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सेवा सेक्टर के दम पर मई में मजबूत रही भारतीय अर्थव्यवस्था, PMI में मामूली गिरावट
मई में मैन्युफैक्चरिंग PMI घटकर 54.3 पर आ गया, जो अप्रैल में 54.7 था. इसका मतलब है कि फैक्टरी गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी रफ्तार पहले के मुकाबले कमजोर हुई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत की आर्थिक गतिविधियों में मई के दौरान मजबूती बरकरार रही, हालांकि कंपोजिट PMI में हल्की गिरावट दर्ज की गई. सेवा क्षेत्र की मजबूत ग्रोथ ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आई सुस्ती की भरपाई कर दी. वहीं बढ़ती इनपुट लागत और कमजोर निर्यात मांग ने कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है.
मई में 58.1 पर आया कंपोजिट PMI
HSBC फ्लैश इंडिया कंपोजिट PMI मई में 58.1 पर रहा, जो अप्रैल में 58.2 था. हालांकि इसमें मामूली गिरावट आई है, लेकिन 50 से ऊपर का स्तर आर्थिक गतिविधियों में विस्तार का संकेत देता है. S&P Global के आंकड़ों के मुताबिक भारत के निजी क्षेत्र में कारोबार की स्थिति अब भी मजबूत बनी हुई है.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार पड़ी धीमी
मई में मैन्युफैक्चरिंग PMI घटकर 54.3 पर आ गया, जो अप्रैल में 54.7 था. इसका मतलब है कि फैक्टरी गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी रफ्तार पहले के मुकाबले कमजोर हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक नए निर्यात ऑर्डर की ग्रोथ पिछले 19 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोर मांग का असर भारतीय कंपनियों पर साफ दिखाई दिया.
सेवा क्षेत्र ने संभाला मोर्चा
मैन्युफैक्चरिंग में सुस्ती के बावजूद सेवा क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को मजबूती दी. घरेलू मांग और सर्विस गतिविधियों में तेजी की वजह से कंपोजिट PMI मजबूत बना रहा. हालांकि कंपनियों ने माना कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा, यात्रा में रुकावटें और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर कारोबार पर पड़ा है.
बढ़ती लागत से कंपनियों पर दबाव
मई के दौरान कंपनियों की लागत में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. ऊर्जा, ईंधन, गैस, धातु, प्लास्टिक, रबर और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी लागत बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ा. इनपुट कीमतों में जुलाई 2022 के बाद सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई. हालांकि कंपनियों ने ग्राहकों पर पूरा बोझ डालने से परहेज किया और बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी सीमित रखी.
स्टॉक बढ़ाने में जुटीं कंपनियां
रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों ने तैयार माल और कच्चे माल का स्टॉक लगातार बढ़ाया है. कच्चे माल की खरीद पिछले तीन महीनों की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ी. विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां भविष्य की मांग को देखते हुए पहले से तैयारी कर रही हैं.
रोजगार और कारोबारी भरोसा मजबूत
निजी क्षेत्र में भर्ती का माहौल सकारात्मक बना हुआ है. सेवा क्षेत्र में रोजगार लगभग एक साल की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी नौकरियों में इजाफा हुआ.
हालांकि कारोबारी भरोसे में हल्की नरमी आई है, लेकिन कंपनियां भविष्य को लेकर अब भी आशावादी नजर आ रही हैं. उन्हें उम्मीद है कि आने वाले महीनों में बाजार की स्थिति और बेहतर हो सकती है.
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