चों को संभालने में मदद करेगी.
RBI बोर्ड की बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
यह फैसला RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में मुंबई में हुई केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने आकस्मिक जोखिम बफर (CRB) को बैलेंस शीट के 7.5% से घटाकर 6.5% करने का भी निर्णय लिया है. इसके बावजूद जोखिम प्रावधानों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
विदेशी मुद्रा भंडार बिक्री से बढ़ी RBI की कमाई
विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार की बिक्री से आरबीआई की आय में बड़ा इजाफा हुआ, जिससे अधिशेष राशि बढ़ाने में मदद मिली. 31 मार्च 2026 तक RBI की बैलेंस शीट 20.61% बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई. वहीं, केंद्रीय बैंक की सकल आय में 26.42% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि जोखिम प्रावधानों से पहले खर्च 27.60% बढ़ा.
RBI की शुद्ध आय में भी बड़ा उछाल
आरबीआई की वित्त वर्ष 2025-26 में जोखिम प्रावधान और वैधानिक निधियों में हस्तांतरण से पहले शुद्ध आय 3.96 लाख करोड़ रुपये रही. इससे पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 3.13 लाख करोड़ रुपये था. आरबीआई ने कहा कि संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचा (ECF) केंद्रीय बैंक को आकस्मिक जोखिम बफर को बैलेंस शीट के 4.5% से 7.5% के बीच बनाए रखने की लचीलापन देता है.
जोखिम प्रावधान दोगुने से ज्यादा बढ़े
केंद्रीय बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए CRB में 1.09 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का फैसला किया है. पिछले वित्त वर्ष में यह राशि 44,861.70 करोड़ रुपये थी.विशेषज्ञों का कहना है कि CRB अनुपात घटाने के बावजूद जोखिम प्रावधानों में तेज बढ़ोतरी के कारण अधिशेष राशि बाजार की उम्मीदों से थोड़ी कम रही. आरबीआई की बैलेंस शीट में 21% की वृद्धि के कारण जोखिम प्रावधान दोगुने से ज्यादा बढ़ गए.
सरकार को राहत, लेकिन चुनौतियां बरकरार
विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई से रिकॉर्ड अधिशेष मिलने के बावजूद सरकार के सामने राजकोषीय दबाव पूरी तरह खत्म नहीं होगा. विशेषज्ञों के अनुसार, उर्वरक और ईंधन सब्सिडी की बढ़ती जरूरत, कम कर संग्रह और तेल कंपनियों से कम लाभांश सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव बनाए रख सकते हैं.
टैग्स