होम / बिजनेस / IPL सट्टेबाजी से Nasdaq तक: महादेव के पैसे का वैश्विक सफर

IPL सट्टेबाजी से Nasdaq तक: महादेव के पैसे का वैश्विक सफर

महादेव के काले अरबों रुपये वैश्विक वित्तीय प्रणाली के हर प्रहरी को चकमा देने में सफल रहे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

पलक शाह 

अगस्त 2024 में, भारत की कंपनी Eraaya Lifespaces ने अमेरिकी दिवालियापन प्रक्रिया के माध्यम से अटलांटा, जॉर्जिया स्थित और NASDAQ में सूचीबद्ध टेक्नोलॉजी कंपनी EBIX Inc. की 97.58 प्रतिशत हिस्सेदारी 138.577 मिलियन अमेरिकी डॉलर में खरीदी.

अब भारत का प्रवर्तन निदेशालय (ED) आरोप लगा रहा है कि इस अधिग्रहण में इस्तेमाल किया गया पैसा दुबई से संचालित अवैध क्रिकेट सट्टेबाजी सिंडिकेट से आया था.

सिर्फ यह एक लेन-देन ही बताता है कि यह कहानी कितनी दूर तक फैली हुई है.

सौरभ चंद्राकर का पालन-पोषण छत्तीसगढ़ के भिलाई में हुआ. वर्ष 2020 तक वह दुबई में थे और जांच एजेंसियों के अनुसार भारत के सबसे परिष्कृत अवैध सट्टेबाजी नेटवर्कों में से एक का निर्माण कर रहे थे. उनके साझेदार रवि उप्पल थे. उनके द्वारा बनाए गए प्लेटफॉर्म का नाम 'महादेव ऑनलाइन बुक' था .

न कोई कार्यालय था. न कोई पंजीकृत संस्था. न कोई ऐसा दस्तावेजी रिकॉर्ड जो सीधे किसी व्यक्ति तक पहुंचता हो. केवल मोबाइल नंबरों का एक नेटवर्क था और हर नंबर के पीछे किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर खुला बैंक खाता.

अपने चरम पर यह नेटवर्क हर महीने लगभग 450 करोड़ रुपये उत्पन्न कर रहा था. ईडी के आदेश में दर्ज अनुमान के अनुसार महादेव, SkyExchange, Lotus365 और उनसे जुड़े प्लेटफॉर्म्स का संयुक्त नेटवर्क सालाना 4,000 करोड़ से 5,000 करोड़ रुपये के बीच कारोबार कर रहा था. यह आंकड़ा किसी मध्यम आकार की वैध कंपनी के टर्नओवर जैसा दिखाई देता है, न कि भूमिगत जुए से होने वाली कमाई जैसा.

इसका संचालन ढांचा बेहद व्यवस्थित था.

चंद्राकर और उप्पल सीधे सट्टेबाजों को नहीं संभालते थे. वे "पैनल" बेचते थे, जो प्रभावी रूप से फ्रेंचाइजी यूनिट्स की तरह काम करते थे. अपने चरम पर लगभग 2,000 पैनल एक साथ संचालित हो रहे थे. प्रत्येक के पास एक सुपरवाइजर, चार कर्मचारी, कई मोबाइल नंबर और ऐसे बैंक खाते थे जो अक्सर उन लोगों के नाम पर खोले गए थे जिन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी.

छत्तीसगढ़ के एक सब्जी विक्रेता को मोबाइल सिम योजना का प्रस्ताव दिया गया. उसने अपना आधार और पैन विवरण जमा किया. कुछ ही हफ्तों में उसके नाम के खाते से करोड़ों रुपये का लेन-देन हो गया. उसे इसकी जानकारी तब मिली जब उसका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया.

एक वेल्डर के पूर्व नियोक्ता ने उसके और उसकी पत्नी के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और डेबिट कार्ड तथा मोबाइल नंबर अपने पास रख लिए. बाद में इन खातों का इस्तेमाल सट्टेबाजी लेन-देन में किया गया. दोनों खाते फ्रीज कर दिए गए. दोनों का इस गतिविधि से कोई संबंध नहीं था.

ईडी के आदेश में ऐसे कई उदाहरण दर्ज हैं. यह कोई संयोग नहीं था, बल्कि पूरा कारोबारी मॉडल इसी तरह बनाया गया था.

दुबई में चंद्राकर और उप्पल द्वारा संचालित कॉल सेंटर में छत्तीसगढ़ के पड़ोसी जिलों से आए लगभग एक हजार युवा काम करते थे. इनमें से कई लोग सामान्य बिक्री संबंधी नौकरी की उम्मीद लेकर पहुंचे थे.

इस नेटवर्क में SkyExchange भी शामिल था, जिसे कोलकाता के कारोबारी हरि शंकर तिबरेवाल अलग से संचालित करते थे. दस्तावेजों के अनुसार इस प्लेटफॉर्म ने 178 सप्ताह के दौरान प्रति सप्ताह 22 करोड़ रुपये की कमाई की, जो कुल मिलाकर लगभग 4,000 करोड़ रुपये बैठती है.

हर आपराधिक नेटवर्क की तरह एक समय के बाद इनके सामने भी वही समस्या आती है जो वैध व्यवसायों के सामने आती है—संचित पूंजी.

इतनी बड़ी मात्रा में नकदी नकदी के रूप में नहीं रह सकती. उसे कहीं स्थानांतरित करना पड़ता है. उसका रूप बदलना पड़ता है. और इसके लिए एक वित्तीय ढांचे की जरूरत होती है.

तिबरेवाल के पास वही ढांचा मौजूद था.

उनके नेटवर्क ने दुबई, मॉरीशस और ब्रिटेन में शेल कंपनियां बनाई हुई थीं. भारत से पैसा बाहर भेजा जाता, इन संस्थाओं के माध्यम से घुमाया जाता और फिर विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, QIP पूंजी या FCCB फंडिंग के रूप में वापस लाया जाता. कागजों पर यह वैध विदेशी निवेश जैसा ही दिखाई देता था.

यह पैसा दिल्ली के कारोबारी विकास गर्ग की कंपनियों, Eraaya Lifespaces, Vikas Lifecare और Vikas Ecotech में पहुंचा. ये सभी सूचीबद्ध कंपनियां हैं, जिनके बोर्ड, वैधानिक ऑडिटर और वार्षिक खुलासे मौजूद हैं.

गर्ग को इस मार्ग से 765.77 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. ईडी की पूछताछ में गर्ग ने स्वीकार किया कि धन तिबरेवाल के सट्टेबाजी नेटवर्क से आया था. इसके बावजूद उन्होंने इसे स्वीकार किया.

इसके बाद पैसा एक बार फिर भारत से बाहर गया. यहीं से यह मामला असाधारण बन जाता है.

यह धन अमेरिका पहुंचा, वहां एक दिवालियापन अदालत की जांच प्रक्रिया से गुजरा और अंततः एक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध टेक्नोलॉजी कंपनी की नियंत्रक हिस्सेदारी के रूप में सामने आया.

EBIX Inc. की भारत में 25 सहायक कंपनियां थीं, जो बीमा कंपनियों, बैंकों, एयरलाइंस और भुगतान नेटवर्कों को सेवाएं देती थीं. इसके दस्तावेज अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के पास जमा थे और इसके शेयर NASDAQ पर कारोबार करते थे.

अगस्त 2024 में Eraaya Lifespaces ने यह अधिग्रहण पूरा किया. यहीं से यह मामला संगठित अपराध से आगे बढ़कर वित्तीय प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने लगता है.

भारतीय बैंकों ने लेन-देन को संसाधित किया. विदेशी निवेश संरचनाओं ने धन के मार्ग उपलब्ध कराए. कॉरपोरेट फंड जुटाने के माध्यमों ने पूंजी को समाहित किया. ऑडिटरों ने खुलासों पर हस्ताक्षर किए. विभिन्न देशों के नियामकों को कुछ भी असामान्य नहीं लगा. अमेरिकी दिवालियापन अदालत ने अधिग्रहण को मंजूरी दे दी. और सौदा पूरा होने के बाद ही जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि मूल पूंजी आपराधिक स्रोतों से आई थी.

धन शोधन रोकने वाली प्रणालियां, KYC अनुपालन, सीमा-पार पूंजी निगरानी, प्रतिभूति नियमन, पेशेवर निगरानी तंत्र और अदालत की देखरेख में की गई जांच—ऐसा प्रतीत होता है कि इन सभी को सफलतापूर्वक पार कर लिया गया.

शायद यही इस पूरी कहानी का सबसे चौंकाने वाला पहलू है.

5 जून 2026 को प्रवर्तन निदेशालय ने अस्थायी कुर्की आदेश संख्या 16/2026 जारी किया, जिसके तहत विकास गर्ग से जुड़ी 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त कर ली गईं. इनमें EBIX Inc. के 12,84,000 शेयर, अतिरिक्त 2,13,200 शेयर और गोवा, दिल्ली, उत्तराखंड तथा राजस्थान में स्थित 12 अचल संपत्तियां शामिल हैं.

EBIX प्रबंधन को सूचित किया गया कि 893 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का हस्तांतरण नहीं किया जा सकता.

रायपुर स्थित ईडी के एक क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जारी आदेश अब NASDAQ में कारोबार करने वाली कंपनी से जुड़ी संपत्तियों को प्रभावित कर रहा था.

महादेव मामले में यह दसवां ऐसा आदेश था. इससे पहले नौ आदेशों के तहत 2,825 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी थीं. कुल कुर्की राशि अब 3,765 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है.

दूसरी ओर, चंद्राकर और उप्पल कई समनों के बावजूद ईडी के सामने पेश नहीं हुए हैं. वे अब भी यूएई में हैं और कथित तौर पर वानुआतु के यात्रा दस्तावेजों का उपयोग कर रहे हैं.

जांचकर्ताओं को मिले सबूतों में सुनील भंडारी के फोन से बरामद एक संदेश भी शामिल था. भंडारी उन लोगों में से एक थे जो तिबरेवाल के धन को वित्तीय प्रणाली के माध्यम से स्थानांतरित करने में शामिल थे.

इस संदेश में SkyExchange का यूजर आईडी, पासवर्ड और पांच करोड़ सट्टेबाजी अंक मौजूद थे. भंडारी ने स्वीकार किया कि उन्होंने इन्हीं क्रेडेंशियल्स का उपयोग कर चैंपियंस ट्रॉफी और IPL मैचों पर अवैध सट्टेबाजी की थी और भुगतान नकदी कुरियर नेटवर्क के जरिए किया था.

जो व्यक्ति धन को इधर-उधर पहुंचाने में मदद कर रहा था, वही उस प्लेटफॉर्म पर सट्टा भी लगा रहा था जो यह धन पैदा कर रहा था.

आज रात भी कहीं न कहीं एक ऐसा क्रिकेट सट्टा लगाया जा रहा होगा जो ऐसे नंबर से जुड़ा होगा जिसका कोई वास्तविक मालिक नहीं है.

अधिकांश लोग अब भी मानते हैं कि अवैध सट्टेबाजी केवल कानून-व्यवस्था की समस्या है, जुआ, कर चोरी या संगठित अपराध.

लेकिन यह मामला कहीं अधिक गंभीर संकेत देता है.

जांचकर्ताओं का आरोप है कि भारतीय सट्टेबाजी सिंडिकेट से पैदा हुआ धन ऑफशोर शेल कंपनियों के माध्यम से गुजरा, कई देशों की विनियमित वित्तीय प्रणालियों में प्रवेश किया और अंततः एक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध अमेरिकी कंपनी के अधिग्रहण को वित्तपोषित करने में इस्तेमाल हुआ.

सबसे चिंताजनक बात सिर्फ यह नहीं है कि ऐसा हुआ.

बल्कि यह है कि इसे रोकने के लिए बनाई गई लगभग हर प्रणाली इसे होने से रोकने में विफल दिखाई देती है.

और यही एक बड़ा सवाल खड़ा करता है,

वैश्विक वित्तीय प्रणाली में हर दिन होने वाले कितने ऐसे लेन-देन हैं जो पूरी तरह वैध दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में वैध नहीं हैं?

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

IPO बाजार में हलचल: AGS Health समेत 4 कंपनियों को SEBI की मंजूरी

AGS Health और PGP Glass मिलकर करीब ₹8,600 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं. वहीं, Jio Platforms के संभावित मेगा IPO ने भी बाजार की उत्सुकता बढ़ा दी है.

1 hour ago

Gen Z और छोटे शहरों ने बदली ब्यूटी मार्केट की तस्वीर, फ्लिपकार्ट की बिक्री 50% बढ़ी

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय उपभोक्ता अब वैज्ञानिक रूप से विकसित स्किनकेयर उत्पादों, प्रीमियम ब्यूटी ब्रांड्स और वैश्विक ट्रेंड्स से प्रेरित उत्पादों पर अधिक खर्च कर रहे हैं.

3 hours ago

RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी कमी, एक हफ्ते में निकले 10 अरब डॉलर

एक सप्ताह में करीब 10 अरब डॉलर घटा भारत का फॉरेक्स रिजर्व, गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.75 अरब डॉलर की कमी; विदेशी मुद्रा आस्तियों में हालांकि बढ़ोतरी दर्ज

4 hours ago

BRICS देशों में यूपी का जलवा, ₹50,000 करोड़ के निर्यात से बनाया नया रिकॉर्ड

BRICS और सहयोगी देशों को उत्तर प्रदेश से 5.36 अरब डॉलर का निर्यात, राज्य के MSME, हस्तशिल्प और चमड़ा उद्योग ने बनाया नया रिकॉर्ड

4 hours ago

₹1 लाख करोड़ राजस्व का लक्ष्य, FMCG में बड़ा दांव; ईशा अंबानी ने RCPL के विस्तार का रोडमैप रखा

फूड पार्क नेटवर्क में 30,000 करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी, कैंपा और इंडिपेंडेंस ब्रांड की तेज बढ़त के दम पर रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की बड़ी महत्वाकांक्षा

8 hours ago


बड़ी खबरें

IPO बाजार में हलचल: AGS Health समेत 4 कंपनियों को SEBI की मंजूरी

AGS Health और PGP Glass मिलकर करीब ₹8,600 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं. वहीं, Jio Platforms के संभावित मेगा IPO ने भी बाजार की उत्सुकता बढ़ा दी है.

1 hour ago

IPL सट्टेबाजी से Nasdaq तक: महादेव के पैसे का वैश्विक सफर

महादेव के काले अरबों रुपये वैश्विक वित्तीय प्रणाली के हर प्रहरी को चकमा देने में सफल रहे.

1 hour ago

RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी कमी, एक हफ्ते में निकले 10 अरब डॉलर

एक सप्ताह में करीब 10 अरब डॉलर घटा भारत का फॉरेक्स रिजर्व, गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.75 अरब डॉलर की कमी; विदेशी मुद्रा आस्तियों में हालांकि बढ़ोतरी दर्ज

4 hours ago

इनोवेशन का मूल्यांकन उसके प्रभाव से होना चाहिए, वैल्यूएशन से नहीं: डॉ. प्रफुल आर. नाइक

आविष्कारक, उद्यमी और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. प्रफुल रामचंद्र नाइक ने BW Businessworld से विशेष बातचीत में पेटेंट, भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और भविष्य में स्थिरता व मानव कल्याण की बढ़ती भूमिका पर अपने विचार साझा किए.

2 hours ago

Gen Z और छोटे शहरों ने बदली ब्यूटी मार्केट की तस्वीर, फ्लिपकार्ट की बिक्री 50% बढ़ी

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय उपभोक्ता अब वैज्ञानिक रूप से विकसित स्किनकेयर उत्पादों, प्रीमियम ब्यूटी ब्रांड्स और वैश्विक ट्रेंड्स से प्रेरित उत्पादों पर अधिक खर्च कर रहे हैं.

3 hours ago