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नई ITR गाइडलाइन: अब इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म में देना होगा दो पता और दो मोबाइल नंबर

नए ITR फॉर्म में बदलावों का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को अधिक पारदर्शी, सरल और व्यवस्थित बनाना है जिसमें दो पते और दो संपर्क विवरण जैसी नई व्यवस्था के साथ कुछ जटिल रिपोर्टिंग नियमों में राहत दी गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वालों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 से जुड़े असेसमेंट ईयर 2026-27 के फॉर्म में सरकार ने अहम बदलाव किए हैं. हाल ही में जारी किए गए अपडेटेड ITR फॉर्म्स में सबसे बड़ा बदलाव व्यक्तिगत जानकारी वाले सेक्शन में देखने को मिला है, जहां अब टैक्सपेयर्स को अधिक विस्तृत संपर्क और पते की जानकारी देनी होगी. इन बदलावों का उद्देश्य टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को अधिक सटीक और सरल बनाना बताया जा रहा है.

ITR फॉर्म में बड़ा बदलाव

नए नियमों के तहत ITR-1 से लेकर ITR-7 तक सभी फॉर्म्स में ‘पर्सनल इंफॉर्मेशन’ सेक्शन को अपडेट किया गया है. अब टैक्सपेयर्स को सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो पते देने का विकल्प मिलेगा. पहले फॉर्म में केवल एक पता दर्ज करना होता था, लेकिन अब प्राइमरी (मुख्य) पता अनिवार्य होगा और इसके साथ सेकेंडरी (दूसरा) पता भी दर्ज किया जा सकेगा. यह बदलाव उन लोगों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जो नौकरी या व्यवसाय के चलते अलग-अलग स्थानों पर रहते हैं.

प्राइमरी और सेकेंडरी डिटेल जरूरी

फॉर्म में संपर्क जानकारी वाले सेक्शन में भी बड़ा बदलाव किया गया है. अब एक प्राइमरी मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के साथ-साथ एक सेकेंडरी मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी देने का विकल्प भी मिलेगा. इससे आयकर विभाग को टैक्सपेयर्स से संपर्क करने में अधिक सुविधा मिलेगी और रिकॉर्ड भी अधिक व्यवस्थित रहेगा.

टैक्स प्रतिनिधियों के लिए फॉर्म हुआ आसान

जो लोग किसी अन्य व्यक्ति की ओर से टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं, उन्हें ‘प्रतिनिधि’ कहा जाता है. पहले प्रतिनिधि से कई विस्तृत जानकारियां मांगी जाती थीं, लेकिन नए फॉर्म में प्रक्रिया को सरल कर दिया गया है. अब प्रतिनिधि के लिए केवल नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जैसी तीन मुख्य जानकारियां देना पर्याप्त होगा. इस बदलाव से रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया तेज और कम जटिल होने की उम्मीद है.

कैपिटल गेन रिपोर्टिंग में भी राहत

नए ITR फॉर्म में डुअल रिपोर्टिंग (दोहरी जानकारी देने) की व्यवस्था को हटा दिया गया है. पहले कुछ मामलों में अलग-अलग समय और दरों के आधार पर कैपिटल गेन की विस्तृत रिपोर्टिंग करनी होती थी, लेकिन चूंकि पिछले वर्ष 2024-25 में टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, इसलिए अब इस जटिल रिपोर्टिंग की आवश्यकता नहीं रही. इससे टैक्स फाइलिंग का ढांचा पहले की तुलना में अधिक सरल हो गया है.

 


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