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अडानी एयरपोर्ट बिजनेस पर विदेशी निवेशकों की नजर, 12 हजार करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार बड़े ग्लोबल निवेशकों का एक समूह अडानी ग्रुप के एयरपोर्ट कारोबार में निवेश को लेकर बातचीत कर रहा है. इस निवेश की कुल वैल्यू करीब 1.3 बिलियन डॉलर यानी 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

अडानी ग्रुप का एयरपोर्ट कारोबार एक बार फिर वैश्विक निवेशकों के रडार पर आ गया है. सिंगापुर की निवेश कंपनी टेमासेक और अल्फा वेव ग्लोबल समेत कई विदेशी निवेशक अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) में 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश करने की तैयारी में हैं. अगर यह डील पूरी होती है, तो अडानी ग्रुप के एयरपोर्ट बिजनेस का वैल्यूएशन करीब 18 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. तेजी से बढ़ते हवाई यात्री ट्रैफिक और भारत के एविएशन सेक्टर की संभावनाओं ने विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है.

एयरपोर्ट बिजनेस में बड़ी हिस्सेदारी चाहते हैं विदेशी निवेशक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार बड़े ग्लोबल निवेशकों का एक समूह अडानी ग्रुप के एयरपोर्ट कारोबार में निवेश को लेकर बातचीत कर रहा है. इस निवेश की कुल वैल्यू करीब 1.3 बिलियन डॉलर यानी 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है.

इन निवेशकों का मानना है कि भारत में आने वाले वर्षों में एयर ट्रैफिक तेजी से बढ़ेगा और निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को इसका बड़ा फायदा मिलेगा. अडानी ग्रुप फिलहाल देश का सबसे बड़ा प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर बन चुका है और यही वजह है कि विदेशी फंड्स इस सेक्टर में बड़ी हिस्सेदारी चाहते हैं.

18 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है वैल्यूएशन

प्रस्तावित निवेश के बाद अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड का वैल्यूएशन करीब 18 बिलियन डॉलर यानी लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. यह वैल्यूएशन भारत के एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अडानी ग्रुप की मजबूत स्थिति को दर्शाता है.

तुलना करें तो GMR Airports का मार्केट वैल्यूएशन हाल ही में करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये रहा था. ऐसे में अडानी ग्रुप का एयरपोर्ट बिजनेस निवेशकों के लिए तेजी से उभरता हुआ बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म माना जा रहा है.

प्रीमियम वैल्यूएशन पर अटकी है बातचीत

हालांकि अभी यह डील शुरुआती बातचीत के दौर में है और इसके सफल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. रिपोर्ट्स के अनुसार अडानी ग्रुप अपने एयरपोर्ट बिजनेस के लिए प्रीमियम वैल्यूएशन चाहता है, जिसे लेकर कुछ निवेशक सावधानी बरत रहे हैं.

बताया जा रहा है कि कुछ विदेशी निवेशकों ने निश्चित रिटर्न वाले स्ट्रक्चर्ड निवेश का प्रस्ताव रखा था, लेकिन ग्रुप ने उसे स्वीकार नहीं किया. यही वजह है कि डील को अंतिम रूप देने में अभी समय लग सकता है.

एयरपोर्ट विस्तार पर अडानी ग्रुप का बड़ा फोकस

अडानी ग्रुप आने वाले वर्षों में अपने एयरपोर्ट कारोबार पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी में है. कंपनी ने FY27 के लिए करीब 40 हजार करोड़ रुपये के कैपेक्स प्लान की घोषणा की है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा एयरपोर्ट बिजनेस के लिए रखा गया है.

ग्रुप मुंबई, नवी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ और जयपुर एयरपोर्ट्स पर बड़े स्तर पर ‘सिटी-साइड डेवलपमेंट’ प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है. इसके अलावा 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले अहमदाबाद एयरपोर्ट पर नया टर्मिनल बनाने की तैयारी भी चल रही है.

नवी मुंबई एयरपोर्ट पर तेजी से चल रहा विकास कार्य

अडानी ग्रुप नवी मुंबई एयरपोर्ट के दूसरे फेज के विकास कार्य को भी तेजी से आगे बढ़ा रहा है. कंपनी का अनुमान है that मौजूदा क्षमता अगले 12 से 18 महीनों में पूरी तरह भर सकती है, क्योंकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में एविएशन सेक्टर की ग्रोथ आने वाले वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रहने वाली है, जिसका सीधा फायदा एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को मिलेगा.

वित्तीय प्रदर्शन में भी दिखी मजबूती

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में भी सुधार देखने को मिला है. FY26 में ऑपरेशन्स से होने वाला रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 34.4 फीसदी बढ़ा है. वहीं टैक्स के बाद मुनाफा दोगुने से ज्यादा बढ़कर 1,731 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

हालांकि कंपनी की कुल देनदारियां भी बढ़ी हैं. 31 मार्च तक कुल कर्ज करीब 65,976 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 37.7 फीसदी ज्यादा है. इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ संभावनाओं पर बना हुआ है.

भारत के एविएशन सेक्टर पर बढ़ा वैश्विक भरोसा

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट्स में शामिल हो चुका है. बढ़ती आय, तेजी से बढ़ता मिडिल क्लास और घरेलू उड़ानों की मांग ने एयरपोर्ट सेक्टर को निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है.

इसी वजह से टेमासेक और अल्फा वेव ग्लोबल जैसे बड़े विदेशी निवेशक अब भारत के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में लंबी अवधि का दांव लगाने की तैयारी कर रहे हैं.
 


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