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₹15,000 तक बिना OTP ऑटो पेमेंट, डिजिटल पेमेंट नियमों में बड़ा बदलाव

आरबीआई के अनुसार, ई-मैंडेट से जुड़े इन नियमों में बदलाव इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और कंपनियों से मिले सुझावों के आधार पर किए गए हैं. इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को ज्यादा सुरक्षित, सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

डिजिटल पेमेंट को और आसान और सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए नियम लागू किए हैं. अब कार्ड बदलने पर भी ऑटोमैटिक पेमेंट (ई-मैंडेट) बाधित नहीं होगा और छोटे ट्रांजैक्शन के लिए बार-बार OTP डालने की जरूरत भी खत्म हो जाएगी.

आरबीआई के ताजा निर्देशों के मुताबिक, अगर किसी ग्राहक का डेबिट या क्रेडिट कार्ड दोबारा जारी होता है, तो पुराने कार्ड पर एक्टिव ई-मैंडेट अपने आप नए कार्ड पर ट्रांसफर हो जाएगा. इससे ग्राहकों को बार-बार ऑटो-पेमेंट सेट करने की झंझट से राहत मिलेगी.

₹15,000 तक के ऑटो-पेमेंट पर नहीं लगेगा OTP

नए नियमों के तहत हर महीने होने वाले ₹15,000 तक के ऑटोमैटिक पेमेंट के लिए अब OTP या पासवर्ड (AFA) की जरूरत नहीं होगी. इससे ओटीटी सब्सक्रिप्शन, बिजली बिल या अन्य नियमित भुगतान पहले से ज्यादा आसान हो जाएंगे. हालांकि, ₹15,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए OTP आधारित वेरिफिकेशन अनिवार्य रहेगा.

कुछ मामलों में बढ़ाई गई लिमिट

आरबीआई ने कुछ जरूरी भुगतान कैटेगरी के लिए इस सीमा को बढ़ाया भी है.

1. इंश्योरेंस प्रीमियम
2. म्यूचुअल फंड की किश्तें
3. क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट

इन मामलों में ₹1 लाख तक के ऑटो-पेमेंट बिना OTP के किए जा सकेंगे, जिससे बड़े वित्तीय भुगतान भी सहज हो पाएंगे.

ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा कोई अतिरिक्त चार्ज

केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि ई-मैंडेट सुविधा देने के बदले ग्राहकों से किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क या फीस नहीं ली जाएगी. यह कदम डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है.

शिकायत के लिए मजबूत सिस्टम जरूरी

आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि हर ऑटो-पेमेंट नोटिफिकेशन के साथ ग्राहकों को शिकायत दर्ज करने का पूरा तरीका बताया जाए. साथ ही, शिकायतों के समाधान के लिए एक मजबूत और पारदर्शी सिस्टम विकसित करना भी जरूरी होगा.

आरबीआई के अनुसार, ई-मैंडेट से जुड़े इन नियमों में बदलाव इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और कंपनियों से मिले सुझावों के आधार पर किए गए हैं. इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को ज्यादा सुरक्षित, सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाना है.

इन नए नियमों से ग्राहकों को ऑटो-पेमेंट में सुविधा मिलेगी, फेल ट्रांजैक्शन कम होंगे और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में भरोसा बढ़ेगा. खासतौर पर सब्सक्रिप्शन और बिल पेमेंट करने वाले यूजर्स को बड़ा फायदा मिलेगा.
 


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