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सेबी का बड़ा प्रस्ताव, सैलरी से कटेगा पैसा और सीधे म्युचुअल फंड में जाएगा निवेश
सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक कंपनियां अपने कर्मचारियों की सैलरी से तय रकम काटकर सीधे उनके म्युचुअल फंड खाते में निवेश कर सकेंगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
अब म्यूचुअल फंड में निवेश करना पहले से ज्यादा आसान हो सकता है. बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ऐसे नए नियमों पर काम कर रहा है, जिनके तहत कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी से सीधे पैसा काटकर म्युचुअल फंड (Mutual Fund ) में निवेश कर सकेंगी. इसके अलावा एजेंटों को कमीशन के बदले MF यूनिट्स देने और सामाजिक कार्यों के लिए निवेश का हिस्सा दान करने जैसे प्रस्ताव भी सामने आए हैं.
निवेश के नियमों में बड़ा बदलाव संभव
अभी तक म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए पैसा केवल निवेशक के अपने बैंक खाते से ही भेजा जा सकता है. यह भुगतान आरबीआई से मान्यता प्राप्त पेमेंट गेटवे या सेबी द्वारा अधिकृत संस्थानों के जरिए ही स्वीकार किया जाता है. लेकिन अब सेबी कुछ खास परिस्थितियों में “थर्ड पार्टी पेमेंट” की अनुमति देने पर विचार कर रहा है. यानी निवेशक की ओर से कोई दूसरी संस्था या व्यक्ति भी निवेश राशि जमा कर सकेगा.
कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी से कर सकेंगी निवेश
सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक कंपनियां अपने कर्मचारियों की सैलरी से तय रकम काटकर सीधे उनके म्युचुअल फंड खाते में निवेश कर सकेंगी. इस कदम का मकसद SIP और लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा देना है. माना जा रहा है कि इससे नौकरीपेशा लोगों के लिए नियमित निवेश करना आसान होगा और बचत की आदत मजबूत होगी.
एजेंटों को कैश नहीं, MF यूनिट्स देने का सुझाव
सेबी ने एक और अहम प्रस्ताव रखा है. इसके तहत म्यूचुअल फंड कंपनियां अपने एजेंटों को कमीशन के बदले नकद भुगतान करने की जगह म्युचुअल फंड यूनिट्स दे सकेंगी. रेगुलेटर का मानना है कि इससे एजेंट खुद भी निवेश की तरफ आकर्षित होंगे और लंबी अवधि की बचत को बढ़ावा मिलेगा.
सामाजिक कार्यों के लिए भी इस्तेमाल हो सकेगा निवेश
नए प्रस्तावों में निवेशकों को अपने निवेश या उससे मिलने वाले मुनाफे का एक हिस्सा सामाजिक कार्यों के लिए दान करने की सुविधा देने की बात भी शामिल है. इसके लिए एक पारदर्शी और सुरक्षित सिस्टम तैयार किया जाएगा ताकि निवेशकों का पैसा सही तरीके से इस्तेमाल हो सके.
सुरक्षा और पारदर्शिता पर रहेगा पूरा फोकस
सेबी ने साफ किया है कि निवेश प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएंगे.
1. पैसा देने वाले और निवेश पाने वाले दोनों के लिए KYC अनिवार्य होगा
2. सभी लेन-देन का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखा जाएगा
3. म्युचुअल फंड कंपनियों को पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करनी होगी
4. निवेशक जब चाहें अपनी यूनिट्स बेचकर पैसा निकाल सकेंगे
10 जून तक मांगे गए सुझाव
सेबी ने इन प्रस्तावों पर आम लोगों और बाजार से जुड़े पक्षों से 10 जून तक सुझाव मांगे हैं. सुझावों के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये बदलाव लागू होते हैं तो भारत में म्युचुअल फंड निवेश का दायरा तेजी से बढ़ सकता है और नौकरीपेशा लोगों के बीच SIP संस्कृति को नया बल मिलेगा.
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