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अब बारिश पर भी होगी कमाई, 1 जून से शुरू होगा भारत का पहला वेदर डेरिवेटिव

RAINMUMBAI एक वेदर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट है, जिसमें निवेशक या कंपनियां बारिश की अनिश्चितता से होने वाले आर्थिक जोखिम को हेज कर सकेंगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

भारत अब मौसम आधारित फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है. NCDEX 1 जून 2026 से देश का पहला एक्सचेंज-ट्रेडेड वेदर डेरिवेटिव “RAINMUMBAI” लॉन्च करने जा रहा है. यह ऐसा वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट होगा, जो मुंबई में होने वाली बारिश के आंकड़ों से जुड़ा रहेगा और कंपनियों को मानसून से जुड़े जोखिमों से बचाव का मौका देगा.

क्या है RAINMUMBAI?

RAINMUMBAI एक वेदर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट है, जिसमें निवेशक या कंपनियां बारिश की अनिश्चितता से होने वाले आर्थिक जोखिम को हेज कर सकेंगी. आसान शब्दों में समझें तो अगर किसी कंपनी को डर है कि कम या ज्यादा बारिश से उसके कारोबार पर असर पड़ सकता है, तो वह इस कॉन्ट्रैक्ट में पोजिशन लेकर संभावित नुकसान की भरपाई कर सकती है.

बारिश के आंकड़ों पर होगा पूरा खेल

यह कॉन्ट्रैक्ट मुंबई में मानसून के दौरान दर्ज होने वाली बारिश पर आधारित होगा. इसमें “क्यूम्युलेटिव डेविएशन रेनफॉल” यानी CDR को ट्रैक किया जाएगा, जो यह बताएगा कि वास्तविक बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) से कितनी ज्यादा या कम रही. इसका भुगतान फसल या संपत्ति के नुकसान के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक बारिश के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा.

IMD के डेटा का होगा इस्तेमाल

RAINMUMBAI कॉन्ट्रैक्ट के लिए भारतीय मौसम विभाग के मुंबई स्थित सांताक्रूज और कोलाबा वेधशालाओं के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा. LPA का निर्धारण 1991 से 2020 तक के 30 साल के ऐतिहासिक डेटा के आधार पर किया गया है, ताकि सिस्टम में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे.

IIT बॉम्बे के सहयोग से तैयार हुआ प्रोडक्ट

NCDEX ने इस वेदर डेरिवेटिव को IIT बॉम्बे के सहयोग से विकसित किया है. एक्सचेंज का कहना है कि यह प्रोडक्ट विज्ञान और वित्तीय बाजारों के मेल का उदाहरण है, जो मौसम से जुड़े जोखिमों को मापने और प्रबंधित करने में मदद करेगा.

किसानों के साथ कई सेक्टरों को होगा फायदा

यह प्रोडक्ट सिर्फ किसानों के लिए नहीं बनाया गया है. बिजली कंपनियां, निर्माण कंपनियां, इंफ्रास्ट्रक्चर फर्म, लॉजिस्टिक्स कंपनियां और कृषि क्षेत्र को कर्ज देने वाले बैंक भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे. मानसून पर निर्भर किसी भी कारोबार को इससे जोखिम प्रबंधन में मदद मिल सकती है.

बीमा से कैसे अलग है यह सिस्टम?

पारंपरिक बीमा में नुकसान का आकलन करने और सर्वे के बाद भुगतान किया जाता है. लेकिन RAINMUMBAI एक कैश-सेटल्ड डेरिवेटिव होगा, जिसमें सेटलमेंट सीधे बारिश के आंकड़ों के आधार पर होगा. इससे भुगतान प्रक्रिया तेज होगी और विवाद की संभावना कम रहेगी.

क्या होंगी कॉन्ट्रैक्ट की प्रमुख शर्तें?

NCDEX के मुताबिक इस कॉन्ट्रैक्ट की कुछ अहम शर्तें होंगी:

1. टिक साइज: 1 मिमी वर्षा
2. लॉट मल्टीप्लायर: प्रति मिमी 50 रुपये
3. अधिकतम ऑर्डर साइज: 50 लॉट
4. दैनिक मूल्य सीमा: 9%
5. ट्रेडिंग समय: सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 बजे से

मौसम जोखिम को मिलेगा नया वित्तीय रूप

विशेषज्ञों का मानना है कि वेदर डेरिवेटिव्स भविष्य में भारत के लिए बड़ा बाजार बन सकते हैं. जलवायु परिवर्तन और मौसम की बढ़ती अनिश्चितता के दौर में ऐसे प्रोडक्ट कंपनियों को जोखिम प्रबंधन का नया विकल्प देंगे. इससे मौसम से जुड़े आर्थिक झटकों को कम करने में मदद मिल सकती है.

NCDEX ने क्या कहा?

NCDEX के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO अरुण रस्ते ने कहा कि भारत सदियों से मानसून की अनिश्चितता के साथ जीता आया है और RAINMUMBAI सभी हितधारकों को इससे निपटने के लिए वैज्ञानिक और रेगुलेटेड साधन देगा. वहीं, IMD के अधिकारी बिक्रम सिंह ने इसे “रेगुलेटेड मार्केटप्लेस में साइंस और फाइनेंस का संगम” बताया.
 


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