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भारत में प्रीमियम खर्च बरकरार, सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच भी लग्जरी सेगमेंट में बनी मजबूती: रिपोर्ट
आम उपभोक्ता खर्च में सुस्ती, लेकिन प्रीमियम कारों और शहरी खर्च में दिख रही मजबूती
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 hours ago
देश की अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेतों के बावजूद भारत में प्रीमियम कंजम्प्शन यानी हाई-एंड उपभोक्ता खर्च मजबूत बना हुआ है. डीएसवी एसेट मैनेजर्स (DSP Asset Managers) की रिपोर्ट के मुताबिक, जहां आम उपभोक्ता मांग कमजोर पड़ती दिख रही है, वहीं प्रीमियम कारों, शहरी खर्च और चुनिंदा हाई-वैल्यू सेगमेंट्स में अच्छी मजबूती बनी हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक रिकवरी फिलहाल मुख्य रूप से प्रीमियम उपभोक्ता वर्ग तक सीमित नजर आ रही है.
प्रीमियम कारों की बिक्री बढ़ी, टू-व्हीलर डिमांड कमजोर
“तथ्य मई 2026” नाम की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में यूटिलिटी व्हीकल्स समेत पैसेंजर व्हीकल बिक्री में 5.3 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि यूटिलिटी व्हीकल्स को छोड़ दें तो पैसेंजर कार बिक्री 7.5 फीसदी घट गई. वहीं, टू-व्हीलर बिक्री में 16.7 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो आम उपभोक्ता वर्ग की कमजोर मांग का संकेत मानी जा रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक प्रीमियम सेगमेंट में यूटिलिटी व्हीकल्स की मांग बढ़ने के पीछे जीएसटी कटौती का असर भी माना जा रहा है, जिससे ग्राहकों की खरीदारी क्षमता में सुधार आया है.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दिखी मजबूती
रिपोर्ट में कहा गया है कि मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में अच्छी तेजी देखने को मिली है. अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 57 के स्तर पर बना रहा, जो मजबूत औद्योगिक गतिविधियों का संकेत है. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ अप्रैल में 4 फीसदी रही, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन आउटपुट में 9.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस दौरान सीमेंट उत्पादन 12.2 फीसदी और स्टील उत्पादन 8.7 फीसदी बढ़ा.
अर्थव्यवस्था में अभी भी मजबूत गति की कमी
हालांकि डीएसपी एसेट मैनेजर्स ने यह भी कहा कि व्यापक अर्थव्यवस्था में अभी भी मजबूत गति की कमी बनी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक साल के दौरान कई आर्थिक संकेतकों में कोई बड़ी तेजी देखने को नहीं मिली है. यानी आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह कमजोर नहीं हैं, लेकिन उनमें व्यापक स्तर पर तेज सुधार भी नजर नहीं आ रहा.
हाउसिंग लोन ग्रोथ में भी दिखी सुस्ती
रिपोर्ट के मुताबिक हाउसिंग लोन ग्रोथ, जो पहले तक मजबूत बनी हुई थी, अब उसमें भी नरमी के संकेत मिलने लगे हैं. अप्रैल 2026 में हाउसिंग लोन ग्रोथ घटकर 10.7 फीसदी रह गई, जबकि एक साल पहले यह 11.5 फीसदी थी.
महंगे कच्चे तेल से बढ़ सकता है महंगाई का दबाव
डीएसपी ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत में महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं, खासकर थोक महंगाई के जरिए. अप्रैल में थोक मूल्य सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई 0.9 फीसदी बढ़ा, जबकि भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत सालाना आधार पर 67.3 फीसदी बढ़कर 75.5 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई.
रिपोर्ट में कहा गया है कि डब्ल्यूपीआई बास्केट का करीब 34 फीसदी हिस्सा क्रूड ऑयल और प्राकृतिक गैस से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो महंगाई का दबाव लगातार बढ़ सकता है.
रुपये पर बना दबाव, आरबीआई कर रहा हस्तक्षेप
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 89 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 84.8 पर था. डीएसपी ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक डॉलर बेचकर मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है, जिससे रुपये में गिरावट उतनी तेज नहीं हो रही.
शेयर बाजार वैल्यूएशन अब आकर्षक स्तर पर
रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बाद भारतीय शेयर बाजार के कई हिस्सों में वैल्यूएशन काफी सस्ते स्तर पर पहुंच गए हैं. कुछ सेक्टर्स में वैल्यूएशन अब कोविड महामारी और ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस जैसे दौर के निचले स्तरों के करीब पहुंच चुके हैं.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी, SIP निवेश मजबूत
अप्रैल में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 1.5 अरब डॉलर की निकासी की. हालांकि घरेलू निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक एसआईपी निवेश सालाना आधार पर 30.7 फीसदी बढ़कर 295 अरब रुपये तक पहुंच गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बाजार में वैल्यूएशन आकर्षक बने रहते हैं तो आने वाले समय में विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर भी कुछ हद तक लगाम लग सकती है.
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