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टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी राहत, ITR-1 और ITR-4 की Excel Utility जारी
इस बार ITR-1 यानी सहज फॉर्म में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. अब दो हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली आय को भी इस फॉर्म में शामिल किया जा सकेगा. पहले यह सीमा केवल एक हाउस प्रॉपर्टी तक थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई है. आयकर विभाग ने ITR-1 और ITR-4 फॉर्म के लिए एक्सेल यूटिलिटी जारी कर दी है. इसके बाद अब पात्र टैक्सपेयर्स ऑफलाइन डेटा भरकर आसानी से अपना रिटर्न तैयार और फाइल कर सकेंगे. विभाग ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए बताया कि ई-फाइलिंग पोर्टल पर ऑनलाइन फाइलिंग सुविधा भी शुरू कर दी गई है.
टैक्सपेयर्स अब कर सकेंगे ऑफलाइन ITR फाइलिंग
इनकम टैक्स विभाग की ओर से जारी एक्सेल यूटिलिटी के जरिए टैक्सपेयर्स बिना इंटरनेट के भी अपनी आय, कटौतियों और टैक्स से जुड़ी जानकारी भर सकते हैं. डेटा भरने के बाद उसे वैलिडेट कर ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड किया जा सकता है. यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जा रही है, जो पहले से डेटा तैयार करके बाद में रिटर्न फाइल करना चाहते हैं.
क्या होती है एक्सेल यूटिलिटी
एक्सेल यूटिलिटी एक विशेष प्रकार की एक्सेल शीट होती है, जिसे आयकर विभाग ITR फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए जारी करता है. इसमें टैक्सपेयर ऑफलाइन जानकारी भर सकते हैं, त्रुटियों को जांच सकते हैं और फाइनल फाइल तैयार कर सकते हैं. इससे इंटरनेट पर लगातार निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती और फाइलिंग प्रक्रिया ज्यादा सुविधाजनक हो जाती है.
ITR-1 (सहज) में बड़ा बदलाव
इस बार ITR-1 यानी सहज फॉर्म में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. अब दो हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली आय को भी इस फॉर्म में शामिल किया जा सकेगा. पहले यह सीमा केवल एक हाउस प्रॉपर्टी तक थी. ITR-1 उन रेसिडेंशियल टैक्सपेयर्स के लिए होता है, जिनकी कुल सालाना आय 50 लाख रुपये तक है. इसमें सैलरी, पेंशन, दो मकानों से आय, ब्याज से कमाई और सीमित कृषि आय को शामिल किया जा सकता है. इसके अलावा, धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को भी इसमें रिपोर्ट करने की अनुमति दी गई है.
किन लोगों के लिए है ITR-4 सुगम फॉर्म
ITR-4, जिसे सुगम फॉर्म भी कहा जाता है, उन टैक्सपेयर्स के लिए है जो अनुमानित कराधान योजना के तहत रिटर्न फाइल करते हैं. यह फॉर्म निवासी व्यक्तियों, HUF और LLP को छोड़ अन्य फर्मों के लिए उपलब्ध है, जिनकी सालाना आय 50 लाख रुपये तक है. यह धारा 44AD, 44ADA और 44AE के तहत फाइलिंग करने वालों के लिए लागू होता है. इसके जरिए भी धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक के विशेष लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की जानकारी दी जा सकती है.
CBDT ने लागू किए कई नए रिपोर्टिंग नियम
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) पहले ही असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए नए ITR फॉर्म जारी कर चुका है. इस बार फॉर्म में कई नई रिपोर्टिंग शर्तें जोड़ी गई हैं. इनमें लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन, शेयर बायबैक से हुए नुकसान और कुछ विशेष ट्रेडिंग गतिविधियों की जानकारी देना अनिवार्य किया गया है.
क्या होता है ITR
इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR एक आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसमें टैक्सपेयर अपनी सालाना आय, निवेश, कटौतियों और टैक्स भुगतान की जानकारी आयकर विभाग को देता है. सामान्य तौर पर ITR हर साल 31 जुलाई तक फाइल करना होता है. फिलहाल सात अलग-अलग ITR फॉर्म मौजूद हैं और कौन सा फॉर्म लागू होगा, यह टैक्सपेयर की आय और श्रेणी पर निर्भर करता है.
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