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IPO मार्केट में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी, SEBI ने प्राइस डिस्कवरी नियमों में सुधार का दिया प्रस्ताव
सेबी ने दोबारा सूचीबद्ध होने वाले शेयरों की बेस प्राइस तय करने के लिए नया फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है. इसके तहत सबसे हालिया ट्रेड प्राइस को आधार बनाया जाएगा, बशर्ते वह छह महीने से ज्यादा पुराना न हो.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 hours ago
पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (SEBI) ने आईपीओ (IPO) और दोबारा लिस्ट होने वाले शेयरों के लिए प्राइस डिस्कवरी सिस्टम में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है. नियामक का मानना है कि मौजूदा प्री-ओपन कॉल ऑक्शन सिस्टम कई मामलों में सही कीमत तय करने में प्रभावी साबित नहीं हो रहा है. इसी वजह से सेबी अब डमी प्राइस बैंड, फ्लेक्सिंग मैकेनिज्म और बेस प्राइस तय करने के नियमों में बदलाव कर बाजार को ज्यादा पारदर्शी और संतुलित बनाने की तैयारी कर रहा है.
Relisted Shares के लिए बदलेगा बेस प्राइस तय करने का तरीका
सेबी ने दोबारा सूचीबद्ध होने वाले शेयरों की बेस प्राइस तय करने के लिए नया फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है. इसके तहत सबसे हालिया ट्रेड प्राइस को आधार बनाया जाएगा, बशर्ते वह छह महीने से ज्यादा पुराना न हो.
अगर ऐसी कीमत उपलब्ध नहीं होती है, तो स्वतंत्र वैल्यूएशन एजेंसियों के मूल्यांकन प्रमाणपत्र के आधार पर बेस प्राइस तय की जाएगी. वहीं जिन शेयरों का कारोबार छह महीने से ज्यादा समय तक निलंबित रहा है, उनके लिए दो अलग-अलग वैल्यूएशन एजेंसियों की बुक वैल्यू में से कम कीमत को आधार बनाया जाएगा.
IPO प्राइस डिस्कवरी सिस्टम में भी होगा बदलाव
सेबी ने आईपीओ के दौरान शुरुआती कीमत तय करने की प्रक्रिया में भी बड़े बदलाव सुझाए हैं. नियामक को मिली शिकायतों में कहा गया था कि मौजूदा डमी प्राइस बैंड और बेस प्राइस सिस्टम सही प्राइस डिस्कवरी में मदद नहीं कर रहा है.
सेबी ने एक ऐसे मामले का जिक्र किया, जहां कॉल ऑक्शन सत्र के दौरान करीब 90 फीसदी खरीद ऑर्डर सिर्फ इसलिए रिजेक्ट हो गए क्योंकि वे तय प्राइस बैंड से बाहर थे.
डमी प्राइस बैंड में आएगा फ्लेक्सिंग मैकेनिज्म
अभी आईपीओ शेयरों के लिए बेस प्राइस से 50 फीसदी नीचे और 100 फीसदी ऊपर तक डमी प्राइस बैंड तय होता है. वहीं एसएमई आईपीओ में यह सीमा प्लस या माइनस 90 फीसदी तक सीमित रहती है और इसमें किसी तरह का फ्लेक्सिंग मैकेनिज्म नहीं है.
अब सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि अगर संकेतक संतुलन मूल्य ऊपरी या निचली सीमा के करीब पहुंचता है, तो एक्सचेंज अपने आप प्राइस बैंड को 10 फीसदी तक बढ़ा सकेंगे. इससे अधिक ऑर्डर्स को शामिल करने और सही कीमत तय करने में मदद मिल सकती है.
SME IPO को भी मिलेगा नया फायदा
खास बात यह है कि सेबी अब फ्लेक्सिंग मैकेनिज्म को एसएमई आईपीओ तक भी बढ़ाने की तैयारी में है. एसएमई सेगमेंट में उतार-चढ़ाव ज्यादा होने के बावजूद अभी तक ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छोटे और मध्यम उद्यमों के आईपीओ में बेहतर प्राइस डिस्कवरी और निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है.
प्री-ओपन कॉल ऑक्शन के नियम भी होंगे सख्त
फिलहाल आईपीओ और दोबारा सूचीबद्ध शेयरों के लिए लिस्टिंग के पहले दिन सुबह 9 बजे से 10 बजे तक प्री-ओपन कॉल ऑक्शन सत्र आयोजित किया जाता है. इसका उद्देश्य सामान्य ट्रेडिंग शुरू होने से पहले संतुलन कीमत तय करना होता है.
सेबी ने अब प्रस्ताव दिया है कि कॉल ऑक्शन तभी सफल माना जाएगा, जब कम-से-कम पांच अलग-अलग PAN आधारित खरीदारों और विक्रेताओं के ऑर्डर्स के आधार पर कीमत तय हो.
अगर सही प्राइस डिस्कवरी नहीं हो पाती है, तो कॉल ऑक्शन अगले कारोबारी दिनों में भी जारी रह सकता है, जब तक संतुलित कीमत तय न हो जाए.
11 जून तक मांगे गए सुझाव
सेबी ने इन प्रस्तावित बदलावों पर बाजार सहभागियों और आम लोगों से 11 जून 2026 तक सुझाव मांगे हैं. माना जा रहा है कि इन सुधारों का उद्देश्य IPO और relisted shares में पारदर्शिता बढ़ाना, अस्थिरता कम करना और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा करना है.
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