होम / पर्सनल फाइनेंस / हाई-वैल्यू डिजिटल ट्रांसफर पर RBI का बड़ा प्रस्ताव, 1 घंटे की देरी लागू करने की तैयारी
हाई-वैल्यू डिजिटल ट्रांसफर पर RBI का बड़ा प्रस्ताव, 1 घंटे की देरी लागू करने की तैयारी
आरबीआई ने 50,000 रुपये से अधिक के हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन की सिफारिश भी की है. इसमें विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए “ट्रस्टेड पर्सन” द्वारा पुष्टि की व्यवस्था शामिल हो सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने डिजिटल पेमेंट फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया है. प्रस्ताव के तहत 10,000 रुपये से अधिक के खाते-से-खाते ट्रांसफर पर एक घंटे की देरी (cooling-off period) लागू करने की बात कही गई है. इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ रहे डिजिटल धोखाधड़ी मामलों को कम करना है.
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के मामलों में तेज वृद्धि हुई है. अधिकतर मामले “ऑथराइज़्ड पुश पेमेंट (APP) फ्रॉड” के हैं, जहां उपयोगकर्ताओं को धोखे से खुद ही पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है.
1 घंटे का “कूलिंग-ऑफ पीरियड” प्रस्ताव
प्रस्ताव के मुताबिक, 10,000 रुपये से अधिक के ट्रांसफर पर 1 घंटे की देरी होगी. इस दौरान ग्राहक अपने ट्रांजैक्शन को कैंसिल भी कर सकेंगे और बैंक संदिग्ध गतिविधियों की जांच कर सकेंगे. इससे धोखेबाजों की तेजी से पैसे निकालने की रणनीति कमजोर होगी.
50,000 रुपये से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त सुरक्षा
भारतीय रिजर्व बैंक ने 50,000 रुपये से अधिक के हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन की भी सिफारिश की है. इसमें विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए “ट्रस्टेड पर्सन” द्वारा पुष्टि की व्यवस्था शामिल हो सकती है.
म्यूल अकाउंट्स पर सख्ती का प्रस्ताव
डिजिटल फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले “म्यूल अकाउंट्स” को रोकने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक और प्रस्ताव रखा है. इसके तहत कुछ खातों में सालाना 25 लाख रुपये तक की क्रेडिट लिमिट तय की जा सकती है, जब तक कि अतिरिक्त जांच पूरी न हो जाए.
यूजर कंट्रोल और “किल स्विच” की सुविधा
भारतीय रिजर्व बैंक ने सुझाव दिया है कि ग्राहकों को अपने डिजिटल ट्रांजैक्शन पर ज्यादा नियंत्रण दिया जाए. इसमें ट्रांजैक्शन लिमिट सेट करने और ऑन/ऑफ करने की सुविधा शामिल होगी. साथ ही, “किल स्विच” फीचर भी प्रस्तावित है, जिससे किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत डिजिटल ट्रांजैक्शन बंद किए जा सकेंगे.
डिजिटल पेमेंट ग्रोथ के साथ बढ़ते खतरे
पिछले एक दशक में डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन में 38 गुना वृद्धि हुई है. लेकिन इसके साथ ही फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़े हैं. राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार, 2021 में 2.6 लाख मामलों में 551 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जबकि 2025 में यह बढ़कर 28 लाख मामलों में 22,931 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
सोशल इंजीनियरिंग फ्रॉड बड़ी चुनौती
भारतीय रिज़र्व बैंक ने कहा है कि अब अधिकतर फ्रॉड सिस्टम हैकिंग से नहीं बल्कि सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी पहचान, दबाव और डीपफेक जैसे तरीकों से किए जा रहे हैं. यह डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए एक नई चुनौती बन चुका है.
फायदे और चुनौतियां
इन प्रस्तावों से जहां उपभोक्ताओं की सुरक्षा बढ़ने की उम्मीद है, वहीं ट्रांजैक्शन में देरी और बैंकों पर बढ़ते अनुपालन बोझ जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं. भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस पर 8 मई तक हितधारकों से सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की जाएंगी.
टैग्स