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अब रिटायरमेंट के बाद नहीं होगी पैसों की टेंशन! NPS में शुरू हुई मासिक वेतन की सुविधा

इस नई व्यवस्था के बाद NPS सिर्फ रिटायरमेंट के समय पैसा निकालने वाली स्कीम नहीं रहेगा, बल्कि यह धीरे-धीरे “मंथली इनकम प्लान” की तरह भी काम करेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

अगर आप भी रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित आय को लेकर चिंतित रहते हैं, तो अब आपके लिए बड़ी राहत की खबर है. पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में बड़ा बदलाव करते हुए नई रिटायरमेंट इनकम स्कीम (RIS) और फ्लेक्सिबल ड्रॉडाउन ऑपशन लॉन्च किया है. इस नई व्यवस्था के बाद NPS सिर्फ रिटायरमेंट के समय पैसा निकालने वाली स्कीम नहीं रहेगा, बल्कि यह धीरे-धीरे “मंथली इनकम प्लान” की तरह भी काम करेगा. यानी अब रिटायरमेंट के बाद आपको एकमुश्त रकम निकालने की बजाय हर महीने “सैलरी” जैसी नियमित इनकम मिल सकेगी.

आखिर NPS में क्या बदला है?

अब तक NPS में ज्यादातर लोग रिटायरमेंट के बाद अपने फंड का एक हिस्सा एकमुश्त निकालते थे और बाकी रकम से एन्युटी खरीदते थे. लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत सब्सक्राइबर्स को फेस्ड विड्राल, सिस्टमैटिक पेआउट और फ्लेक्सिबल मंथली इनकम जैसे विकल्प मिलेंगे. इसका मतलब यह है कि पूरा रिटायरमेंट कॉर्पस एक साथ खाते में नहीं आएगा, बल्कि जरूरत के हिसाब से धीरे-धीरे पैसा मिलता रहेगा. इससे एक साथ पैसा खत्म होने का जोखिम भी कम होगा.

क्या है नई Retirement Income Scheme (RIS)?

PFRDA के मुताबिक नई RIS का मकसद रिटायरमेंट के बाद लोगों को लंबे समय तक नियमित आय उपलब्ध कराना है. इस स्कीम के जरिए रिटायरमेंट कॉर्पस ज्यादा समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और लोगों को हर महीने नियमित कैश फ्लो मिलता रहेगा. साथ ही पूरा पैसा जल्दी खत्म होने का खतरा भी कम होगा.

नई व्यवस्था में आपका पैसा ड्रॉडाउन मोड में रहेगा. यानी जितनी रकम निकलेगी, बाकी पैसा बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों में लगा रहेगा और उस पर रिटर्न भी मिलता रहेगा. इस तरह यह मॉडल “पेंशन + निवेश” का कॉम्बिनेशन बन जाएगा.

आसान भाषा में समझिए पूरा सिस्टम

मान लीजिए आपने NPS में ₹1 करोड़ का कॉर्पस बनाया है. अब रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा एक साथ निकालने की बजाय आप मंथली पेआउट ऑपशन (Monthly Payout Option) चुनते हैं. ऐसे में हर महीने तय रकम आपके खाते में आती रहेगी, जबकि बाकी पैसा निवेशित रहेगा और उस पर रिटर्न भी मिलता रहेगा. इससे आपकी नियमित आय बनी रहेगी और आपका फंड लंबे समय तक चल सकेगा.

अब मिलेंगे ये नए विकल्प

नई व्यवस्था के तहत सिस्टमेटिक पेआउट फैसिलिटी दी जाएगी, जिसमें आप यह तय कर सकेंगे कि हर महीने कितनी रकम चाहिए, कितने समय तक चाहिए और कितनी तेजी से आपका कॉर्पस निकले. इसके अलावा सिस्टमेटिक पेआउट रेट (SPR) का विकल्प भी मिलेगा. यह प्रतिशत आधारित मॉडल होगा, जिसमें आपके द्वारा चुने गए एनुअल पेआउट के हिसाब से नियमित इनकम मिलती रहेगी.

इसके साथ ही PFRDA ने “RIS Steady” नाम का नया लाइफसाइकिल मॉडल भी लॉन्च किया है. इस मॉडल में उम्र बढ़ने के साथ इक्विटी एक्सपोजर धीरे-धीरे कम होता जाएगा और सुरक्षित निवेश विकल्प बढ़ते जाएंगे. इसका उद्देश्य रिटायरमेंट कॉर्पस को ज्यादा सुरक्षित बनाना है.

उम्र के साथ कैसे बदलेगा निवेश?

RIS Steady Model के तहत 60 साल की उम्र में इक्विटी अलोकेशन ज्यादा रहेगा ताकि बेहतर रिटर्न मिल सके. इसके बाद उम्र बढ़ने के साथ इक्विटी निवेश धीरे-धीरे कम होता जाएगा और सुरक्षित निवेश विकल्प बढ़ते जाएंगे. 75 साल की उम्र तक इक्विटी एक्सपोजर काफी कम हो जाएगा, जबकि 80 साल के बाद सबसे ज्यादा फोकस सुरक्षित निवेश पर रहेगा. इससे बढ़ती उम्र में जोखिम कम करने में मदद मिलेगी.

सबसे ज्यादा फायदा किन लोगों को होगा?

यह नई व्यवस्था सबसे ज्यादा उन लोगों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है, जिनके पास पारंपरिक पेंशन की सुविधा नहीं है. खासतौर पर प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों के लिए यह बड़ा सहारा बन सकता है. इसके अलावा फ्रीलांसर्स, कंसल्टेंट्स और बिजनेस ओवर्स जैसे सेल्फ एम्प्लॉयड लोग भी रिटायरमेंट के बाद नियमित आय बना सकेंगे. वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी यह सिस्टम काफी राहत देने वाला माना जा रहा है, क्योंकि इससे एक साथ पूरा पैसा खत्म होने का डर काफी कम हो जाएगा.

सरकार यह बदलाव क्यों ला रही है?

सरकार और PFRDA इस बदलाव के जरिए रिटायरमेंट के बाद लोगों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करना चाहते हैं. अब तक कई लोग रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा निकाल लेते थे और कुछ सालों में आर्थिक दबाव में आ जाते थे. इसके अलावा भारत में पारंपरिक पेंशन वाली नौकरियां लगातार कम हो रही हैं, जबकि प्राइवेट सेक्टर में रिटायरमेंट प्लानिंग की जरूरत तेजी से बढ़ रही है.

आज के समय में मेडिकल खर्च, घरेलू जरूरतों और रोजमर्रा के खर्चों के लिए रिटायरमेंट के बाद स्थिर मासिक आय बेहद जरूरी हो गई है. यही वजह है कि सरकार अब मंथली इनकम आधारित मॉडल को बढ़ावा दे रही है.

क्या इसमें जोखिम भी है?

इस नई व्यवस्था में कुछ जोखिम भी जुड़े हुए हैं, क्योंकि कॉर्पस का एक हिस्सा Market-Linked Assets में निवेशित रहेगा. अगर बाजार कमजोर रहता है, तो रिटर्न कम हो सकते हैं और पेआउट की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है. हालांकि लाइफसाइकिल मॉडल उम्र बढ़ने के साथ जोखिम को कम करने की कोशिश करता है ताकि रिटायरमेंट कॉर्पस ज्यादा सुरक्षित बना रहे.

NPS में हाल के बड़े बदलाव

पिछले कुछ महीनों में PFRDA ने NPS में कई बड़े बदलाव किए हैं. इनमें ज्यादा विड्राल की अनुमति, नई RIS, Flexible Drawdown Option, Critical Illness के मामलों में राहत और नए इनवेस्टमेंट एवेन्यूज जैसे विकल्प शामिल हैं. इन बदलावों का मकसद NPS को ज्यादा लचीला और उपयोगी बनाना है.

NPS सब्सक्राइबर्स को अब क्या करना चाहिए?

अगर आप NPS में निवेश करते हैं, तो अब सिर्फ पैसा जमा करना काफी नहीं होगा. आपको यह भी समझना होगा कि रिटायरमेंट के बाद पैसा किस तरह निकलेगा. इसके लिए अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग दोबारा जांचना, रिस्क प्रोफाइल समझना, लंप सम और मंथली इनकम के बीच संतुलन बनाना और पारिवारिक खर्चे का सही आकलन करना जरूरी होगा.

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फ्लेक्सिबल विड्रॉल, मंथली इनकम सुविधा, बेहतर लिक्विडिटी और लॉन्ग टर्म कैश फ्लो जैसे फीचर्स के कारण NPS अब मिडिल क्लास और प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों के बीच और ज्यादा लोकप्रिय हो सकता है. खासतौर पर उन लोगों के लिए जिनके पास पारंपरिक पेंशन नहीं है और जो एसआईपी व म्युचुअल फंड जैसी अनुशासित निवेश योजनाओं को पसंद करते हैं, उनके लिए यह नया मॉडल काफी आकर्षक साबित हो सकता है.


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