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सोने में निवेश का डिजिटल दौर शुरू, NSE ने लॉन्च किए EGRs

यह प्लेटफॉर्म ज्वैलर्स, रिफाइनर्स, ट्रेडर्स और बड़े संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ रिटेल निवेशकों के लिए भी फायदेमंद है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

भारत में सोने में निवेश के पारंपरिक तरीकों के बीच अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) ने इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) लॉन्च कर निवेशकों को एक नया, सुरक्षित और पारदर्शी विकल्प दिया है. यह पहल न केवल गोल्ड ट्रेडिंग को आधुनिक बनाएगी, बल्कि निवेशकों को डिजिटल और फिजिकल गोल्ड के बीच आसान कनेक्ट भी प्रदान करेगी.

क्या हैं इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs)

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) एक तरह की डीमैट सिक्योरिटीज होती हैं, जो वॉल्ट में सुरक्षित रखे गए फिजिकल गोल्ड के मालिकाना हक को दर्शाती हैं. इन्हें सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से मान्यता प्राप्त वॉल्ट में रखा जाता है और डिपॉजिटरी के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप में मेंटेन किया जाता है. हर EGR एक तय मात्रा के सोने से जुड़ा होता है, यानी निवेशक के पास वास्तविक सोने का समर्थन मौजूद रहता है, भले ही वह डिजिटल फॉर्म में हो.

कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम

EGRs को शेयरों की तरह एक्सचेंज पर खरीदा और बेचा जा सकता है. निवेशक जरूरत पड़ने पर इन्हें फिजिकल गोल्ड में भी बदल सकते हैं. इससे डिजिटल निवेश और वास्तविक सोने के बीच सीधा लिंक बनता है. यह सिस्टम उन निवेशकों के लिए खासतौर पर उपयोगी है जो बिना फिजिकल गोल्ड संभाले उसमें निवेश करना चाहते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर उसे वास्तविक रूप में प्राप्त करने का विकल्प भी रखना चाहते हैं.

क्यों जरूरी है यह पहल

NSE के अनुसार, EGRs का उद्देश्य पारंपरिक गोल्ड ओनरशिप और फाइनेंशियल मार्केट के बीच की दूरी को कम करना है. गोल्ड ट्रेडिंग को रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म पर लाने से कीमतों में पारदर्शिता बढ़ेगी और बेहतर प्राइस डिस्कवरी संभव होगी. इसके साथ ही यह पहल बाजार में भागीदारी बढ़ाने और निवेश प्रक्रिया को अधिक संगठित बनाने में भी मदद करेगी.

किन निवेशकों को होगा फायदा

यह प्लेटफॉर्म ज्वैलर्स, रिफाइनर्स, ट्रेडर्स और बड़े संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ रिटेल निवेशकों के लिए भी फायदेमंद है. खास बात यह है कि छोटे निवेशक भी कम मात्रा में सोने में निवेश कर सकते हैं, जो पहले फिजिकल गोल्ड में आसान नहीं था. इससे निवेश का दायरा बढ़ेगा और गोल्ड मार्केट में नई भागीदारी देखने को मिल सकती है.

NSE की तैयारी और टेक्नोलॉजी

NSE ने इस सेगमेंट के लिए अपनी तैयारी भी पूरी कर ली है. एक्सचेंज पहले ही 1,000 ग्राम के गोल्ड बार को EGR में डीमैटेरियलाइज कर चुका है, जो इसकी ऑपरेशनल रेडीनेस को दिखाता है. यह कदम फिजिकल गोल्ड को पूरी तरह ट्रेडेबल इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

NSE के चीफ बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर श्रीराम कृष्णन के मुताबिक, EGRs भारत के सबसे पसंदीदा एसेट यानी सोने से जुड़ने का एक नया और आधुनिक तरीका है. उनका कहना है कि मजबूत टेक्नोलॉजी और बेहतर लिक्विडिटी के जरिए निवेशकों को अब ज्यादा भरोसे और पारदर्शिता के साथ गोल्ड ट्रेडिंग का मौका मिलेगा.

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) की शुरुआत से गोल्ड निवेश का तरीका बदल सकता है. जहां पहले निवेशक फिजिकल गोल्ड या ETF तक सीमित थे, वहीं अब उनके पास एक ऐसा विकल्प है जो डिजिटल भी है और जरूरत पड़ने पर फिजिकल में बदला भी जा सकता है.

यह पहल खासतौर पर उन निवेशकों के लिए अहम है जो सुरक्षित, पारदर्शी और आसान निवेश विकल्प की तलाश में हैं.

 


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