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यस बैंक AT1 बॉन्ड विवाद में नया मोड़, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में फैसले का किया बचाव
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि AT1 बॉन्ड को राइट-ऑफ करना बैंक को बचाने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 37 minutes ago
यस बैंक (Yes Bank) के AT1 बॉन्ड विवाद में नया मोड़ आ गया है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 8,415 करोड़ रुपये के AT1 बॉन्ड को बट्टे खाते में डालने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि 2020 के बैंक पुनर्गठन के दौरान जमाकर्ताओं के हितों और वित्तीय स्थिरता को बचाने के लिए यह कदम जरूरी था.
सरकार ने क्यों बताया फैसला जरूरी?
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि AT1 बॉन्ड को राइट-ऑफ करना बैंक को बचाने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा था. सरकार के मुताबिक उस समय बैंक गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा था और अगर यह कदम नहीं उठाया जाता, तो जमाकर्ताओं और पूरे बैंकिंग सिस्टम पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता था.
क्या होते हैं AT1 बॉन्ड?
AT1 यानी Additional Tier-1 बॉन्ड ऐसे वित्तीय साधन होते हैं, जिन्हें बैंकों की पूंजी मजबूत करने के लिए जारी किया जाता है. इन बॉन्ड्स पर निवेशकों को सामान्य निवेश विकल्पों के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिलता है, लेकिन संकट की स्थिति में इन्हें बट्टे खाते में डाला जा सकता है. सरकार ने अदालत में कहा कि यही इन बॉन्ड्स की मूल संरचना और जोखिम का हिस्सा है.
निवेशकों को मिलता था 9% से ज्यादा रिटर्न
सरकार ने अदालत को बताया कि हर AT1 बॉन्ड का अंकित मूल्य 10 लाख रुपये था और इन पर 9 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिलता था. उच्च रिटर्न की वजह से ये बॉन्ड निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय थे, लेकिन इनके साथ जोखिम भी जुड़ा हुआ था कि बैंक संकट की स्थिति में इन्हें राइट-ऑफ किया जा सकता है.
एसबीआई और RBI ने भी सरकार का समर्थन किया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय स्टेट बैंक ने भी सरकार के पक्ष का समर्थन किया. सरकार ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक ने यस बैंक के पुनर्गठन के दौरान करीब 8,000 करोड़ रुपये का निवेश इस भरोसे पर किया था कि AT1 बॉन्ड को बट्टे खाते में डाला जाएगा.
साथ ही यह भी कहा गया कि देश के बैंक अब तक 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के AT1 बॉन्ड जारी कर चुके हैं. ऐसे में अगर संकट के समय इन्हें राइट-ऑफ करने की अनुमति नहीं दी गई तो बैंकिंग सिस्टम पर गंभीर जोखिम पैदा हो सकता है.
हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
यह मामला उस फैसले से जुड़ा है जिसमें 2023 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने AT1 बॉन्ड राइट-ऑफ को रद्द कर दिया था. इसके खिलाफ यस बैंक और RBI ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी और बॉन्डधारकों को नोटिस जारी किया था.
छोटे निवेशकों को लेकर कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बैंक और RBI से कानूनी प्रावधानों पर और स्पष्ट जानकारी मांगी. साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ताओं को निवेश के आधार पर बॉन्डधारकों का विस्तृत वर्गीकरण देने का निर्देश दिया ताकि छोटे निवेशकों पर पड़ने वाले असर का सही आकलन किया जा सके. अदालत ने सभी पक्षों को एक सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें जमा करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी.
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